Saturday, 30 March 2019

नग्गर किला : अद्भुत वास्तुशिल्प

  नग्गर किला को वास्तुशिल्प एवं नक्काशी की शानदार संरचना कहा जाना चाहिए। जी हां, नग्गर किला की संरचना अद्भुत एवं विलक्षण है।

  भारत के हिमाचल प्रदेश के कुल्लू शहर का यह विलक्षण किला अपनी खास नक्काशी के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। नग्गर किला को नग्गर कैसल के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। 

करीब 500 वर्ष प्राचीन इस दिव्य-भव्य किला की सुन्दर पर्यटक वालीवुड़ की फिल्मों में भी देख चुके हैं। वस्तुत: नग्गर किला राजवंश का निवास था।
  मनाली से करीब 21 किलोमीटर दूर स्थित यह शानदार किला बेहद अद्भुत है। मध्ययुगीन काल का यह किला राजवंश की शान रहा है।

 कुल्लू के राजा सिद्ध सिंह ने इस शानदार  किला का निर्माण कराया था। विशेषज्ञों की मानें तो इस किला का निर्माण 1460 में किया गया था। 
  राजवंश प्रथा का अन्त होने के बाद वर्ष 1978 में इसे एक शानदार होटल के तौर पर पर्यटन केन्द्र के रूप में तब्दील कर दिया गया। 

  खास यह कि नग्गर किला की लकड़ी की शानदार नक्काशी एवं पत्थरों की संरचना बेहद आकर्षक है। व्यास नदी के तट पर पर्वत शिखर पर विद्यमान नग्गर किला को हिमाचल प्रदेश शान भी माना जाता है।
  खास यह कि इस शानदार किला में आकर्षक एवं विशेष स्थानों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। इसमें मंदिर, कलादीर्घा एवं मखमली घास के शानदार मैदान आदि हैं।

  नग्गर किला में कई अति प्राचीन मंदिर हैं। खास यह कि इस शानदार महल का निर्माण कराने में गढ़क पत्थरों का उपयोग किया गया है।
  खास यह कि नग्गर किला पूरी तरह से भूकम्परोधी है। कारण कुछ समय पहले आये भूकम्प में आसपास के निर्माण ध्वस्त हो गये लेकिन नग्गर किला की संरचना में कहीं कोई प्रभाव नहीं दिखा। 

  इस लिए भी हो सका क्योंकि इसकी संरचना की तकनीकि भी शानदार है। इसका वास्तुशास्त्र हिमाचल शैली को  रेखांकित करती है। इसे यंू भी कह सकते हैं कि नग्गर किला की शानदार संरचना में पश्चिमी हिमालयी वास्तुकला का दर्शन होता है। 

  नग्गर किला अर्थात कैसल खास तौर से पत्थरों एवं लकड़ी की शानदार संरचना है। विशेषज्ञों की मानें तो नग्गर किला की संरचना में काष्ठकुणी शैली का शानदार उपयोग किया गया है। 

  खासियत के कारण ही नग्गर किला वैश्विक पर्यटकों के बीच खास चर्चित है। नग्गर किला के निर्माण में देवदार की लकड़ी का उपयोग किया गया है। देवदार वृक्षोंं की लकड़ी का अपना एक अलग ही सौन्दर्य होता है। 

  यही सौन्दर्य नग्गर किला को विशिष्ट बना देता है। खास यह कि लकड़ी की इस शानदार संरचना में कील का कोई उपयोग नहीं हुआ है। 

  खास यह कि नग्गर किला की कलादीर्घा अद्भुत एवं विशेष है। इसमें कुल्लवी जूता, टोपी, कोट, बरतन, प्राचीन बतरन आदि इत्यादि बहुत कुछ रेखांकित एवं प्रदर्शित है। यह कलादीर्घा नग्गर किला की शान मानी जाती है। 

  खास यह कि इस कलादीर्घा में रूसी कलाकार निकोलस रोयरिच की शानदार पेंटिंग भी प्रदर्शित है। नग्गर किला का शानदार रेस्टोरेंट अद्भुत है। झरोखा अंदाज में बना यह रेस्टोरेंट लंच एवं डिनर को आैर भी अधिक स्वादिष्ट बना देता है।

