कान्हा राष्ट्रीय उद्यान: प्राकृतिक सौन्दर्य
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान को प्राकृतिक सुन्दरता की श्रेष्ठतम संरचना कहा जाना चाहिए। जी हां, भारत के इस राष्ट्रीय उद्यान का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत है।
भारत के मध्य प्रदेश के मंडला जिला का यह शानदार राष्ट्रीय उद्यान वैश्विक ख्याति रखता है। खास यह कि मध्य प्रदेश राष्ट्रीय उद्यानों एवं सघन वन क्षेत्र के लिए प्रसिद्ध है। विशेषज्ञों की मानें तो कान्हा का आशय कनहार से है। स्थानीयता में कनहार चिकनी मिट्टी कोे कहा जाता है।
मान्यता है कि कान्हा सघन वन क्षेत्र के निकट एक गांव मेें सिद्ध पुरुष रहते थे। सिद्ध पुरुष का नाम कान्हा था। लिहाजा अब इस क्षेत्र को कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना पहचाना जाता है। इसे बाघ, हाथी एवं भालू सहित असंख्य वन जीवों का आशियाना कहना चाहिए।
करीब 940 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले इस राष्ट्रीय उद्यान में एक अति विशाल पर्वतीय क्षेत्र है। सतपुड़ा की पर्वत मालाओं से आच्छादित कान्हा राष्ट्रीय उद्यान ऊंचा-नीचा क्षेत्र है। खास यह कि इन पर्वत मालाओं की ऊंचाई समुद्र तल से कहीं 450 मीटर है तो कहीं 900 मीटर भी है।
कान्हा को बाघ संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान का आकार-प्रकार घोड़े के पैर की भांति है। बंजर एवं हेलन घाटियां कान्हा की शान एवं शोभा हैं। वर्ष 1955 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की असंख्य खूबियां रखता है।
बाघ, हाथी एवं भालू वंश के साथ ही विलुप्त हो चुकी बाराहसिंगा की प्रजातियां यहां खास तौर से दर्शनीय हैं। कान्हा एशिया के अति सुन्दर एवं सुरम्य वन्य जीव अभयारण्य में से एक है। बाघ संरक्षण के लिए यह एक आदर्श क्षेत्र है।
विशेषता यह कि खुले एवं विशाल मैदान वन्य जीवन को विशेष संरक्षण प्रदान करते हैं। बाघ के अलावा काला हिरन, बारहसिंगा, सांभर, चीतल एवं बंदरों को कुलांचे भरते देखा जा सकता है। बांस एवं टीक के वृक्ष कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की शान एवं शोभा हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो बारहसिंगा की प्रजाति कान्हा राष्ट्रीय उद्यान को काफी कुछ खास बनाये रखती है। विशेषज्ञों की मानें तो दो दशक पहलेे बारहसिंगा की यह प्रजाति विलुप्त श्रेणी में आ गयी थी लेकिन इस विशाल अभयारण्य में बारहसिंगा को कुलांचे भरते देखा जा सकता है।
भारत का कान्हा राष्ट्रीय उद्यान एकमात्र अभयारण्य है, जहां बारहसिंगा बहुलता में पाये जाते हैं। पर्यटक जीप सफारी की सवारी कर कान्या राष्ट्रीय उद्यान के प्राकृतिक सौन्दर्य एवं वन्य जीवन का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। बाघों को नजदीक से देखने के लिए पर्यटक कान्हा में हाथी की सवारी कर सकते हैं।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान को पक्षियों का एक विशाल घरौंदा कहा जा सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो कान्हा में पक्षियों की 300 से अधिक प्रजातियां संरक्षित हैं। सर्दियों में प्रवासी पक्षियों का भारी जमावड़ा रहता है। आशय यह कि सर्दियों में कान्हा मेहमान पक्षियों का घर बन जाता है।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में सारस, छोटी बतख, पिंटेल, तालाबी बगुला, मोर-मोरनी, मुर्गा, तीतर, बटेर, कबूतर, पपीहा, उल्लू, किंगफिशर, कठफोड़वा आदि इत्यादि पक्षी हैं। बामनी दादर यहां का एक खास इलाका है।
बामनी दादर वस्तुत: सूर्योदय एवं सूर्यास्त का दर्शनीय स्थल है। बामनी दादर से कान्हा राष्ट्रीय उद्यान का विहंगम दृश्य दिखता है। खास यह कि कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में दुर्लभ जीव-जन्तु भी दिख जायेंगेे।
भारतीय उदबिलाव, भारतीय पैंगोलिन आदि इत्यादि है। राजा-रानी कान्हा का एक विशेष क्षेत्र है। वस्तुत: राजा-रानी पेड़ों के दो विशाल ठूंठ हैं। जंगल में स्थित इन दो ठूंठ की नित्य पूजा अर्चना की जाती है। इनको राजा-रानी के नाम से जाना पहचाना जाता है।
कान्हा संग्रहालय: कान्हा संग्रहालय में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान का प्राकृतिक इतिहास उपलब्ध है। संग्रहालय से टाइगर रिजर्व का शानदार दृश्य देखा जा सकता है। वन्य जीवों की विशेषताओं का यहां सचित्र उल्लेख है।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा केे सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट नागपुर एयरपोर्ट है। नागपुर एयरपोर्ट से कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की दूरी करीब 266 किलोमीटर है। निकटतम रेेलवे स्टेशन जबलपुर जंक्शन है। जबलपुर जंक्शन से कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की दूरी 175 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा कर सकते हैं।
22.586600,80.356200
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