Tuesday, 18 September 2018

सांची का स्तूप: वास्तुशिल्प का सौन्दर्य

   सांची का स्तूप शायद दुनिया का विलक्षण सौन्दर्य शिल्प होगा। सांची का स्तूप बौद्ध धर्म का एक अति सुन्दर एवं प्राचीन स्मारक है। यह स्तूप मध्य प्रदेश के रायसेन जिला के सांची में स्थित है।

   इसे बौद्ध धर्म का तीर्थ भी कहा जा सकता है। बेतवा नदी के किनारे स्थित यह सुन्दर वास्तुशिल्प तीसरी शताब्दी एवं सातवीं शताब्दी के मध्यकाल का है। सांची रायसेन जिला की एक नगर पंचायत है लेकिन बौद्ध धर्म के इस स्मारक ने इसे अति महत्वपूर्ण बना दिया।

   विशेषज्ञों की मानें तो शंुग वंश ने इस स्तूप को दोगना विस्तार कराया था। इसमें पाषाण शिलाओं का उपयोग किया गया। इसके गुम्बद को चपटा कर तीन छतरियों का निर्माण किया गया। यह छतरियां वर्गाकार मुंडेर के भीतर बनी हैं। इसके शिखर पर बौद्ध धर्म का प्रतीक विधि का चक्र स्थापित है। उत्तरी तोरण के उपर नक्काशीदार सजावट है। 

   इनमें महात्मा गौतम बुद्ध के जीवन की घटनाएं, दैनिक जीवन शैली आदि इत्यादि बहुत कुछ रूपांकित किया गया है। यह रेखांकन महात्मा गौतम बुद्ध के जीवन को अति सरलता से रेखांकित करता है।

   रेखांकन से बुद्ध का जीवन एवं उनकी वाणी, उनका संदेश भंली-भांति समझा जा सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो सांची सहित आसपास के अन्य स्तूप को सजाने-संवारने के लिए स्थानीय बाशिंदों ने दान भी दिया था। जिससे आध्यात्म की प्राप्ति हो सके। सांची सहित अन्य स्तूप को कोई सीधा राजसी आश्रय हासिल नहीं था।

   दान की भी विलक्षण परम्परा एवं रीति-नीति रही। दानकर्ता महात्मा गौतम बुद्ध के जीवन का कोई प्रसंग चयनित कर लेता था। उस चयन का रूपांकन कराने के बाद उसमें अपना नाम अंकित करा देता था। 
   इन पाषाण नक्काशियों में महात्मा गौतम बुद्ध को मानव आकृति में नहीं दर्शाया गया। पिता के घर का त्याग से लेकर उपदेश तक बहुत कुछ रेखांकित किया गया है। कहीं बोधि वृक्ष के नीचे चबूतरा है तो कहीं बुद्धत्व की प्राप्ति के क्षण-पल दर्शाये गये हैं। 

   सांची की दीवारों के बार्डर पर बने चित्रों में यूनानी पहनावा भी दर्शनीय है। समुद्र तल से करीब 434 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह स्तूप देश दुनिया में शिखर की ख्याति रखता है। खास यह कि सांची के स्तूपों की कलात्मकता विश्व विख्यात है। 

  स्तूप की ऊंचाई करीब 42 फुट है। ब्रिाटिश अफसर जनरल टेलर ने सांची के स्तूप की खोज की थी। जनरल ने वर्ष 1818 में सांची के इस स्तूप का उल्लेख अभिलेखों में दर्ज किया था।

   विशेषज्ञों की मानें तो जॉन मार्शल की देख रेख में स्तूपों का सुधार एवं विस्तार किया गया था। मौजूदा समय में सांची का स्तूप स्थल पर पचास से अधिक छोटे-बड़े स्मारक हैं। इनमें तीन स्तूप एवं कई मंदिर खास तौर से भव्यता-दिव्यता रखते हैं। विशिष्टताओं के कारण सांची के इस स्मारक को यूनेस्को ने वर्ष 1989 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। 

  सांची का स्तूप एक भव्य-दिव्य स्मारक है। चारों ओर हरियाली स्मारक को आैर भी आकर्षक बना देती है। सांची का स्तूप अपनी विशिष्टताओं के कारण बेहद आकर्षक है। यहां एक वृहद बौद्ध संग्रहालय भी है। 
  सांची से करीब 5 मील दूर सोनारी में भी 8 स्तूप हैं। भोजपुर के पास 37 बौद्ध स्तूप हैं। विशेषज्ञों की मानें तो सांची से पहले बौद्ध विहार भी थे। यहां एक सुन्दर सरोवर भी है। इसकी सीढ़ियां महात्मा गौतम बुद्ध के काल की मानी जाती है।

 
   सांची का स्तूप की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट भोपाल है। भोपाल से सांची की दूरी करीब 52 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन सांची है। विदिशा रेलवे स्टेशन से भी पर्यटक सांची की यात्रा कर सकते हैं। पर्यटक सड़क मार्ग से भी सांची का स्तूप की यात्रा कर सकते हैं।
23.487700,77.736000

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