सहयाद्री पर्वत: रोमांचक अनुभूूति
सहयाद्री पर्वत का विशालता को अद्भुत कहा जाना चाहिए। इस विशालतम पर्वत श्रंखला का सौन्दर्य शास्त्र प्रकृति का इन्द्रधनुषी आयाम पेश करता है।
सहयाद्री पर्वत के शिखर पर्यटकों को आकर्षित करते हैं तो झीलों-झरनों एवं नदियों की सुन्दरता प्राकृतिक सौन्दर्य की एक नई इबारत गढ़ते हैं।
महाराष्ट्र से लेकर गोवा, केरल, कर्नाटक एवं तमिलनाडु तक फैले विशाल क्षेत्र में राष्ट्रीय उद्यानों, आरक्षित वन, वन्य जीव अभयारण्यों की एक शानदार श्रंखला विद्यमान है।
सहयाद्री पर्वत को पश्चिमी घाट के तौर से विशेष ख्याति हासिल है। विशेषज्ञों की मानें तो सहयाद्री पर्वत की लम्बाई करीब 160000 वर्ग किलोमीटर है। चौड़ाई भी करीब 100 किलोमीटर के आसपास है। समुद्र तल से आैसत ऊंचाई करीब 1200 मीटर है।
विशेषज्ञों की मानें तो सहयाद्री पर्वत उच्च जैव विविधिता वाला क्षेत्र है। यूनेस्को ने सहयाद्री पर्वत को विश्व धरोहर का दर्जा दिया है।
सहयाद्री पर्वत वैश्विक पर्यटकों का विशेष पसंदीदा क्षेत्र है। महाराष्ट्र से लेकर केरल, कर्नाटक एवं तमिलनाडु तक फैलेे इस प्राकृतिक सौन्दर्य से वैश्विक पर्यटक अभिभूत होते हैं।
खास यह कि सहयाद्री पर्वत का सौन्दर्य शास्त्र महाराष्ट्र से प्रारम्भ होता है। गोवा, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु से होते हुए कन्याकुमारी में समाप्त होती है।
विशेषज्ञों की मानें तो सहयाद्री पर्वत के जैव विविधिता आठ स्थान विश्व में शीर्षस्थ हैं। आैषधीय वनस्पतियों की प्रचुरता एवं विविधिता इस सम्पूर्ण क्षेत्र को विश्व में श्रेष्ठ बनाती है।
जीवों की करीब 325 विलुप्त प्रजातियां खास तौर से यहां संरक्षित दिखती हैं। सहयाद्री पर्वत को विलुप्त वन्य जीवन एवं विलुप्त आैषधीय वनस्पतियों का भण्डारण क्षेत्र कहा जा सकता है। दुलर्भता यहां की खासियत है।
वर्ष 2012 में यूनेस्को ने सहयाद्री पर्वत अर्थात पश्चिमी घाट के 39 मुख्य स्थानों को वैश्विक धरोहर का दर्जा दिया है।
सहयाद्री पर्वत की प्राकृतिक सुन्दरता वैश्विक पर्यटकों को आकर्षित करती है। पर्यटक यहां खुद को एक अलग दुनिया में महसूस करते हैं।
खास यह कि सहयाद्री पर्वत कई स्थानों पर सागर के साथ भी संगमित होता है। सहयाद्री पर्वत वस्तुत: संस्कृत नाम है।
सहयाद्री पर्वत क्षेत्र में कई शानदार एवं भव्य किले शोभायमान हैं। यह किले ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध हैं। सहयाद्री पर्वत के थाल घाट, भोर घाट, पाल घाट आदि भव्य-दिव्य दर्रे हैं।
थाल घाट मुम्बई-आगरा मार्ग पर स्थित है। इसी तरह भोर घाट मुम्बई-पूना मार्ग पर है। पाल घाट दर्रा नीलगिरी पठार का क्षेत्र है।
दक्षिण भारत में यही सहयाद्री पर्वत ऊंचा होकर अन्नामलाई पर्वत के तौर पर दिखता है। खास यह कि सहयाद्री पर्वत श्रंखला में प्राकृतिक सौन्दर्य का कोई भी आयाम अछूता नहीं रहता है।
चाय एवं काफी की भीनी-भीनी खूशबूू हो या वनस्पतियों की सुगंध हो। परिवेश दिल दिमाग को एक विशेष ताजगी प्रदान करते हैं। फूलों की घाटियां तो दिलों में उतर जाती हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो फूलों की 1600 से अधिक प्रजातियां यहां पुष्पित एवं पल्लवित हैं। इस प्रकार यह विश्व का अनूूठा क्षेत्र है।
सहयाद्री पर्वत क्षेत्र में दो जैव संरक्षित क्षेत्र हैं। इतना ही नहीं 13 राष्ट्रीय उद्यान हैं। केरल का साइलेंट वैली इसी सहयाद्री पर्वत श्रंखला का हिस्सा है।
नीलगिरी बायोस्फियर रिजर्व सहयाद्री पर्वत का हिस्सा है। यह विश्व का विलक्षण एवं अनूठा क्षेत्र है। यह करीब 5500 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।
पर्यावरण प्रेमियों के लिए सहयाद्री पर्वत श्रंखला किसी स्वर्ग की भांति है। पर्यटकों को यहां प्रकृति की गोद का एहसास होता है।
मखमली घास के मैदान ह्मदयस्पर्शी एहसास कराते हैं। शांति, सुकून के साथ ही रोेमांच की अनुभूति भी पर्यटक यहां करते हैं।
सहयाद्री पर्वत की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। चूंकि महाराष्ट्र की राजधानी मुम्बई से हवाई यात्रा के जरिये कहीं भी आसानी से पहंुचा जा सकता है।
गोवा, केरल, कर्नाटक एवं तमिलनाडु के एयरपोर्ट के जरिये हवाई यात्रा की जा सकती है। छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मुम्बई से यात्रा कर पर्यटक महाराष्ट्र में सहयाद्री पर्वत का भरपूर आनन्द ले सकते हैं।
यहां छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुम्बई रेल यात्रा कर पहंुच सकते हैं। पर्यटक सड़क मार्ग से भी सहयाद्री पर्वत की यात्रा कर सकते हैं।
19.075983,72.877655
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