  खास यह कि नग्गर किला से चौतरफा कुल्लू घाटी दर्शनीय है। इसे एक शानदार विरासत होटल के तौर पर भी जाना जाता है।
   नग्गर किला की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट कुल्लू-मनाली एयरपोर्ट भुन्टर है।
  निकटतम रेलवे स्टेशन जोगिन्दर नगर जंक्शन एवं कालका जंक्शन हैं। पर्यटक सड़क मार्ग से भी नग्गर किला की यात्रा कर सकते हैं।
32.227240,77.197140

Wednesday, 27 March 2019

कुथार किला: बेजोड़ वास्तुशिल्प

   कुथार किला की सुन्दरता एवं वास्तुशिल्प का कोई जोड़ नहीं। प्रकृति की गोद में रचा-बसा कुथार किला प्राकृतिक सौैन्दर्य का अद्भुत आयाम है। 

   भारत के हिमाचल प्रदेश के शहर सोलन का यह शानदार हिस्सा ऐेतिहासिक एवं पौराणिक महत्व रखता है। कुथार किला वस्तुत: हिम शिखर पर बसा एक शानदार एवं सुन्दर वास्तुशिल्प है।
  शिमला से करीब 52 किलोमीटर दूर एवं सोलन से करीब 33 किलोमीटर दूर स्थित कुथार किला 800 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है।

   खास यह कि कुथार किला हिमाचल प्रदेश के पर्यटन का मुख्य आकर्षण है। वस्तुत: इस दिव्य-भव्य किला का निर्माण करीब 800 वर्ष पूर्व गोरखा राजाओं ने कराया था। इस क्षेत्र में गोरखा राजाओं का शासन था। हालांंकि कुथार किला के कुछ हिस्से 80 वर्ष पुराने हैं।

   करीब 52.8 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैला कुथार किला अपने खास सौन्दर्य शास्त्र के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है।
   कुथार किला परिसर में सुन्दर एवं प्राकृतिक स्थानों की एक शानदार श्रंखला विद्यमान है। सुन्दर एवं शानदार उद्यान, पानी के सुन्दर झरने एवं बाग-बगीचे खास तौर से कुथार किला की शोभा हैं। 


  प्राचीन मंदिर कुथार किला के धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्वरूप को रेखांकित करते हैं। खास यह कि गोरखा राजाओं का यह किला एवं कसौली का हिल स्टेशन वैश्विक पर्यटकों का मुख्य आकर्षण है। कुथार किला एवं आसपास दर्शनीय स्थलों की एक शानदार श्रंखला है। 

   समुद्र तल से करीब 1300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कुथार किला चौतरफा प्रकृति की निराली छटा से आलोकित है। कुथार पर्वत के शिखर पर स्थित कुथार किला को हिमाचल प्रदेश की शान माना जाता है।

  कुथार पर्वत पर स्थित होने के कारण ही इस किला को कुथार किला के नाम से जाना पहचाना जाता है। शिमला एवं सुबाथु किला का सौन्दर्य भी पर्यटक यहां निहार सकते हैं।
   चौतरफा हिमालय की शानदार श्रंखला अति दर्शनीय प्रतीत होती है। सर्दियों में बर्फ से ढ़की पर्वत चोटियांं कुथार किला के सौन्दर्य में चार चांद लगा देती हैं। 

   कुथार किला में राजस्थानी वास्तुकला का शानदार निरूपण दिखता है। इसे राजपूताना रचनात्मकता की शानदार संरचना कहा जा सकता है। 
  यहां के भित्ति चित्र एवं मेहराब सुन्दरता के शानदार प्रतिमान हैं। कक्षों एवं गलियारों में चित्रांकन एवं लकड़ी की नक्काशी अति दर्शनीय एवं मोहित करने वाली है।

   खास यह कि कुथार किला की सुन्दरता अति विस्मयकारी है। वस्तुत: कुथार किला कभी कुटहार के शाही राज परिवार का निवास था। 
  लिहाजा इसे एक शानदार विरासत कहा जा सकता है। कुथार किला का एक बड़़ा हिस्सा शाही सैरगाह के तौर पर रहा।

   शाही सैरगाह को प्रकृति की गोद कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। शाही सैरगाह में प्रकृति की शानदार संरचना का एहसास होता है। यह दृश्य विस्मय एवं मुग्ध करने वाला होता है।
  खास यह कि कुथार किला परिसर में एक सुन्दर रिसार्ट भी है। इस रिसार्ट मेंं सभी लक्जरी सुविधायेंं उपलब्ध हैं। पर्यटक यहां शाही जीवन शैली का आनन्द एवं अनुभव ले सकते हैं।

