पन्ना राष्ट्रीय उद्यान: जलीय जीवों का रोमांच
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान को जलीय एवं समुद्री जीवों का शानदार घर कहा जाना चाहिए। जी हां, इस विलक्षण उद्यान में पर्यटकों को समुद्री जीव भी रोमांचित करते हैं।
भारत के मध्य प्रदेश के जिला छतरपुर एवं पन्ना का पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में झीलों एवं झरनों की प्रचुरता है। केन नदी इस राष्ट्रीय उद्यान का मुख्य आकर्षण है।
खास तौर से उद्यान में यूरासियन ईगल, उल्लू, ब्लैक इबिस, मगरमच्छ एवं घड़ियाल आदि खास तौर से पर्यटकों को रोमांचित करते है। करीब 543 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला पन्ना राष्ट्रीय उद्यान वस्तुत: एक रेप्टाइल पार्क है।
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 1981 में की गयी थी। हालांकि इसे वर्ष 1994-1995 में बाघ संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया। खजुराहो से करीब 57 किलोमीटर दूर स्थित पन्ना राष्ट्रीय उद्यान प्रकृति का एक शानदार उपहार है। बेहतरीन स्थलाकृति वाला यह राष्ट्रीय उद्यान काफी कुछ विशेषताएं रखता है।
विंध्य पर्वत श्रंृखला का हिस्सा पन्ना राष्ट्रीय उद्यान मेंं वन्य जीवों की दर्शनीयता खास है। हाथियों के अलावा बाघ, चीता, भेड़िया, लकड़बग्घा, कस्तूरी हिरण, काला हिरण, जंगली बिल्ली, चील, गिद्ध, बाज, चिंकारा आदि इत्यादि संरक्षित हैं। विशेषज्ञों की मानें तो पन्ना राष्ट्रीय उद्यान भारत के सबसे व्यवस्थित राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है।
व्यवस्था की दृष्टि से इसे वर्ष 2007 में उत्कृष्टता पुरस्कार भी हासिल हो चुका है। राजसी शासनकाल में पन्ना रियासत का यह इलाका राजसी शिकारगाह था। मान्यता है कि पाण्डव बंधुओं ने अज्ञातवास का अधिकांश समय पन्ना में ही व्यतीत किया था। इसका जिक्र महाभारत में भी मिलता है।
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा का सबसे बेहतरीन समय अक्टूबर से मई की अवधि खास है। पन्ना राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा का भरपूर आनन्द लेना हो तो पर्यटकों को सर्दियों में प्लान बनाना चाहिए।
कारण वन्य जीव खास तौर से सर्दियों में धूप का आनन्द लेने के लिए अक्सर अपनी मांद से बाहर निकलते हैं। लिहाजा दर्शनीयता की दृष्टि से सर्दियों का समय सबसे अच्छा माना जाता है।
खास यह कि गर्मियों में भी यहां का मौसम सुहावना रहता है। यूं कहें कि गर्मी के तल्ख तेवर का पन्ना राष्ट्रीय उद्यान पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है।
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान का मुख्य आकर्षण बाघ वंश है। अक्सर बाघिन शावकों संग विचरण करते दिख जायेगी। यह पल बेहद रोमांचक होते हैं। बाघ शावक अति सुन्दर प्रतीत हैं।
खास यह कि किंग कोबरा, खतरनाक एवं जहरीले सांप भी इस उद्यान में पलते हैं। वस्तुत: देखें तो पन्ना नायाब हीरों एवं बाघ वंश के लिए जाना पहचाना जाता है। जंगलों के सैर सपाटा के लिए शौकीन पर्यटकों के लिए पन्ना राष्ट्रीय उद्यान बेहतरीन है।
खास यह कि वन्य जीव जन्तुओं की विलुप्त प्रजातियां भी पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में संरक्षित हैं। बाघ वंश की विलुप्त प्रजाति भी पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में शान से चहलकदमी करते दिखेंगे। विशेषज्ञों की मानें तो आजादी के बाद इसे वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था।
खास यह कि पन्ना राष्ट्रीय उद्यान में कई शानदार एवं सुन्दर रिसोर्ट भी हैं। लिहाजा पर्यटक पन्ना राष्ट्रीय उद्यान के आंतरिक क्षेत्र में रात्रि प्रवास कर पर्यटन का भरपूर का आनन्द ले सकते हैं। रात्रि प्रवास पर्यटकों को कुछ खास रोमांचक एहसास कराता है। पर्यटकों का यह अनुभव यादगार होता है।
पन्ना राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट खजुराहो एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट से पन्ना राष्ट्रीय उद्यान की दूरी करीब 57 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन सतना जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी पन्ना राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा कर सकते हैं।
24.718031,80.181931
24.718031,80.181931












No comments:
Post a Comment