जटायु नेशनल पार्क : चुम्बकीय सौन्दर्य
जटायु नेशनल पार्क के प्राकृतिक सौन्दर्य को अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए। जी हां, इस नेशनल पार्क की सुन्दरता का कोई जोड़ नहीं।
महाकाव्य रामायण के वीर योद्धा जटायु को समर्पित इस राष्ट्रीय उद्यान का सौन्दर्य पर्यटकों को मुग्ध कर लेता है। इसे जटायु नेचर पार्क के नाम से भी जाना पहचाना जाता है।
महाकाव्य रामायण के वीर योद्धा जटायु को समर्पित इस राष्ट्रीय उद्यान का सौन्दर्य पर्यटकों को मुग्ध कर लेता है। इसे जटायु नेचर पार्क के नाम से भी जाना पहचाना जाता है।
भारत के दक्षिणी राज्य केरल का यह शानदार पर्यटन स्थल पर अत्याधुनिक तौर तरीके भी हैं। जिससे पर्यटक प्राचीनकाल की यश गाथा को बेहद सलीके से जान-समझ सकते हैं। डिजिटल म्युजियम एवं 6डी थियेटर जटायु का सम्पूर्ण प्रसंग पर्यटकोें के समक्ष प्रस्तुत करता है।
केरल के जिला कोल्लम के चदयामंगलम गांव स्थित यह जटायु नेशनल पार्क पर्यटकों को खास तौर से आकर्षित करता है। किवदंती है कि रामायण का यह पात्र जटायु रावण से युद्ध में घायल हो गया आैर अंतिम सांसे ले रहा था तो किसी ने पूछा कि रावण अति बलशाली था।
यह जानते हुए भी कि रावण सेे कतई जीत नहीं सकते फिर भी रावण को ललकारा। आखिर क्यों... ? जटायुु ने अति सुन्दर जवाब दिया था। जटायु ने कहा था कि रावण से जीत नहीं सकता था। युद्ध नहीं करता तो भारत की असंख्य पीढ़ियां जटायु को कायर कहतीं।
एक भारतीय आर्य नारी का अपहरण हो रहा था आैर जटायु कायरों की भांति बिल में पड़ा रहता। यह जटायु को मंजूर नहीं था। कायरता का कलंक लेकर जीने से बेहतर रावण से युद्ध कर मरना बेहतर था। लिहाजा जटायु ने रावण को ललकारा आैर युद्ध किया।
इस वीर योद्धा की पवित्र पावन स्मृति में जटायु नेशनल पार्क का निर्माण किया गया। मान्यता है कि रावण से युद्ध में घायल होने के उपरांत जटायु यहीं गिरे थे। लिहाजा यह स्थान जटायु की स्मृति का समर्पित है।
प्राकृतिक सौन्दर्य से आच्छादित जटायु नेशनल पार्क वस्तुत: केरल के पर्यटन में एक नया अध्याय जुड़ गया। एक नया डेस्टिनेशन जुड़ गया। जटायु नेशनल पार्क को जटायु नेचर पार्क के नाम से ख्याति हासिल है। कारण यह पार्क प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूरित है। चौतरफा प्रकृति का शानदार नजारा दिखता है।
खास यह कि इस पार्क में जटायु का दुनिया का सबसे बड़ा एवं खूूबसूरत स्कल्पचर है। करीब 65 एकड़ में फैले इस शानदार पार्क में एक जीवंतता का एहसास होता है। इस पार्क में रोमांच, मनोरंजकता एवं कलात्मकता को अत्यंत खूबसूरती के साथ समायोजित किया गया है।
वस्तुत: देखें तो जटायु नेशनल पार्क केरल के पर्यटन में एक नया मील का पत्थर है। इस पार्क का मुख्य आकर्षण जटायु का स्कल्पचर है। इस मूर्ति शिल्प की दर्शनीयता ही मुख्य है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा मूर्ति शिल्प माना जाता है।
इसका निर्माण एक विशाल पर्वत को काट कर किया गया है। जटायु की यह प्रतिमा करीब 200 फुट लम्बी, करीब 150 फुट चौड़ी एवं 70 फुट ऊंची है। इसका निर्माण करने में सात वर्ष से भी अधिक समय लगा था। इसका प्लेटफार्म करीब 15000 वर्ग फुट का है। जटायु नेशनल पार्क में 6डी थियेटर भी है। जिसमें जटायु एवं रावण युद्ध प्रसंग सहित काफी कुछ प्रदर्शित किया जाता है।
पार्क में एक शानदार एवं अत्याधुनिक तकनीकि पर आधारित डिजिटल म्युजियम भी है। आर्चरी, आयुर्वेद रिजार्ट, रोमांचक खेल, राइफल शूटिंग रेंज, रॉक क्लाइम्बिंग आदि इत्यादि बहुत कुछ है। जटायु नेशनल पार्क में पर्यटक केबिल कार का भी आनन्द ले सकते हैं।
आयुर्वेद रिजार्ट में आयुर्वेद एवं सिद्धा पद्धति से उपचार भी किया जाता है। इस शानदार रिजार्ट में कई आलीशान क्लब भी हैं। कोल्लम से करीब 28 किलोमीटर दूर स्थित जटायु नेशनल पार्क पर्यटकों को कला, संस्कृति, इतिहास, तकनीकि, प्राकृतिक सौन्दर्य एवं सम्पन्नता एवं रोमांच प्रदान करता है। जटायु नेशनल पार्क एक खास आकर्षण रेन वॉटर हार्वेस्टिंग भी है।
जटायु नेशनल पार्क की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट तिरूवनंतपुरम एयरपोर्ट है। तिरूवनंतपुरम एयरपोर्ट से जटायु नेशनल पार्क की दूरी करीब 80 किलोमीटर है। पर्यटक कोच्चि एयरपोर्ट से भी जटायु नेशनल पार्क की यात्रा कर सकते हैं। कोच्चि एयरपोर्ट से जटायु नेशनल पार्क की दूरी करीब 150 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन कोल्लम जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी जटायु नेशनल पार्क की यात्रा कर सकते हैं।
8.886910,76.590469
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