Monday, 25 February 2019

सहयाद्री पर्वत: रोमांचक अनुभूूति

   सहयाद्री पर्वत का विशालता को अद्भुत कहा जाना चाहिए। इस विशालतम पर्वत श्रंखला का सौन्दर्य शास्त्र प्रकृति का इन्द्रधनुषी आयाम पेश करता है। 

   सहयाद्री पर्वत के शिखर पर्यटकों को आकर्षित करते हैं तो झीलों-झरनों एवं नदियों की सुन्दरता प्राकृतिक सौन्दर्य की एक नई इबारत गढ़ते हैं। 
  महाराष्ट्र से लेकर गोवा, केरल, कर्नाटक एवं तमिलनाडु तक फैले विशाल क्षेत्र में राष्ट्रीय उद्यानों, आरक्षित वन, वन्य जीव अभयारण्यों की एक शानदार श्रंखला विद्यमान है।

  सहयाद्री पर्वत को पश्चिमी घाट के तौर से विशेष ख्याति हासिल है। विशेषज्ञों की मानें तो सहयाद्री पर्वत की लम्बाई करीब 160000 वर्ग किलोमीटर है। चौड़ाई भी करीब 100 किलोमीटर के आसपास है। समुद्र तल से आैसत ऊंचाई करीब 1200 मीटर है। 

  विशेषज्ञों की मानें तो सहयाद्री पर्वत उच्च जैव विविधिता वाला क्षेत्र है। यूनेस्को ने सहयाद्री पर्वत को विश्व धरोहर का दर्जा दिया है। 
  सहयाद्री पर्वत वैश्विक पर्यटकों का विशेष पसंदीदा क्षेत्र है। महाराष्ट्र से लेकर केरल, कर्नाटक एवं तमिलनाडु तक फैलेे इस प्राकृतिक सौन्दर्य से वैश्विक पर्यटक अभिभूत होते हैं। 

  खास यह कि सहयाद्री पर्वत का सौन्दर्य शास्त्र महाराष्ट्र से प्रारम्भ होता है। गोवा, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु से होते हुए कन्याकुमारी में समाप्त होती है।
   विशेषज्ञों की मानें तो सहयाद्री पर्वत के जैव विविधिता आठ स्थान विश्व में शीर्षस्थ हैं। आैषधीय वनस्पतियों की प्रचुरता एवं विविधिता इस सम्पूर्ण क्षेत्र को विश्व में श्रेष्ठ बनाती है। 

   जीवों की करीब 325 विलुप्त प्रजातियां खास तौर से यहां संरक्षित दिखती हैं। सहयाद्री पर्वत को विलुप्त वन्य जीवन एवं विलुप्त आैषधीय वनस्पतियों का भण्डारण क्षेत्र कहा जा सकता है। दुलर्भता यहां की खासियत है। 

   वर्ष 2012 में यूनेस्को ने सहयाद्री पर्वत अर्थात पश्चिमी घाट के 39 मुख्य स्थानों को वैश्विक धरोहर का दर्जा दिया है।
  सहयाद्री पर्वत की प्राकृतिक सुन्दरता वैश्विक पर्यटकों को आकर्षित करती है। पर्यटक यहां खुद को एक अलग दुनिया में महसूस करते हैं। 

  खास यह कि सहयाद्री पर्वत कई स्थानों पर सागर के साथ भी संगमित होता है। सहयाद्री पर्वत वस्तुत: संस्कृत नाम है।
   सहयाद्री पर्वत क्षेत्र में कई शानदार एवं भव्य किले शोभायमान हैं। यह किले ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध हैं। सहयाद्री पर्वत के थाल घाट, भोर घाट, पाल घाट आदि भव्य-दिव्य दर्रे हैं। 

  थाल घाट मुम्बई-आगरा मार्ग पर स्थित है। इसी तरह भोर घाट मुम्बई-पूना मार्ग पर है। पाल घाट दर्रा नीलगिरी पठार का क्षेत्र है। 
  दक्षिण भारत में यही सहयाद्री पर्वत ऊंचा होकर अन्नामलाई पर्वत के तौर पर दिखता है। खास यह कि सहयाद्री पर्वत श्रंखला में प्राकृतिक सौन्दर्य का कोई भी आयाम अछूता नहीं रहता है। 

