Sunday, 9 June 2019

गिर वन्य जीव अभयारण्य : एशियाई शेरों के दर्शन

   गिर वन्य जीव अभयारण्य को एशियाई शेरों का एकमात्र ठिकाना कहा जाना चाहिए। जी हां, गिर वन्य जीव अभयारण्य अद्भुत एवं विलक्षण है।

   गिर में वस्तुत: एशियाई शेरों का एकमात्र साम्राज्य कायम है। भारत के गुजरात प्रांत के जिला जूनागढ़, अमरेली एवं सोमनाथ तक फैला यह अभयारण्य अति दर्शनीय है। विशेषज्ञों की मानें तो करीब 1424 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले इस वन्य जीव अभयारण्य में एशियाई शेरों की संख्या 525 से भी अधिक है। 

   एशियाई शेरों का बढ़़ता कुनबा वैश्विक पर्यटकों को आकर्षित करता है। निकट ही मितीयाला वन्य जीव अभयारण्य भी है लेकिन गिर वन्य जीव अभयारण्य एशियाई शेरों के लिए ही खास तौर से जाना पहचाना जाता है।

   सिंह दर्शन के लिए गिर वन्य जीव अभयारण्य खास तौर से जाना पहचाना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो विश्व में एशियाई शेरों की आबादी लगातार कम होने की चिंता ने इस विशाल वन्य जीव अभयारण्य को अस्तित्व दिया था। 

   इस क्षेत्र को एशियाई शेरों का संरक्षण क्षेत्र घोषित किया गया। विशेषज्ञों की मानेंं तो विश्व में अफ्रीका के बाद गिर में ही सर्वाधिक एशियाई शेरों की आबादी है। गिर के जंगलों को बाकायदा वर्ष 1969 में गिर वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया। 

  हालांकि इसकी विधिवत स्थापना वर्ष 1965 में हुयी। विशेषज्ञों की मानें तो गिर का इतिहास 100 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। गिर के जंगलों में एशियाई शेरों की आबादी पर संकट देख कर जूनागढ़ के नवाब ने शेरों के शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया था।

  वर्ष 1913 में गिर के जंगलों में एशियाई शेरों की संख्या 20 थी। संरक्षण मिलने से अब एशियाई शेरों का कुनबा 525 का आकंड़ा पार कर गया। वन्य जीवों के लिए गिर वन्य जीव अभयारण्य को एक आदर्श उद्यान के तौर पर देखा जाता है। 

  चौतरफा एक शांति एवं सुरम्यता इस शानदार एवं सुन्दर अभयारण्य की शान एवं शोभा है। खूबसूरत वातावरण एवं स्थलाकृति गिर वन्य जीव अभयारण्य को काफी कुछ विशेष बना देती है। 
  गिर वन्य जीव अभयारण्य को गिर नेशनल पार्क, सासन गिर एवं गिर वन के रूप में जाना पहचाना जाता है। सू्खे पताड़ वाले वृक्षों, कांटेदार झाड़ियों, हरे-भरे वन क्षेत्र से आच्छादित गिर वन्य जीव अभयारण्य पर्यावरण की दृष्टि से अति समृद्ध है। 

   मूलत: एशियाई शेरों के घर के तौर पर विख्यात गिर वन्य जीव अभयारण्य आैषधीय वनस्पतियों का भण्डारण क्षेत्र भी है। सागवान, शीशम, बबूल, बेर, जामुन एवं वन सम्पदाओं की प्रचुरता वाला गिर वन्य जीव अभयारण्य पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केन्द्र है। 

  गिर वन्य जीव अभयारण्य भले ही एशियाई शेरों का आशियाना हो लेकिन यहां हिरन, सांभर, चीतल, नीलगाय, चिंकारा, बारहसिंगा आदि कुलांचे भरते देखे जा सकते हैं।
  वन्य जीवन का खिलंदड़पन पर्यटकों को एक रोमांच से भर देता है। बाघ, भालू, भेडिया सहित वन्य जीवों की असंख्य प्रजातियां गिर वन्य जीव अभयारण्य में खास तौर से आबाद हैं।

   गिर भारत का एक शानदार एवं अच्छा पक्षी अभयारण्य भी है। इस शानदार पक्षी अभयारण्य में कलगी वाला बाज, कठफोडवा, एरीओल, जंगली मैना, मैैना, पैराडाइज फ्लाईकेचर आदि इत्यादि हैं। साथ ही अधोलिया, वालडेरा, रतनधुरा एवं पीपलिया आदि इत्यादि पक्षियों का भी यह आशियाना है। 

  नदियों एवंं झीलों वाले इस इलाके में मगरमच्छों की भी विभिन्न प्रजातियां गिर वन्य जीव अभयारण्य में दर्शनीय हैं। गिर वन्य जीव अभयारण्य में एशियाई शेरोें की दर्शनीयता के लिए सफारी एवं जीप की सवारी करनी चाहिए। गिर वन्य जीव अभयारण्य में प्रवेश के लिए आवश्यक है कि पर्यटकों के पास भ्रमण के आवश्यक इंतजाम हों। निश्चय ही गिर वन्य जीव अभयारण्य पर्यटकों को एक खास रोमांच का एहसास कराता है।

   गिर वन्य जीव अभयारण्य की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट राजकोट एवं अहमदाबाद एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन जूनागढ़ जंक्शन एवं वेरावल जंक्शन हैं। पर्यटक सड़़क मार्ग से भी गिर वन्य जीव अभयारण्य की यात्रा कर सकते हैं।
21.091840,70.836320

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