Sunday, 17 March 2019

नालागढ़ किला: अद्भुत सौन्दर्य

  नालागढ़ किला की सुन्दरता एवं वास्तुशास्त्र का कोई जोड़ नहीं। इस अभेद दुर्ग का कहीं कोई सानी नहीं। शिवालिक की पहाडि़यों का यह शानदार किला अद्भुत एवं शानदार है।

  खास यह कि नालागढ़ किला देश की एक शानदार राष्ट्रीय धरोहर है। भारत के हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला का नालागढ़ किला अपने खास वास्तुशिल्प एवं सौन्दर्य शास्त्र के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
  शहरी कोलाहल से दूर नालागढ़ किला शांति, शीतलता एवं प्रचुर हरियाली के लिए खास तौर से प्रसिद्ध है।

   सिरसा नदी के किनारे शिवालिक की पहाड़ियों पर स्थित नालागढ़ किला वैश्विक पर्यटकों की खास पसंद है।
  खास तौर से जो पर्यटक प्रकृति की गोद में शांति का एहसास चाहते हैं। हालांकि नालागढ़ किला ने अब हेरिटेज रिसोर्ट का स्वरूप अख्तियार कर लिया है। 

  इस भव्य-दिव्य किला को 1421 में शानदार तौर तरीके से गढ़ा गया। राजा विक्रम चन्द्र ने इस शानदार किला का निर्माण कराया था।
  शिवालिक पहाड़ियों के मध्य बना नालागढ़ किला करीब 10 एकड़ में फैला है। खास तौर से पर्यटक यहां से शिवालिक की पहाड़ियों का शानदार दृश्यावलोकन कर सकते हैं। 

   किला का वास्तुशिल्प मुगल शैली पर आधारित है। शांति एवं शीतलता प्रदान करने वाला यह इलाका प्राकृतिक सौन्दर्य का खास खजाना है।
  अद्भुत प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों को मुग्ध कर लेते हैं। चौतरफा मखमली घास के मैदान एवं ढ़लान एक ह्मदय स्पर्शी एहसास कराते हैं।

  पर्यटक नालागढ़ किला एवं उसके आसपास प्रकृति की गोद में होने का एहसास करते हैं। शांत एवं शीतलता के मध्य बादलों की हलचल पर्यटकों को बेहद रोमांचित करती है।
  खास यह कि पर्यटक कभी खुद को बादलों की गोद में होने का एहसास करते हैं तो कभी बादल पर्यटकों की गोद में होतेे हैं।

  बादलों का यह खिलंदड़पन बेहद रोमांचक होता है। मध्ययुगीन काल की यह राजपूत रियासत अभी भी एक शानदार शौर्यगाथा दिग्दर्शित करती है। चण्डीगढ़ से करीब 65 किलोमीटर दूर स्थित नालागढ़ किला एक शानदार हिल स्टेशन भी है।
   कारण एक अंतहीन प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को बरबस अपनी ओर खींचता है। सोलन जिला का यह खूबसूरत पहाड़ी स्टेशन विलक्षण एवं अद्भुत है।

  खास यह कि नालागढ़ किला एवं उसके आसपास सुन्दर एवं आकर्षक स्थानों की एक लम्बी श्रंखला है। यादवेन्द्र गार्डेन नालागढ़ किला इलाके की शान माना जाता है। यादवेन्द्र गार्डेन नालागढ़ किला से करीब 36 किलोमीटर दूर स्थित है। 

   इसे पिंजौर एवं मुगल गार्डेन के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। यादवेन्द्र गार्डेन शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी पर स्थित एक शानदार सुन्दर आदर्श स्थान है। यह एक प्राचीन उद्यान है।
   इसका निर्माण 17 वीं शताब्दी में नवाब फदाई खान ने किया था। मुगल शैली में बने इस शानदार गार्डेन में कई विशेष आकर्षण दर्शनीय हैं। खास यह कि इस शानदार उद्यान में तीन महल हैं। 

   इन महलों को जल महल, शीश महल एवं रंग महल के नाम से जाना पहचाना जाता है। फव्वारों की श्रंखला यहां की शोभा एवं शान है।
  इसके अलावा नालागढ़ किला से करीब 71 किलोमीटर दूर गोविन्द सागर झील भी एक खास आकर्षण है। भाखडा़ बांध की यह शानदार झील सिखों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह के नाम पर है।

   पर्यटक गोविन्द सागर झील पर प्राकृतिक सौन्दर्य का भरपूर आनन्द उठा सकते हैं। खास यह कि इस झील में मछलियों की पचास से अधिक प्रजातियां पायी जाती हैं। मजाथल वन्य जीव अभयारण्य भी नालागढ़ किला के सौन्दर्य का एक शानदार नगीना है।

   पर्यटक मजाथल वन्य जीव अभयारण्य में रोमांचक सैर सपाटा का एहसास करते हैं। हिमाचल प्रदेश का यह शानदार अभयारण्य समृद्ध जैव विविधिता के लिए जाना जाता है। 
 आैषधीय वनस्पतियों के साथ ही वन्य जीवन की प्रचुरता अभयारण्य को काफी कुछ खास बना देती है। 

   समुद्र तल से करीब 1996 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह अभयारण्य करीब 36.4 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। बाघ, तेंदुआ, भालूू, जंगली बिल्ली, जंगली सुअर, हिरण आदि जीव इस अभयारण्य की शान एवं शोभा हैं।
   नालागढ़ किला की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट चण्ड़ीगढ़ एयरपोर्ट है। चण्डीगढ़ एयरपोर्ट से नालागढ़ किला की दूरी करीब 65 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन घनौली जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी नालागढ़ किला की यात्रा कर सकते हैं।
31.042100,76.717600

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