   चाय एवं काफी की भीनी-भीनी खूशबूू हो या वनस्पतियों की सुगंध हो। परिवेश दिल दिमाग को एक विशेष ताजगी प्रदान करते हैं। फूलों की घाटियां तो दिलों में उतर जाती हैं।

  विशेषज्ञों की मानें तो फूलों की 1600 से अधिक प्रजातियां यहां पुष्पित एवं पल्लवित हैं। इस प्रकार यह विश्व का अनूूठा क्षेत्र है।
   सहयाद्री पर्वत क्षेत्र में दो जैव संरक्षित क्षेत्र हैं। इतना ही नहीं 13 राष्ट्रीय उद्यान हैं। केरल का साइलेंट वैली इसी सहयाद्री पर्वत श्रंखला का हिस्सा है। 

  नीलगिरी बायोस्फियर रिजर्व सहयाद्री पर्वत का हिस्सा है। यह विश्व का विलक्षण एवं अनूठा क्षेत्र है। यह करीब 5500 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। 
  पर्यावरण प्रेमियों के लिए सहयाद्री पर्वत श्रंखला किसी स्वर्ग की भांति है। पर्यटकों को यहां प्रकृति की गोद का एहसास होता है।
   मखमली घास के मैदान ह्मदयस्पर्शी एहसास कराते हैं। शांति, सुकून के साथ ही रोेमांच की अनुभूति भी पर्यटक यहां करते हैं।
   सहयाद्री पर्वत की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। चूंकि महाराष्ट्र की राजधानी मुम्बई से हवाई यात्रा के जरिये कहीं भी आसानी से पहंुचा जा सकता है। 
  गोवा, केरल, कर्नाटक एवं तमिलनाडु के एयरपोर्ट के जरिये हवाई यात्रा की जा सकती है। छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मुम्बई से यात्रा कर पर्यटक महाराष्ट्र में सहयाद्री पर्वत का भरपूर आनन्द ले सकते हैं।
   यहां छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुम्बई रेल यात्रा कर पहंुच सकते हैं। पर्यटक सड़क मार्ग से भी सहयाद्री पर्वत की यात्रा कर सकते हैं।
19.075983,72.877655

Friday, 15 February 2019

ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क: अद्भुत सौन्दर्य

   ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के प्राकृतिक सौन्दर्य का कोई जोड़ नहीं। जी हां, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की निराली इन्द्रधनुषी छटा दिखती है।

   भारत के हिमाचल प्रदेश के कुल्लू का यह सुन्दर राष्ट्रीय उद्यान वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा एरिया है।
  ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क समुद्र तल से करीब 1500 मीटर ऊंचाई से लेकर 6000 मीटर की ऊंचाई तक स्थित है। 

   इसे खास तौर से आैषधीय वनस्पतियों खजाना कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। कुल्लू जिला का यह सुन्दर राष्ट्रीय उद्यान करीब 1171 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। वर्ष 1984 में इसे विधिवत राष्ट्रीय उद्यान के रूप में स्थापित किया गया। 

  ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ साथ प्रचुर आैषधीय वनस्पतियों एवं वन्य जीवन के लिए खास तौर से प्रसिद्ध है।
  विशेषज्ञों की मानें तो ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में 375 से अधिक प्रजातियों के वन्य जीव संरक्षित हैं। 

  इनमें खास तौर से 31 स्तनधारी, पक्षियों की 181 प्रजातियां, 3 सरीसृप, 9 उभयचर, 11 कुण्डलाकार, 17 मोलस्क एवं कीड़ों की 17 प्रजातियों सहित बहुत कुछ है।

  विशिष्टताओं को ध्यान में रखते हुए ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को वर्ष 2014 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया था। इस विश्व विरासत की विहंगमता अति दर्शनीय है।
  खास यह कि ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को जैव विविधिता संरक्षण के लिए उत्कृष्ट महत्व के तहत विशिष्ट दर्जा दिया गया है।