   आधुनिक काल के परिप्रेक्ष्य में देखें तो कुथार ब्रिाटिश कालीन एक शानदार रियासत थी। कुथार राज्य की स्थापना 17 वीं शताब्दी में हुयी थी। कुथार किला पर राजसी वैभव की दर्शनीयता विद्यमान है। 

   कुथार किला वस्तुत: हिमाचल प्रदेश के पर्यटन का मुख्य आकर्षण है। शांति एवं शीतलता का एहसास कराने वाले इस दिव्य-भव्य किला की दर्शनीयता अद्भुत है।


  कुथार किला की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जुबरहट्टी एयरपोर्ट शिमला है। पर्यटक चण्ड़ीगढ़ एयरपोर्ट से भी कुथार किला की यात्रा कर सकते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन कालका जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी कुथार किला की यात्रा कर सकते हैं।
30.910110,77.096690

Sunday, 17 March 2019

नालागढ़ किला: अद्भुत सौन्दर्य

  नालागढ़ किला की सुन्दरता एवं वास्तुशास्त्र का कोई जोड़ नहीं। इस अभेद दुर्ग का कहीं कोई सानी नहीं। शिवालिक की पहाडि़यों का यह शानदार किला अद्भुत एवं शानदार है।

  खास यह कि नालागढ़ किला देश की एक शानदार राष्ट्रीय धरोहर है। भारत के हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला का नालागढ़ किला अपने खास वास्तुशिल्प एवं सौन्दर्य शास्त्र के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
  शहरी कोलाहल से दूर नालागढ़ किला शांति, शीतलता एवं प्रचुर हरियाली के लिए खास तौर से प्रसिद्ध है।

   सिरसा नदी के किनारे शिवालिक की पहाड़ियों पर स्थित नालागढ़ किला वैश्विक पर्यटकों की खास पसंद है।
  खास तौर से जो पर्यटक प्रकृति की गोद में शांति का एहसास चाहते हैं। हालांकि नालागढ़ किला ने अब हेरिटेज रिसोर्ट का स्वरूप अख्तियार कर लिया है। 

  इस भव्य-दिव्य किला को 1421 में शानदार तौर तरीके से गढ़ा गया। राजा विक्रम चन्द्र ने इस शानदार किला का निर्माण कराया था।
  शिवालिक पहाड़ियों के मध्य बना नालागढ़ किला करीब 10 एकड़ में फैला है। खास तौर से पर्यटक यहां से शिवालिक की पहाड़ियों का शानदार दृश्यावलोकन कर सकते हैं। 

   किला का वास्तुशिल्प मुगल शैली पर आधारित है। शांति एवं शीतलता प्रदान करने वाला यह इलाका प्राकृतिक सौन्दर्य का खास खजाना है।
  अद्भुत प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों को मुग्ध कर लेते हैं। चौतरफा मखमली घास के मैदान एवं ढ़लान एक ह्मदय स्पर्शी एहसास कराते हैं।

  पर्यटक नालागढ़ किला एवं उसके आसपास प्रकृति की गोद में होने का एहसास करते हैं। शांत एवं शीतलता के मध्य बादलों की हलचल पर्यटकों को बेहद रोमांचित करती है।
  खास यह कि पर्यटक कभी खुद को बादलों की गोद में होने का एहसास करते हैं तो कभी बादल पर्यटकों की गोद में होतेे हैं।

  बादलों का यह खिलंदड़पन बेहद रोमांचक होता है। मध्ययुगीन काल की यह राजपूत रियासत अभी भी एक शानदार शौर्यगाथा दिग्दर्शित करती है। चण्डीगढ़ से करीब 65 किलोमीटर दूर स्थित नालागढ़ किला एक शानदार हिल स्टेशन भी है।
   कारण एक अंतहीन प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को बरबस अपनी ओर खींचता है। सोलन जिला का यह खूबसूरत पहाड़ी स्टेशन विलक्षण एवं अद्भुत है।

  खास यह कि नालागढ़ किला एवं उसके आसपास सुन्दर एवं आकर्षक स्थानों की एक लम्बी श्रंखला है। यादवेन्द्र गार्डेन नालागढ़ किला इलाके की शान माना जाता है। यादवेन्द्र गार्डेन नालागढ़ किला से करीब 36 किलोमीटर दूर स्थित है। 

