पेरियार राष्ट्रीय उद्यान : वन्य जीवन का सौन्दर्य
पेरियार राष्ट्रीय उद्यान को हाथियों का घर कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, यह राष्ट्रीय उद्यान खास तौर से हाथियों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।
हालांकि इस राष्ट्रीय उद्यान का एक बड़ा हिस्सा बाघ संरक्षण के लिए भी आरक्षित है। पेरियार राष्ट्रीय उद्यान भारत का प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है।
खास यह कि पेरियार राष्ट्रीय उद्यान दक्षिण भारत का खूबसूरत एवं दर्शनीय उद्यान है। भारत के केरल प्रांत के पश्चिमी घाटों का यह सुन्दर उद्यान वस्तुत: वन्य जीव अभयारण्य है।
इस खूबसूरत राष्ट्रीय उद्यान में हाथियों, बाघों केे अलावा नीलगाय, जंगली सुअर, सांभर, भालू, चीता, तेंदुआ, हिरन आदि इत्यादि वन्य जीव संरक्षित हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1950 में की गयी थी।
पेरियार राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष 1998 की अवधि में हाथी संरक्षण परियोजना के तहत विशेष संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था। हालांकि इसके पूर्व वर्ष 1978 में इसे टाइगर रिजर्व घोषित किया गया।
पेरियार राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटकों के लिए सभी आवश्यक सेवायें-सुविधायें उपलब्ध हैं। जिससे पर्यटक पेरियार राष्ट्रीय उद्यान में घूम कर वन्य जीवन के रोमांच का एहसास कर सकें।
नदियों, झीलों एवं झरनों की प्रचुरता रखने वाला यह वन्य जीव अभयारण्य प्रकृति का एक शानदार उपहार है। पेरियार एवं पम्बा यहां की मुख्य नदियां हैं।
पेरियार राष्ट्रीय उद्यान वस्तुत: केरल के इडुक्की एवं पथानामथिट्टा जिलों का एक बड़ा हिस्सा है। करीब 925 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह राष्ट्रीय उद्यान अति दर्शनीय है। पानी के मोटरयान में सवार होकर पर्यटक पेरियार राष्ट्रीय उद्यान के सौन्दर्य एवं वन्य जीवन के रोमांच का एहसास करते हैं।
पेरियार राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा का सबसे बेहतरीन समय अक्टूबर से जून की अवधि है। वनस्पतियों एवं फूलों की विभिन्न प्रजातियां संरक्षित हैं। लिहाजा परिवेश एक खास सुगंध से महकता रहता है।
विशेषज्ञों की मानें तो वनस्पतियों की 170 से अधिक एवं फूलों की 140 से अधिक प्रजातियां यहां संरक्षित हैं। यह इलाका खास तौर से इलायची हिल्स के तौर पर ख्याति रखता है।
समुद्र तल से करीब 2019 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पेरियार राष्ट्रीय उद्यान प्रकृति के सौन्दर्य का करीब-करीब हर खजाना अपनी आगोश में रखता है। इस शानदार अभयारण्य में पेरियार झील एवं मुल्लापेरियार बांध पेरियार राष्ट्रीय उद्यान की शान एवं शोभा हैं।
मुल्लापेरियार बांध का निर्माण करीब 1895 में किया गया था। लिहाजा इसे देश के अति प्राचीन बांध में माना जा सकता है।
खास यह कि पेरियार राष्ट्रीय उद्यान की जलवायु अति शीतल एवं शांत रहती है। लिहाजा पेरियार राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटक शांत शीतलता का एहसास करते हैं। इसे आैषधीय वनस्पतियों का भण्डारण क्षेत्र भी कहा जा सकता है।
खास यह कि इस इलाके में चाय बागान, कॉफी बागान एवं इलायची के बागानों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। विशेषज्ञों की मानें तो इस सुन्दर अभयारण्य में 24 बंगाल टाइगर्स हैं।
इतना ही नहीं, पक्षियों की 265 से अधिक प्रजातियां पेरियार राष्ट्रीय उद्यान में संरक्षित हैं। सांप, मगरमच्छ, छिपकली एवं कछुआ सहित अन्य वन्य जीवों की एक लम्बी श्रंखला इस विशाल अभयारण्य में संरक्षित हैं। नदियां, झील एवं झरनों की विशाल श्रंखला मछलियों एवं जलीय जीवन को आश्रय देते हैं।
खास तौर से पेरियार ट्राउट, पेरियार लाटिया, पेरियार कंटिया, चना कंटिया, त्रावणकोर लोच आदि मछलियों की प्रजातियां नदियों, झीलों एवं झरनों में कोलाहल करती दिखती हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो 160 से अधिक तितलियोंं की प्रजातियां पेरियार राष्ट्रीय उद्यान के परिवेश को आैर भी अधिक खूबसूरत बनाती हैं।
इनमें खास तौर से चूना तितली, मालाबार पेड़ अप्सरा, त्रावणकोर शाम ब्रााउन आदि इत्यादि हैं।
पेरियार राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट कोचीन इण्टरनेशनल एयरपोर्ट है।
निकटतम रेलवे स्टेशन इडुक्की जंक्शन है। इडुक्की जंक्शन से पेरियार राष्ट्रीय उद्यान की दूरी करीब 60 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी पेरियार राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा कर सकते हैं।
9.847510,76.980900
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