  विशेषज्ञों की मानें तो यह दुनिया के दो प्रमुख बाहुल्य क्षेत्रों का जंक्शन है। दक्षिण का प्राच्य एवं उत्तर में पुरापाषाण है। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की वन वनस्पतियां एवं वन अत्यधिक विस्तारित हैं।
  उत्तरी पश्चिमी हिमालय के उच्च ऊंचाई वाले पारिस्थितिकी तंत्र में एशियाई पौधे काफी कुछ खास एवं विशिष्ट हैं।

  खास तौर से ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के 4100 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्र में वनस्पतियों की विशिष्टता दर्शनीय है। वनस्पतियों एवं वन्य जीव श्रंखला का अद्भुत संगमन यहां दर्शनीय होता है।

  घाटियों-वादियों से आच्छादित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में नीली भेड़, हिम तेंदुआ, हिमालयी भूरा भालू, हिमालयी तहर, कस्तूरी मृग आदि इत्यादि प्रवास करते हैं।
  खास यह कि समुद्र तल से करीब 3500 मीटर या इससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कुछ खास वन्य जीव अनुकूल परिवेश पाते हैं।

  शरद ऋतु में इन हिमालयी जीव जन्तुओं के दर्शन किये जा सकते हैं। बुलंद पाइंसलैण्ड ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की खूबसूरती का एक आयाम है।
  वन आच्छादित पर्वत श्रंखला एक रोमांचक अनुभूति कराते हैं। अल्पाइन एवं अन्य वनस्पतियों की सुगंध पर्यटकों को कुछ खास ताजगी प्रदान करते हैं।

  खास यह कि ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में वनस्पतियों की एक अन्तहीन विविधिता दिखती है। मखमली घास के स्पर्श पर्यटकों को एक सुखद एहसास कराता है। विशेषज्ञों की मानें तो सबलपाइन जोन वनस्पतियों का अति समृद्ध इलाका है।

  विविधिता एवं दुर्लभ वनस्पतियों की उपलब्धता को देखते हुए इसे वर्ष 1999 में राष्ट्रीय उद्यान से अलंकृत किया गया है। वन्य जीवन की समृद्धता भी यहां देखते ही बनती है।
  हिमालयन भूरा भालू, मस्क डीयर, ब्रााउन बीयर, गोराल, थार, चीता, बरफानी चीता, बरफानी कौआ आदि इत्यादि यहां की विशिष्टता हैं। खास यह कि ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क क्षेत्र पार्वती नदी का उद्गम स्थल भी है।

  ग्लैशियर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की शान एवं शोभा हैं। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की यात्रा का सबसे बेहतरीन समय शरद ऋतु है। खास यह कि बर्फबारी का आनन्द लेना हो तो शरद ऋतु में यहां प्रवास करना चाहिए।
  चौतरफा बर्फ से आच्छादित पर्वत श्रंखलायें पर्यटकों को मुग्ध कर लेती हैं। झीलों-झरनों, नदियों का यहां तीर्थ जैसा परिवेश देखने को मिलता है।
   ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट कुल्लू-मनाली एयरपोर्ट भुन्तर है। चण्डीगढ़ एयरपोर्ट से भी ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की यात्रा की जा सकती है।
   निकटतम रेलवे स्टेशन जोगिन्दर नगर जंक्शन है। जोगिन्दर नगर रेलवे स्टेशन से ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की दूरी करीब 125 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की यात्रा कर सकते हैं।
31.912800,77.174300

Tuesday, 12 February 2019

सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान: प्रकृति का उपहार

   सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान के प्राकृतिक सौन्दर्य एवं प्राकृतिक सम्पदा का कोई जोड़ नहीं। जी हां, भारत के प्रांत पश्चिम बंगाल के इस सुन्दर एवं अद्भुत सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान को प्राकृतिक सम्पदाओं का प्रचुर भण्डारण क्षेत्र कहा जाना चाहिए। 

   पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिला के तहत आने वाला यह सुन्दर अभयारण्य अति दर्शनीय है। शायद इसी लिए सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान वैश्विक पर्यटकों की बेहतर पसंद में शीर्ष पर रहता है। 
  खास तौर से सुन्दरबन रॉयल बंगाल टाइगर के लिए दुनिया भर में जाना पहचाना जाता है।

  सुन्दरबन वस्तुत: एक शानदार वन्य जीव अभयारण्य है। विशेषज्ञों की मानें तो सुन्दरबन रॉयल बंगाल टाइगर का सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र है। चूंकि सुन्दरबन का अधिसंख्य क्षेत्र जल आधारित है। 
  लिहाजा मगरमच्छ की दर्जनों प्रजातियां यहां पायी जाती हैं। वन्य जीव की विभिन्न प्रजातियां होने के कारण इसे वर्ष 1977 में वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया था। 

  इसे बायोस्फीयर रिजर्व का दर्जा भी हासिल है। खास यह कि देश दुनिया के पर्यटक रॉयल बंगाल टाइगर की गर्जना सुनने के लिए वन क्षेत्र में रात्रि विश्राम भी करते हैं। 
  विशेषज्ञों की मानें तो सुन्दरबन में चार सौ से अधिक रॉयल बंगाल टाइगर हैं। 

  यह एक घोषित टाइगर रिजर्व है। सुन्दरबन गंगा नदी का डेल्टा क्षेत्र है। विशिष्टताओं को देखते हुए यूनेस्को ने सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है।
  भारत से लेकर बंाग्लादेश तक फैले इस सुन्दर वन क्षेत्र को कई दृष्टियों से अद्भुत माना जाता है।

  सुन्दरबन का अर्थ सुन्दर जंगल है। सुन्दरबन की सुन्दरता का एक शानदार नगीना कस्तूरी हिरण हैं। यहां कस्तूरी हिरण की संख्या 30000 से अधिक होने का अनुमान है।
  विशेषज्ञों की मानें तो असंख्य विलुप्त प्रजातियों के जीव-जंतु सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान में स्वच्छंद विचरण करते दिखते हैं।

  यूं कहें कि वन्य जीव प्रेमियों के लिए सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान किसी स्वर्ग से कम नहीं तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। 
  असीमित वन क्षेत्र यहां की खासियत है। वनस्पतियों का आच्छादन एक विशेष प्रकार की ऊर्जा पर्यटकों को प्रदान करता है।

  साइबेरियन बतख एवं पक्षियों के झुंड का कलरव पर्यटकों को बेहद कर्णप्रिय प्रतीत होता है। रॉयल बंगाल टाइगर की खासियत खारे पानी में तैरने की खास कला होती है।
   नवम्बर से फरवरी के मध्य शाही बंगाल टाइगर नदी या जलाशय के किनारे धूप का आनन्द लेते दिख सकते हैं। 

  सुन्दरबन मेैं शाही बंगाल टाइगर के अलावा फिशिंग कैट, लेपर्ड कैट, मैकैस, जंगली सुअर, पैंगोलिन, चीतल एवं दलदल क्षेत्र में रहने वाली प्रजातियां बहुतायत में दिखेंगी।
  करीब 1330 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान का हर अंदाज निराला दिखता है। 

  वर्ष 1987 में विश्व विरासत स्थल घोषित सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान वस्तुत: गंगा नदी सहित सात नदियों से घिरा क्षेत्र है।
  विशेषज्ञों की मानें तो यह वन क्षेत्र अद्भुत एवं विलक्षण है। वन सम्पदाओं का भण्डारण इसे प्राकृतिक रूप से अत्यधिक समृद्ध बनाता है।

  पर्यटक इस जंगल सफारी या टाइगर सफारी का आनन्द कभी भी ले सकते हैं। कारण गर्मियों में सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान का अपना एक अलग आनन्द है। सर्दियों में मेहमान पक्षियों का झुंड पर्यटकों का खास तौर से स्वागत करता है।

