इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय उद्यान: आैषधीय वनस्पतियों का भण्डारण
इन्दिरा गांधी वन्य जीव अभयारण्य को आैषधीय वनस्पतियों खजाना कहा जाना चाहिए। जी हां, इस राष्ट्रीय उद्यान में विलुप्त प्रजाति की आैषधीय वनस्पतियों को खास संरक्षण हासिल है।
इस राष्ट्रीय उद्यान को टॉपस्लिप के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। वस्तुत: इन्दिरा गांधी वन्य जीव अभयारण्य वन्य जीव संरक्षण क्षेत्र है। भारत के तमिलनाडु के कोयम्बटूर का यह राष्ट्रीय उद्यान बेहद रोमांचक है।
विशेषज्ञों की मानें तो 19 वीं सदी में एक स्थानीय प्रथा से इस शानदार अभयारण्य का उदय हुआ। पोलाची, वेलपराई एवं उदुमलपेट आदि इलाके में फैला यह राष्ट्रीय उद्यान अन्नामलाई पहाड़ियों का एक बड़ा हिस्सा है। करीब 958 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैला यह राष्ट्रीय उद्यान वस्तुत: प्रकृति का शानदार एवं नायाब तोहफा है।
खास यह कि इस विहंगम राष्ट्रीय उद्यान को पूर्व में अनाईमलाई वन्य जीव अभयारण्य के नाम से जाना जाता था। इसे विधिवत वर्ष 1974 में एक भव्य-दिव्य अभयारण्य के तौर पर स्थापित किया गया। देश की पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने वर्ष 1961 में इस राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण किया था।
लिहाजा बाद में इसे इन्दिरा गांधी के नाम से जाना पहचाना जाने लगा। खास यह कि इन्दिरा गांधी वन्य जीव अभयारण्य पश्चिमी घाट इलाके का एक बड़ा हिस्सा है।
खास यह कि इन्दिरा गांधी वन्य जीव अभयारण्य का इलाका बेहद ऊंचा-नीचा है। समुद्र तल से कहीं 340 मीटर ऊंचाई है तो कहीं ऊंचाई 2513 मीटर है।
खास यह कि एक दर्जन से अधिक पर्वत चोटियां इन्दिरा गांधी वन्य जीव अभयारण्य की शान एवं शोभा हैं। इन पर्वत चोटियों की छटा निराली एवं अद्भुत हैं। इन्दिरा गांधी वन्य जीव अभयारण्य में खास तौर से वन्य जीव की विभिन्न प्रजातियां संरक्षित हैं।
बंगाल के शेर, भारतीय हाथी, एशियाई जंगली कुत्ता, शेर की पूंछ वाला मकाक आदि इत्यादि हैं। इनके अलावा गोल्डन सियार, तेंदुआ बिल्ली, जंगली बिल्ली, चीतल, काकड़, हिरन, जंगली सुअर, लंगूर, बोनट मकाक, नेवला, भारतीय साही, धारीदार पाम गिलहरी, उड़ने वाली छिपकली, गिरगिट आदि इत्यादि हैं। बाघ, शेर, चीता, हिरन, हाथी आदि विशिष्ट जीव-जन्तु इस शानदार एवं सुन्दर इन्दिरा गांधी वन्य जीव अभयारण्य की शान एवं शोभा हैं।
वर्ष 2008 में इन्दिरा गांधी वन्य जीव अभयारण्य के एक हिस्से को टाइगर रिजर्व के तौर पर घोषित किया गया। जिससे बाघ वंश को विधिवत संरक्षण मिल सके।
यूं कहा जाये कि इन्दिरा गांधी वन्य जीव अभयारण्य वनस्पतियों एवं जीव-जन्तुओं की व्यापक विविधिता का संरक्षित केन्द्र है तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।
खास यह कि विलुप्त एवं प्रचलित 2000 से अधिक आैषधीय एवं सामान्य वनस्पतियां इस राष्ट्रीय उद्यान में पुष्पित एवं पल्लवित हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इनमें 400 से अधिक आैषधीय वनस्पतियां विशेष महत्व वाली हैं।
स्थलाकृति एवं जलवायु आैषधीय वनस्पतियों के लिए बेहद अनुकूल होने के कारण इन्दिरा गांधी वन्य जीव अभयारण्य का परिवेश अति दर्शनीय एवं स्वास्थ्य की गुणवत्ता वाला है। लिहाजा पर्यटक इस अभयारण्य में प्रफुल्लता का एहसास करते हैं।
शुद्ध जलवायु एवं भरपूर ताजगी वाली आक्सीजन पर्यटकों को एक विशेष ऊर्जा प्रदान करती है। सदाबहार वन, अर्ध सदाबहार वन, मोंटेन शोला-चारागाह, कांटेदार वन एवं दलदली क्षेत्र इन्दिरा गांधी वन्य जीव अभयारण्य की विशिष्टता है।
सदाबहार वन क्षेत्र मुख्यत: समुद्र तल से 600 मीटर ऊंचाई से लेकर 1600 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाये जाते हैं। पर्वतीय चारागाह इस राष्ट्रीय उद्यान की विशिष्ट शोभा हैं।
सागौन का सघन वन क्षेत्र इन्दिरा गांधी वन्य जीव अभयारण्य के वन क्षेत्र की शोभा को आैर भी बढ़ा देता है। बांस के प्राकृतिक वन क्षेत्र भी यहां खास हैं। इन सघन वन क्षेत्र में वन्य जीवों का कोलाहल पर्यटकों को बेहद रोमांचक प्रतीत होता है।
आदिवासियों का यह इलाका एक अलग ही लोक संस्कृति को बयां करता है। आदिवासियोें में कदार, मालासर, मलयमालासार, पुलैयर, मुदुवर एवं एरावलर आदि इत्यादि हैं।
इन्दिरा गांधी वन्य जीव अभयारण्य की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संंसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट कोयम्बटूर इण्टरनेशनल एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन कोयम्बटूर जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी इन्दिरा गांधी वन्य जीव अभयारण्य की यात्रा कर सकते हैं।
11.016010,76.970310
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