सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान: प्रकृति का उपहार
सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान के प्राकृतिक सौन्दर्य एवं प्राकृतिक सम्पदा का कोई जोड़ नहीं। जी हां, भारत के प्रांत पश्चिम बंगाल के इस सुन्दर एवं अद्भुत सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान को प्राकृतिक सम्पदाओं का प्रचुर भण्डारण क्षेत्र कहा जाना चाहिए।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिला के तहत आने वाला यह सुन्दर अभयारण्य अति दर्शनीय है। शायद इसी लिए सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान वैश्विक पर्यटकों की बेहतर पसंद में शीर्ष पर रहता है।
खास तौर से सुन्दरबन रॉयल बंगाल टाइगर के लिए दुनिया भर में जाना पहचाना जाता है।
सुन्दरबन वस्तुत: एक शानदार वन्य जीव अभयारण्य है। विशेषज्ञों की मानें तो सुन्दरबन रॉयल बंगाल टाइगर का सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र है। चूंकि सुन्दरबन का अधिसंख्य क्षेत्र जल आधारित है।
लिहाजा मगरमच्छ की दर्जनों प्रजातियां यहां पायी जाती हैं। वन्य जीव की विभिन्न प्रजातियां होने के कारण इसे वर्ष 1977 में वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया था।
इसे बायोस्फीयर रिजर्व का दर्जा भी हासिल है। खास यह कि देश दुनिया के पर्यटक रॉयल बंगाल टाइगर की गर्जना सुनने के लिए वन क्षेत्र में रात्रि विश्राम भी करते हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो सुन्दरबन में चार सौ से अधिक रॉयल बंगाल टाइगर हैं।
यह एक घोषित टाइगर रिजर्व है। सुन्दरबन गंगा नदी का डेल्टा क्षेत्र है। विशिष्टताओं को देखते हुए यूनेस्को ने सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है।
भारत से लेकर बंाग्लादेश तक फैले इस सुन्दर वन क्षेत्र को कई दृष्टियों से अद्भुत माना जाता है।
सुन्दरबन का अर्थ सुन्दर जंगल है। सुन्दरबन की सुन्दरता का एक शानदार नगीना कस्तूरी हिरण हैं। यहां कस्तूरी हिरण की संख्या 30000 से अधिक होने का अनुमान है।
विशेषज्ञों की मानें तो असंख्य विलुप्त प्रजातियों के जीव-जंतु सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान में स्वच्छंद विचरण करते दिखते हैं।
यूं कहें कि वन्य जीव प्रेमियों के लिए सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान किसी स्वर्ग से कम नहीं तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।
असीमित वन क्षेत्र यहां की खासियत है। वनस्पतियों का आच्छादन एक विशेष प्रकार की ऊर्जा पर्यटकों को प्रदान करता है।
साइबेरियन बतख एवं पक्षियों के झुंड का कलरव पर्यटकों को बेहद कर्णप्रिय प्रतीत होता है। रॉयल बंगाल टाइगर की खासियत खारे पानी में तैरने की खास कला होती है।
साइबेरियन बतख एवं पक्षियों के झुंड का कलरव पर्यटकों को बेहद कर्णप्रिय प्रतीत होता है। रॉयल बंगाल टाइगर की खासियत खारे पानी में तैरने की खास कला होती है।
नवम्बर से फरवरी के मध्य शाही बंगाल टाइगर नदी या जलाशय के किनारे धूप का आनन्द लेते दिख सकते हैं।
सुन्दरबन मेैं शाही बंगाल टाइगर के अलावा फिशिंग कैट, लेपर्ड कैट, मैकैस, जंगली सुअर, पैंगोलिन, चीतल एवं दलदल क्षेत्र में रहने वाली प्रजातियां बहुतायत में दिखेंगी।
करीब 1330 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान का हर अंदाज निराला दिखता है।
वर्ष 1987 में विश्व विरासत स्थल घोषित सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान वस्तुत: गंगा नदी सहित सात नदियों से घिरा क्षेत्र है।
विशेषज्ञों की मानें तो यह वन क्षेत्र अद्भुत एवं विलक्षण है। वन सम्पदाओं का भण्डारण इसे प्राकृतिक रूप से अत्यधिक समृद्ध बनाता है।
पर्यटक इस जंगल सफारी या टाइगर सफारी का आनन्द कभी भी ले सकते हैं। कारण गर्मियों में सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान का अपना एक अलग आनन्द है। सर्दियों में मेहमान पक्षियों का झुंड पर्यटकों का खास तौर से स्वागत करता है।
बारिश के मौसम नदियों, झीलों-झरनों का वेग देखते ही बनता है। हालांकि बारिश के मौसम में पर्यटकों को सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा से बचना चाहिए।
कारण बंगाल की खाड़ी निकट होने के कारण जल प्रवाह के वेग का खतरा रहता है। फिर भी सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान घूमने-फिरने का सही समय दिसम्बर से फरवरी की अवधि होती है।
सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट कोलकाता है।
एयरपोर्ट से सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान की दूरी करीब 115 किलोमीटर है। निकटतम रेेलवे स्टेशन भी कोलकाता जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा कर सकते हैं।
22.565571,88.370209
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