   बारिश के मौसम नदियों, झीलों-झरनों का वेग देखते ही बनता है। हालांकि बारिश के मौसम में पर्यटकों को सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा से बचना चाहिए।
   कारण बंगाल की खाड़ी निकट होने के कारण जल प्रवाह के वेग का खतरा रहता है। फिर भी सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान घूमने-फिरने का सही समय दिसम्बर से फरवरी की अवधि होती है।

  सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट कोलकाता है। 
   एयरपोर्ट से सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान की दूरी करीब 115 किलोमीटर है। निकटतम रेेलवे स्टेशन भी कोलकाता जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा कर सकते हैं।
22.565571,88.370209

Monday, 11 February 2019

काजीरंगा अभ्यारण्य: वैश्विक धरोहर

   काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को प्रकृति का नायाब तोहफा कहा जाना चाहिए। भारत के पूर्वोत्तर प्रांत असम का यह खूबसूरत उद्यान वैश्विक स्तर पर विशेष ख्याति रखता है। 

   वस्तुत: काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एक अद्भुत अभयारण्य है। असम के गोलाघाट एवं नोआगांव जिला के मध्य स्थित काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा क्षेत्र है। 
  अद्भुत एवं विहंगम काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान खास तौर से एक सींग वाले गैंडा के लिए प्रसिद्ध है। 

  मखमली घास के विहंगम मैदानों से लेकर पर्वत श्रंखलाओं के मध्य स्थित इस विलक्षण अभयारण्य को यूनेस्को ने विश्व विरासत क्षेत्र घोषित किया है। 
  करीब 430 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य एक सींग वाले गैंडा राइनोसेरोस एवं यूनीकोर्निस की आश्रय स्थली है।

   भारत सरकार ने 1905 में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया था। खास तौर से सर्दियों में इसकी सुन्दरता अति दर्शनीय हो जाती है। 
   सर्दियों में यहां साइबेरियन पक्षियों का बसेरा देखते ही बनता है। यह मेहमान पक्षी पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केन्द्र होते हैं।

  खास तौर से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बाज, विभिन्न प्रजातियों की चील एवं तोते अभयारण्य की शोभा होते हैं। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को भारत एवं खास तौर से पूर्वोत्तर प्रांतों का गौरव कहा जाना चाहिए। 

  लुप्त प्राय एक सींग वाले गैंडों का यह संरक्षण क्षेत्र भी है। इतना ही नहीं दुनिया में बाघों के सर्वाधिक घनत्व वाला अभयारण्य भी इसे माना जाता है।
  शायद इसीलिए 2006 में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को बाघ अभयारण्य घोषित किया गया था। 

   हालांकि इस शानदार अभयारण्य में कस्तूरी हिरण, हाथी, जंगली भैंसा, चीनी पैंगोलियन, बंगाल टाइगर, बंगाल लोमड़ियां, गिबन्स, पालना, भालू, उड़ने वाली गिलहरी, तेंदुआ, गंगा डाल्फिन, ओटर, गौर, सांभर, दलदल हिरण, होंग हिरण एवं भारतीय मंटक आदि शोभायमान एवं दर्शनीय हैं। 

  खास तौर से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में तीन शाकाहारी पशुओं का बसेरा यहां देखने को मिलता है। इनमें एशियाई हाथी, एशियाई पानी का भैंसा, दलदली हिरण हैं। जंगली चिड़ियों का बसेरा यहां खास तौर से दिखता है। 

  चिड़ियों की विभिन्न प्रजातियों को देखते हुए बर्ड लाइफ इंटरनेशनल ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का पक्षियों के संरक्षण क्षेत्र के तौर पर सीमांकन किया है।
   काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान कई दृष्टियों से विशिष्ट है। अभयारण्य में हाथियों की सवारी करना एक शानदार यात्रा का अनुभव होता है। हाथी की सवारी को राजसी सवारी के तौर पर देखा जाता है।