   इसे पिंजौर एवं मुगल गार्डेन के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। यादवेन्द्र गार्डेन शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी पर स्थित एक शानदार सुन्दर आदर्श स्थान है। यह एक प्राचीन उद्यान है।
   इसका निर्माण 17 वीं शताब्दी में नवाब फदाई खान ने किया था। मुगल शैली में बने इस शानदार गार्डेन में कई विशेष आकर्षण दर्शनीय हैं। खास यह कि इस शानदार उद्यान में तीन महल हैं। 

   इन महलों को जल महल, शीश महल एवं रंग महल के नाम से जाना पहचाना जाता है। फव्वारों की श्रंखला यहां की शोभा एवं शान है।
  इसके अलावा नालागढ़ किला से करीब 71 किलोमीटर दूर गोविन्द सागर झील भी एक खास आकर्षण है। भाखडा़ बांध की यह शानदार झील सिखों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह के नाम पर है।

   पर्यटक गोविन्द सागर झील पर प्राकृतिक सौन्दर्य का भरपूर आनन्द उठा सकते हैं। खास यह कि इस झील में मछलियों की पचास से अधिक प्रजातियां पायी जाती हैं। मजाथल वन्य जीव अभयारण्य भी नालागढ़ किला के सौन्दर्य का एक शानदार नगीना है।

   पर्यटक मजाथल वन्य जीव अभयारण्य में रोमांचक सैर सपाटा का एहसास करते हैं। हिमाचल प्रदेश का यह शानदार अभयारण्य समृद्ध जैव विविधिता के लिए जाना जाता है। 
 आैषधीय वनस्पतियों के साथ ही वन्य जीवन की प्रचुरता अभयारण्य को काफी कुछ खास बना देती है। 

   समुद्र तल से करीब 1996 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह अभयारण्य करीब 36.4 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। बाघ, तेंदुआ, भालूू, जंगली बिल्ली, जंगली सुअर, हिरण आदि जीव इस अभयारण्य की शान एवं शोभा हैं।
   नालागढ़ किला की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट चण्ड़ीगढ़ एयरपोर्ट है। चण्डीगढ़ एयरपोर्ट से नालागढ़ किला की दूरी करीब 65 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन घनौली जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी नालागढ़ किला की यात्रा कर सकते हैं।
31.042100,76.717600

Wednesday, 13 March 2019

लोधी गार्डेन: प्राचीन सौन्दर्य

   लोधी गार्डेन को खूबसूरती का इन्द्रधनुषी आयाम कहा जाना चाहिए। भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का यह प्राचीन एवं एतिहासिक उद्यान एक राष्ट्रीय धरोहर है।

   नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित लोधी गार्डेन की सुन्दरता अति दर्शनीय है। लोधी गार्डेन को लेडी विलिंगटन पार्क भी कहा जाता है। वस्तुत: दिल्ली के इस बेहद पसंदीदा उद्यान को ब्रिटिश हुकूमत ने पुर्ननिर्माण करा कर सुन्दर आयाम दिया था। 

  लेडी विलिंगटन शासक विलिंगटन के माक्र्वेंस की पत्नी थीं। विलिंगटन 1931 से 1936 तक भारत के ब्रिटिश गवर्नर जनरल थे। 
  स्वाधीनता के बाद विलिंगटन पार्क का नाम बदल कर लोधी उद्यान रख दिया गया। इस उद्यान का एक बार फिर पुर्ननिर्माण 1968 में किया गया।

  विशेषज्ञों की मानें तो लोधी गार्डेन का वास्तुशिल्प जोसेफ एलन स्टीन एवं गेटेट ईको ने तैयार किया था। खास यह कि इस क्षेत्र में कई शानदार स्मारक हैं। जिसमें मोहम्मद शाह एवं सिकंदर लोदी के मकबरे हैं। 

  खास तौर से यहां लोदी राजवंश का वास्तुशिल्प दर्शनीय है। मकबरा का निर्माण 15 वीं शताब्दी में किया गया था। मोहम्मद शाह के मकबरा का निर्माण 1444 में अलाउद्दीन आलम शाह ने कराया था।
   विशेषज्ञों की मानें तो लोधी गार्डेन बनने से पहले यह इलाका एक सुन्दर गांव था। वर्ष 1936 में इस गांव को बेहतरीन तौर तरीके एवं सलीके से बसाया गया। 

