खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान: अद्भुत सुन्दरता
खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक खूबसूरती का कोई जोड़ नहीं। जी हां, खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान का प्राकृतिक सौन्दर्य देश दुनिया में अपना एक खास मुकाम रखता है।
भारत के पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम का यह बेहद खूबसूरत उद्यान वन्य जीवन की अप्रतिम एवं अमूल्य धरोहर है।
खास यह कि विश्व की श्रेष्ठ 35 विरासतों में खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान को विशिष्ट स्थान हासिल है। सिक्किम के पूर्व-उत्तरी जिलों के हिमालय रेंज का हिस्सा यह शानदार उद्यान काफी कुछ विशिष्टतायें रखता है।
यूनेस्को ने इसे 2016 में विश्व विरासत घोषित किया था। करीब 1784 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला यह राष्ट्रीय उद्यान विशिष्टताओं से परिपूर्ण है।
समुद्र तल से करीब 1829 मीटर से लेकर 8500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान विलुप्त वन्य जीव प्रजातियों का आशियाना भी है।
खास तौर से खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान में हिम तेंदुआ, हिमालयी काला भालू, तिब्बती एंटीलोप, जंगली गधा, काकड, कस्तूरी मृग, फ्लाइंग गिलहरी, लाल पांडा आदि इत्यादि असंख्य जीव-जन्तु का कोलाहल दर्शनीय हैं। खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में ही कंचनजंगा पर्वत चोटी है।
कंचनजंगा विश्व की तीसरी सबसे ऊंची चोटी है। खास यह कि इस उद्यान में कई हिमनद हैं। हिमालय की जलवायु वनस्पतियों एवं वन्य जीवों के लिए बेहद अनुकूल है।
लिहाजा खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान में आैषधीय वनस्पतियों का वैश्विक खजाना है। शासकीय स्तर पर यह उद्यान 26 अगस्त 1977 को स्थापित किया गया।
खास यह कि इस राष्ट्रीय उद्यान में लेपचा जनजाति की कुछ बस्तियां हैं। लिहाजा पर्यटक खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान में जनजातीय संस्कृति से भी रूबरू हो सकते हैं।
मैगनोलिया, बुरुंश एवं देवदार के सघन वन क्षेत्र खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक सुन्दरता में चार चांद लगाते हैं।
यह देश का चुनिंदा राष्ट्रीय उद्यान है। खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान की शानदार एवं सुन्दर घाटियां-वादियां पर्यटकों को लुभाती हैं।
मखमली घास से आच्छादित पर्वतीय मैदान-ढ़लान यहां की सुन्दरता है। झीलों-झरनों एवं नदियों की जलक्रीड़ा बेहद दर्शनीय है।
जलधारा का खिलंदडपन मन को लुभाता है। बर्फ से ढ़की पर्वत चोटियों की इन्द्रधनुषी छटा मन में एक विशेष रोमांच पैदा करती हैं।
जेमु ग्लेशियर सहित कई झीलें एवं बंजर ऊंचाई वाले इलाके यहां विशेष हैं। खास यह कि खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान में 18 से अधिक ग्लेशियर हैं।
ग्लेशियर अपने विशाल आकार-प्रकार के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। इतना ही नहीं खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान विदेशी वन्य जीवन के लिए भी जाना पहचाना जाता है। विदेशी वन्य जीवन की कई विलुप्त प्रजातियां यहां दिखती हैं।
मसलन लाल पांडा, तिब्बती भेड, भारल आदि इत्यादि हैं। इसके अलावा खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान में 19 अल्पाइन झीलों की श्रंखला भी रखता है।
खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान से हिमालयी रेंज की 19 पर्वत चोटियां भी दर्शनीय हैं। इनमें माउण्ट खंगचेंदजोंगा बेहद लोकप्रिय है। खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान के बफर क्षेत्र में थोलुंग मठ एक अति पवित्र मंदिर है।
पर्यटक यहां ट्रैकिंग का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। यहां के ट्रैकिंग प्वाइंट में खास तौर से लाचेन एवं ग्रीन लेक ट्रैक प्रसिद्ध हैं।
खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा का बेहतरीन समय अप्रैल से मई है। पर्यटक अक्टूबर से नवम्बर की अवधि में भी यात्रा कर सकते हैं। पर्यटक यहां भरपूर अाक्सीजन का एहसास करते हैं।
खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बागडोगरा एयरपोर्ट है।
बागडोगरा एयरपोर्ट से खंगचेंदजोंगा राष्ट्रीय उद्यान की दूरी करीब 222 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन जलपाईगुडी जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी यात्रा कर सकते हैं।
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