  लिहाजा हाथी की सवारी पर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की सैर करना किसी सौगात से कम नहीं होता है। 
  हालांकि पर्यटक जीप एवं अन्य वाहन से भी अभयारण्य का भ्रमण कर सकते हैं। अभयारण्य वस्तुत: शानदार पार्क, जल निकाय एवं जंगलों का बेहद सुन्दर क्षेत्र है।

  विशेषज्ञों की मानें तो काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को अस्तित्व में लाने एवं उसे व्यवस्थित करने की परिकल्पना लॉर्ड कर्जन ने की थी।
  लॉर्ड कर्जन की पत्नी ने विलुप्त प्रजातियों के संरक्षण की अवधारणा को मूर्त स्वरूप दिया था। इस विहंगम काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का फैलाव ब्रह्मपुत्र नदी तक है।

  नदियों एवं झीलों से आच्छादित यह इलाका वनस्पतियों से परिपूरित है। भारत के विशिष्ट मेहमानों एवं वैश्विक पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केन्द्र काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान भारत की शान है। 
  चौतरफा एक सुन्दर परिवेश दर्शनीय रहता है। देश विदेश के पर्यटकों खास तौर से प्रकृति, पर्यावरण प्रेमियों एवं वन्य जीव प्रेमियों के लिए यह उद्यान किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

   काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट रोवरीह एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन हेलेम जंक्शन है। हेलेम रेलवे स्टेशन से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की दूरी करीब 30 किलोमीटर है।
   रेलवे स्टेशन जोरहट से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की दूरी करीब 90 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा कर सकते हैं।
26.509400,93.962100

Friday, 8 February 2019

नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान: विलक्षण धरोहर

   नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान को भारत की शान एवं विलक्षण धरोहर कहा जाना चाहिए। जी हां, इसका प्राकृतिक सौन्दर्र्य अतुलनीय है। 

   शायद इसी लिए यूनेस्को ने नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान को विश्व धरोहर घोषित किया है। भारत के प्रांत उत्तराखण्ड के जिला चमोली का यह सुन्दर हिस्सा वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा है।
   वस्तुत: यह इलाका नन्दा देवी पर्वत एवं आसपास का क्षेत्र है। इस सुन्दर अभयारण्य में प्रकृति का हर नायाब रंग देखने को मिलेगा।

  नन्दा देवी पर्वत एवं उसके आसपास के सम्पूर्ण इलाका को नन्दा देवी राष्ट्रीय अभयारण्य के नाम से जाना पहचाना जाता है।
   अभयारण्य करीब 630.33 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैला हुआ है। विशेषज्ञों की मानें तो उत्तर भारत का यह अति विशालतम अभयारण्य है। 

  भारत सरकार ने नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष 1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया था। खास यह कि विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी भी नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित है।
   खास यह कि फूलों की घाटी सहित इस विहंगम अभयारण्य को वर्ष 1988 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया था। 
  फूलों की घाटी एवं नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान संयुक्त रूप से नन्दा देवी बायोस्फियर रिजर्व बनता है। इसका कुल क्षेत्रफल 2236.74 वर्ग किलोमीटर है। 

   नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान की खासियत यहीं समाप्त नहीं होती है। यूनेस्को की वैश्विक बायोस्फियर रिजर्व की सूची में नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान को 2004 में स्थान दिया गया।
   खास यह कि यह विशालतम नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान दो हिस्सों में दर्शित है। इसे बाहरी एवं भीतरी दायरे में रखा गया है। 

  दक्षिणी दिशा में अभयारण्य पर्वत चोटियों से घिरा है। उत्तर दक्षिण दिशा में पर्वत श्रंखलाएं ऋषिगंगा दर्रे में समाहित हो गयी हैं। 
  विशेषज्ञों की मानें तो इस सुन्दर अभयारण्य की खोज वर्ष 1907 में लाँगस्टाफ ने की थी। दरअसल, लाँगस्टाफ ने त्रिशूल पर्वत शिखर की यात्रा की थी। पर्वतारोहण के दौरान उनको बहुत कुछ दिखा।