   मोहम्मद शाह लोदी सैयद राजवंश के तीसरे शासक थे। शाह का शासनकाल इसलिए भी जाना पहचाना जाता है क्योंकि उनकी वीरता का कोई सानी नहीं था।
  यहां सिकंदर लोदी का मकबरा भी खास है। बड़ा गुम्बद भी लोधी गार्डेन की खूबसूरती एवं प्राचीनता का एक शानदार हिस्सा है। 

   मोहम्मद शाह के मकबरा से करीब 300 मीटर दूर एक आलीशान मकबरा है। इस मकबरा दफन शव की पहचान नहीं हो पायी थी।
  किन्तु इतना अवश्य है कि सिकंदर लोदी के शासनकाल में वह कोई बड़ा पदाधिकारी था। मकबरा एवं उसके आसपास इस्लामी नक्काशी एवं कुरान की आयतें दर्ज हैं।

  शीश गुम्बद भी लोधी गार्डेन की शान है। इस दोमंजिला इमारत में वास्तुशिल्प अति दर्शनीय है। इसके अंदर कई कब्रा हैं।
   मान्यता है कि इसका निर्माण मुगल शासक सिकंदर लोदी के शासनकाल में किया गया था। मकबरा में शीशे की टाइल्स का सौन्दर्य कुछ अलग ही प्रतीत है।

   खास अलंकरण के कारण ही इसे शीश गुम्बद कहा जाता है। अठपुला भी खास दर्शनीय है। अठपुला सिकंदर लोदी के मकबरा से कुछ दूर सात मेहराबों वाला एक शानदार पुल है।
   इस पुल के मेहराबों का फैलाव कुछ अधिक है। इस शानदार पुल में आठ खम्भे हैं। इसका निर्माण मुगल शासक ने कराया था। 

   विशेषज्ञों की मानें तो इस अठपुला का निर्माण बादशाह अकबर के शासनकाल में नवाब बहादुर ने कराया था।
  वस्तुत: लोधी गार्डेन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की शान है। चौतरफा हरे-भरे मखमली घास के लॉन बेहद अच्छे प्रतीत होते हैं।

   लोधी गार्डेन चौतरफा प्राचीन मुगल शासकों की कब्रा, स्मारक एवं संरचनाओं से आच्छादित है। इसे एक शानदार हेरिटेज वॉक प्वाइंट भी कह सकते हैं। 
   यहां का अद्भुत एवं सुरम्य दृश्य दिलों में उतर जाते हैं। बाग-बगीचों का आनन्द मन एवं तन को प्रफुल्लित कर देता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से देखें तो लोधी गार्डेन बेहद ऊर्जावान है। 

  चौतरफा आैषधीय वनस्पतियों का आच्छादन पर्यटकों को भरपूर आक्सीजन प्रदान करता है। यहां फेफडों को मानों पंख लग जाते हों।
  इसे ग्रीन हाउस भी कह सकते हैं। इस शानदार प्राचीन उद्यान में फव्वारे, तालाब, फुलवारी, जॉगिंग ट्रैक आदि बहुत कुछ है। 

   करीब 90 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस पार्क को अद्भुत कहा जा सकता है। पक्षियों का कलरव एवं कोलाहल भी पर्यटकों को बेहद कर्णप्रिय प्रतीत होता है। यहां पक्षियों की असंख्य प्रजातियां विचरण करती हैं। उद्यान को एक शानदार बोटैनिकल गार्डेन भी कह सकते हैं।
   लोधी गार्डेन की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट इन्दिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट नई दिल्ली है। निकटतम रेलवे स्टेशन नई दिल्ली जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी लोधी गार्डेन की यात्रा कर सकते हैं।
28.589970,77.217640

Monday, 11 March 2019

खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान: अद्भुत सुन्दरता

   खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक खूबसूरती का कोई जोड़ नहीं। जी हां, खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान का प्राकृतिक सौन्दर्य देश दुनिया में अपना एक खास मुकाम रखता है। 

