अगरतला : समृद्ध सांस्कृतिक शहर
अगरतला को पूर्वोत्तर भारत का एक खूबसूरत एवं सांस्कृतिक शहर कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, पूर्वोत्तर का अगरतला देश के त्रिपुरा की राजधानी है।
इसकी सांस्कृतिक समृद्धता बेमिशाल है। मनोरंजन एवं पर्यटन की दृष्टि से भी पूर्वोत्तर भारत के इस शहर का कोई जोड़ नहीं। हरोआ नदी के किनारे रचा-बसा त्रिपुरा का यह शहर पर्यटन की दृष्टि से भी खास है। एडवेंचर के असंख्य विकल्प अगरतला में मौजूद हैं। जीव-जंतु एवं वनस्पतियों की प्रचुरता अगरतला को कुछ खास बना देती हैं।
लिहाजा देश-दुनिया के पर्यटकों का अगरतला आना-जाना निरंतर जारी रहता है। भौगोलिक दृष्टि से देखें तो अगरतला देश की अन्य प्रांतीय राजधानियों से काफी कुछ अलग है। अगरतला बंगला देश तक फैले गंगा-ब्राह्मपुत्र के मैदानी इलाके के पश्चिम में है। लिहाजा अगरतला का एक बड़ा हिस्सा पर्यावरण से आच्छादित है। शांत एवं सुसंस्कृत शहर अगरतला पर्यटकों को आकर्षित करता है।
अगरतला संस्कृति एवं प्राकृतिक सुन्दरता के मध्य पर्यटकों को कुछ खास ऊर्जावान बना देता है। विशेषज्ञों की मानें तो अगरतला 19 वीं शताब्दी में अस्तित्व में आया। माणिक्य वंश ने अगरतला को विकसित कर अपनी राजधानी बनाया था।
उत्तरी त्रिपुरा के उदयपुर स्थित रंगमाटी से अगरतला को राजधानी बनाया गया था। दरअसल अगरतला की परिकल्पना महाराज वीर विक्रम किशोर माणिक्य बहादुर ने की थी। शायद इसी कारण अगरतला को वीर विक्रम सिंह माणिक्य बहादुर का शहर भी कहा जाता है।
शायद इसी लिए अगरतला शाही सम्पदाओं से अति समृद्ध है। इनमें खास तौर से देखें तो विलक्षण सम्पदाओं की एक लम्बी श्रंखला है। इनमें खास तौर से उज्जयंता महल, नीरमहल, महाराजा वीर विक्रम कालेज, लक्ष्मी नारायण मंदिर एवं रविन्द्र कनान आदि इत्यादि बहुत कुछ है। अगरतला के हस्तशिल्प का अपना यहां एक अलग अंदाज है।
उज्जयंता महल: उज्जयंता महल का निर्माण महाराजा राधा किशोर माणिक्य ने वर्ष 1901 में कराया था। फिलहाल इसका उपयोग राज्य विधानसभा के तौर पर किया जाता है। इसकी सुन्दरता एवं वास्तुशिल्प देखते ही बनता है। करीब 800 एकड़ में फैला यह परिसर शहर का मुख्य स्मारक भी है। इसमें बाग-बगीचे, मानव निर्मित झीलें भी हैं।
नीरमहल: नीरमहल शहर से करीब 53 किलोमीटर दूर स्थित है। इस खूबसूरत एवं विलक्षण महल का निर्माण महाराजा वीर विक्रम किशोर माणिक्य ने कराया था। रुद्रसागर झील के मध्य बने इस नीरमहल में महाराजा गर्मियों में ठहरते थे। नीरमहल में मुगल एवं हिन्दू वास्तुशिल्प का सम्मिश्रित स्वरूप दिखता है। नीरमहल की ख्याति देश-दुनिया के सुन्दर वास्तुशिल्प के तौर पर है।
जगन्नाथ मंदिर: जगन्नाथ मंदिर अगरतला के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। जगन्नाथ मंदिर अपनी अनूठी वास्तुशिल्प शैली के लिए ख्याति रखता है। मंदिर एक अष्टभुजीय संरचना है।
महाराजा वीर विक्रम कालेज: महाराजा वीर विक्रम कालेज का निर्माण 1947 में महाराजा वीर विक्रम सिंह ने कराया था। कालेज निर्माण के पीछे मंशा युवाओं को व्यावसायिक एवं गुणवत्तायुक्त शिक्षा का प्रबंध करना था।
महाराजा वीर विक्रम कालेज: महाराजा वीर विक्रम कालेज का निर्माण 1947 में महाराजा वीर विक्रम सिंह ने कराया था। कालेज निर्माण के पीछे मंशा युवाओं को व्यावसायिक एवं गुणवत्तायुक्त शिक्षा का प्रबंध करना था।
लक्ष्मी नारायण मंदिर: लक्ष्मी नारायण मंदिर हिन्दुओं के एक तीर्थ की भांति है। इसका निर्माण कृष्णानन्द सेवायत ने कराया था। इसे अगरतला के लोकप्रिय पर्यटन स्थल के तौर पर भी जाना जाता है। इसे लक्ष्मी नारायण बाड़ी भी कहा जाता है।
रविन्द्र कनान: रविन्द्र कनान राजभवन के निकट एक अति समृद्धशाली उद्यान है। इसका उपयोग खेल मैदान के तौर पर भी होता है। शहर का यह एक आदर्श पिकनिक स्पॉट भी है।
रविन्द्र कनान: रविन्द्र कनान राजभवन के निकट एक अति समृद्धशाली उद्यान है। इसका उपयोग खेल मैदान के तौर पर भी होता है। शहर का यह एक आदर्श पिकनिक स्पॉट भी है।
वेणुबन विहार : बेणुबन विहार एक दर्शनीय स्थल है। वस्तुत: यह एक बौद्ध मंदिर है। इसकी दर्शनीयता बेहद आकर्षक है।
अगरतला की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट अगरतला है। निकटतम रेलवे स्टेशन अगरतला जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी अगरतला की यात्रा कर सकते हैं।
23.833820,91.282420
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