  खास यह कि पर्यटक नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान में प्राकृतिक सौन्दर्य एवं विहंगमता के रोमांच का सुखद एहसास करते हैं।
  चौतरफा पर्वत श्रंखला का आच्छादन मन मस्तिष्क को प्रफुल्लित कर देता है। करीब ढ़ाई दर्जन पर्वत शिखरों का आच्छादन पर्यटकों को एक खास रोमांच से भर देता है। 

  अभयारण्य के पर्वत शिखरों को देखें तो नन्दा देवी पर्वत शिखर सर्वाधिक ऊंचाई वाला शिखर है। नन्दा देवी पर्वत शिखर की समुद्र तल से ऊंचाई करीब 7816 मीटर है। 

  इसी प्रकार समुद्र तल से देवीस्थान एक की ऊंचाई 6678 मीटर, देवीस्थान दो की ऊंचाई 6529 मीटर, ऋषिकोट की ऊंचाई 6236 मीटर, हनुमान की ऊंचाई 6075 मीटर, दूनागिरी की ऊंचाई 7066 मीटर है। चांगाबांग की ऊंचाई 6864 मीटर, कलंक की ऊंचाई 6931 मीटर, ऋषि पहर की ऊंचाई 6992 मीटर, मंगराओ की ऊंचाई 6568 मीटर, देव दमला की ऊंचाई 6620 मीटर, बमचु की ऊंचाई 6303 मीटर, सकरम की ऊंचाई 6254 मीटर, लाटु धुरा की ऊंचाई 6392 मीटर, सुनंदा देवी की ऊंचाई 7434 मीटर, नंदा खाट की ऊंचाई 6611 मीटर, पनवाली द्वार की ऊंचाई 6663 मीटर, मैकटोली की ऊंचाई 6803 मीटर, देवटोली की ऊंचाई 6788 मीटर, मृगथनी की ऊंचाई 6855 मीटर, त्रिशूल एक की ऊंचाई 7120 मीटर, त्रिशूल दो की ऊंचाई 6690 मीटर, त्रिशूल तीन की ऊंचाई 6008 मीटर बेथरटोली हिमल की ऊंचाई 6352 मीटर है। 

  इसी प्रकार हरदेओल, त्रिशूली, नंदाकोट एवं नंदाघुण्टी की ऊंचाई भी अतुलनीय है। इस शानदार अभयारण्य में विभिन्न 130 प्रकार के प्रजातियों के पक्षियों का कलरव अनुगूंजित होता रहता है। हजारों प्रजातियों की तितलियां परिवेश को खुशनुमा बनाये रखती हैं। 

  अभयारण्य में हिमालयी भालू, हिम तेंदुआ, हिमालयी ताहर, भारल, कस्तूरी हिरण, लंगूर, हिमालयी चीता, लाल लोमड़ी सहित असंख्य जीव-जन्तुओं से अभयारण्य आच्छादित रहता है। 
  चौतरफा हिम शिखर का सौन्दर्य नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान के प्राकृतिक सौन्दर्य में चार चांद लगा देते हैं। 

   नदियों, झीलों-झरनों का सौन्दर्य पर्यटकों को बरबस आकर्षित करता है। वनस्पतियों की आैषधीय एवं भीनी-भीनी सुगंध दिल-दिमाग को एक विशेष ताजगी प्रदान करते हैं। फूलों की विविधिता यहां देखते ही बनती है।

  फूलों की सुगंध मन मस्तिष्क को प्रफुल्लित कर देती है। अत्यधिक ऊंचाई पर होने के कारण नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान बादलों का आशियाना सा प्रतीत होता है। पर्यटक यहां बादलों संग रोमांच का विशेष एहसास करते हैं।
  नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून है। 
   जॉली ग्रांट एयरपोर्ट से नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान की दूरी करीब 222 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन हरिद्वार जंक्शन है। हरिद्वार जंक्शन से नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान की दूरी करीब 202 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा कर सकते हैं।
30.554800,79.566000

शांति निकेतन: सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर    शांति निकेतन को आध्यात्मिक धरोहर कहा जाना चाहिए। जी हां, शांति निकेतन संस्कृति, परम्परा...