   भारत के पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम का यह बेहद खूबसूरत उद्यान वन्य जीवन की अप्रतिम एवं अमूल्य धरोहर है। 
  खास यह कि विश्व की श्रेष्ठ 35 विरासतों में खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान को विशिष्ट स्थान हासिल है। सिक्किम के पूर्व-उत्तरी जिलों के हिमालय रेंज का हिस्सा यह शानदार उद्यान काफी कुछ विशिष्टतायें रखता है। 
   यूनेस्को ने इसे 2016 में विश्व विरासत घोषित किया था। करीब 1784 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला यह राष्ट्रीय उद्यान विशिष्टताओं से परिपूर्ण है। 
  समुद्र तल से करीब 1829 मीटर से लेकर 8500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान विलुप्त वन्य जीव प्रजातियों का आशियाना भी है।

  खास तौर से खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान में हिम तेंदुआ, हिमालयी काला भालू, तिब्बती एंटीलोप, जंगली गधा, काकड, कस्तूरी मृग, फ्लाइंग गिलहरी, लाल पांडा आदि इत्यादि असंख्य जीव-जन्तु का कोलाहल दर्शनीय हैं। खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में ही कंचनजंगा पर्वत चोटी है।

   कंचनजंगा विश्व की तीसरी सबसे ऊंची चोटी है। खास यह कि इस उद्यान में कई हिमनद हैं। हिमालय की जलवायु वनस्पतियों एवं वन्य जीवों के लिए बेहद अनुकूल है।
   लिहाजा खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान में आैषधीय वनस्पतियों का वैश्विक खजाना है। शासकीय स्तर पर यह उद्यान 26 अगस्त 1977 को स्थापित किया गया।

   खास यह कि इस राष्ट्रीय उद्यान में लेपचा जनजाति की कुछ बस्तियां हैं। लिहाजा पर्यटक खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान में जनजातीय संस्कृति से भी रूबरू हो सकते हैं।
  मैगनोलिया, बुरुंश एवं देवदार के सघन वन क्षेत्र खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक सुन्दरता में चार चांद लगाते हैं। 

  यह देश का चुनिंदा राष्ट्रीय उद्यान है। खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान की शानदार एवं सुन्दर घाटियां-वादियां पर्यटकों को लुभाती हैं।
   मखमली घास से आच्छादित पर्वतीय मैदान-ढ़लान यहां की सुन्दरता है। झीलों-झरनों एवं नदियों की जलक्रीड़ा बेहद दर्शनीय है। 

  जलधारा का खिलंदडपन मन को लुभाता है। बर्फ से ढ़की पर्वत चोटियों की इन्द्रधनुषी छटा मन में एक विशेष रोमांच पैदा करती हैं। 
  जेमु ग्लेशियर सहित कई झीलें एवं बंजर ऊंचाई वाले इलाके यहां विशेष हैं। खास यह कि खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान में 18 से अधिक ग्लेशियर हैं।

   ग्लेशियर अपने विशाल आकार-प्रकार के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। इतना ही नहीं खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान विदेशी वन्य जीवन के लिए भी जाना पहचाना जाता है। विदेशी वन्य जीवन की कई विलुप्त प्रजातियां यहां दिखती हैं। 

  मसलन लाल पांडा, तिब्बती भेड, भारल आदि इत्यादि हैं। इसके अलावा खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान में 19 अल्पाइन झीलों की श्रंखला भी रखता है। 

   खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान से हिमालयी रेंज की 19 पर्वत चोटियां भी दर्शनीय हैं। इनमें माउण्ट खंगचेंदजोंगा बेहद लोकप्रिय है। खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान के बफर क्षेत्र में थोलुंग मठ एक अति पवित्र मंदिर है। 

   पर्यटक यहां ट्रैकिंग का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। यहां के ट्रैकिंग प्वाइंट में खास तौर से लाचेन एवं ग्रीन लेक ट्रैक प्रसिद्ध हैं।
   खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा का बेहतरीन समय अप्रैल से मई है। पर्यटक अक्टूबर से नवम्बर की अवधि में भी यात्रा कर सकते हैं। पर्यटक यहां भरपूर अाक्सीजन का एहसास करते हैं।


    खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बागडोगरा एयरपोर्ट है। 
  बागडोगरा एयरपोर्ट से खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान की दूरी करीब 222 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन जलपाईगुडी जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी यात्रा कर सकते हैं।
27.285959,88.403954

शांति निकेतन: सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर    शांति निकेतन को आध्यात्मिक धरोहर कहा जाना चाहिए। जी हां, शांति निकेतन संस्कृति, परम्परा...