Monday, 11 February 2019

काजीरंगा अभ्यारण्य: वैश्विक धरोहर

   काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को प्रकृति का नायाब तोहफा कहा जाना चाहिए। भारत के पूर्वोत्तर प्रांत असम का यह खूबसूरत उद्यान वैश्विक स्तर पर विशेष ख्याति रखता है। 

   वस्तुत: काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एक अद्भुत अभयारण्य है। असम के गोलाघाट एवं नोआगांव जिला के मध्य स्थित काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा क्षेत्र है। 
  अद्भुत एवं विहंगम काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान खास तौर से एक सींग वाले गैंडा के लिए प्रसिद्ध है। 

  मखमली घास के विहंगम मैदानों से लेकर पर्वत श्रंखलाओं के मध्य स्थित इस विलक्षण अभयारण्य को यूनेस्को ने विश्व विरासत क्षेत्र घोषित किया है। 
  करीब 430 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य एक सींग वाले गैंडा राइनोसेरोस एवं यूनीकोर्निस की आश्रय स्थली है।

   भारत सरकार ने 1905 में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया था। खास तौर से सर्दियों में इसकी सुन्दरता अति दर्शनीय हो जाती है। 
   सर्दियों में यहां साइबेरियन पक्षियों का बसेरा देखते ही बनता है। यह मेहमान पक्षी पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केन्द्र होते हैं।

  खास तौर से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बाज, विभिन्न प्रजातियों की चील एवं तोते अभयारण्य की शोभा होते हैं। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को भारत एवं खास तौर से पूर्वोत्तर प्रांतों का गौरव कहा जाना चाहिए। 

  लुप्त प्राय एक सींग वाले गैंडों का यह संरक्षण क्षेत्र भी है। इतना ही नहीं दुनिया में बाघों के सर्वाधिक घनत्व वाला अभयारण्य भी इसे माना जाता है।
  शायद इसीलिए 2006 में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को बाघ अभयारण्य घोषित किया गया था। 

   हालांकि इस शानदार अभयारण्य में कस्तूरी हिरण, हाथी, जंगली भैंसा, चीनी पैंगोलियन, बंगाल टाइगर, बंगाल लोमड़ियां, गिबन्स, पालना, भालू, उड़ने वाली गिलहरी, तेंदुआ, गंगा डाल्फिन, ओटर, गौर, सांभर, दलदल हिरण, होंग हिरण एवं भारतीय मंटक आदि शोभायमान एवं दर्शनीय हैं। 

  खास तौर से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में तीन शाकाहारी पशुओं का बसेरा यहां देखने को मिलता है। इनमें एशियाई हाथी, एशियाई पानी का भैंसा, दलदली हिरण हैं। जंगली चिड़ियों का बसेरा यहां खास तौर से दिखता है। 

  चिड़ियों की विभिन्न प्रजातियों को देखते हुए बर्ड लाइफ इंटरनेशनल ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का पक्षियों के संरक्षण क्षेत्र के तौर पर सीमांकन किया है।
   काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान कई दृष्टियों से विशिष्ट है। अभयारण्य में हाथियों की सवारी करना एक शानदार यात्रा का अनुभव होता है। हाथी की सवारी को राजसी सवारी के तौर पर देखा जाता है।

  लिहाजा हाथी की सवारी पर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की सैर करना किसी सौगात से कम नहीं होता है। 
  हालांकि पर्यटक जीप एवं अन्य वाहन से भी अभयारण्य का भ्रमण कर सकते हैं। अभयारण्य वस्तुत: शानदार पार्क, जल निकाय एवं जंगलों का बेहद सुन्दर क्षेत्र है।

  विशेषज्ञों की मानें तो काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को अस्तित्व में लाने एवं उसे व्यवस्थित करने की परिकल्पना लॉर्ड कर्जन ने की थी।
  लॉर्ड कर्जन की पत्नी ने विलुप्त प्रजातियों के संरक्षण की अवधारणा को मूर्त स्वरूप दिया था। इस विहंगम काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का फैलाव ब्रह्मपुत्र नदी तक है।

  नदियों एवं झीलों से आच्छादित यह इलाका वनस्पतियों से परिपूरित है। भारत के विशिष्ट मेहमानों एवं वैश्विक पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केन्द्र काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान भारत की शान है। 
  चौतरफा एक सुन्दर परिवेश दर्शनीय रहता है। देश विदेश के पर्यटकों खास तौर से प्रकृति, पर्यावरण प्रेमियों एवं वन्य जीव प्रेमियों के लिए यह उद्यान किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

   काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट रोवरीह एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन हेलेम जंक्शन है। हेलेम रेलवे स्टेशन से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की दूरी करीब 30 किलोमीटर है।
   रेलवे स्टेशन जोरहट से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की दूरी करीब 90 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा कर सकते हैं।
26.509400,93.962100

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