रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान : वन्य जीवन का रोमांच
रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान को वन्य जीवों की अद्भुत दुनिया कहा जाना चाहिए। इसे बाघों का आशियाना भी कहा जा सकता है।
जलीय पक्षियोंं की तीन सौ से अधिक प्रजातियां रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान की विशिष्टता को काफी कुछ अलग बना देती हैं। भारत के राजस्थान के दक्षिणी जिला सवाई माधोपुर के इस दिव्य-भव्य एवं विशाल अभयारण्य में आैषधीय वनस्पतियों का विशेष भण्डारण है।
रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान उत्तर भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है। खास यह कि वर्ष 1973 में इस विशाल अभयारण्य को रणथम्भोर टाइगर रिजर्व के तौर पर घोषित किया गया है। करीब 1113.364 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैला रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए खास प्रसिद्ध है।
रणथम्भोर टाइगर रिजर्र्व घोषित होने के बाद वर्ष 1980 में इसका एक बड़ा हिस्सा करीब 392 वर्ग किलोमीटर राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित किया गया।
खास यह कि रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान मानसिंह अभयारण्य एवं कैला देवी अभयारण्य से घिरा हुआ है। खास यह कि रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान आैषधीय वनस्पतियोें की अति समृद्धता रखता है तो वहीं बाघों की वंश परम्परा भी अति समृद्धशाली दिखती है।
रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान की वनस्पतियों की समृद्धता का सहज अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि यहां आैषधीय पौधों की 300 से अधिक प्रजातियां पुष्पित एवं पल्लवित हैं। वनस्पतियों एवं फूलों की सुगंध से रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान का वातावरण महकता रहता है।
पर्यटक जीप सफारी की सवारी कर रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान के रोमांचक सफर का एहसास कर सकते हैं। बाघ चूंकि एकांत प्रिय होता है। लिहाजा सघन वन क्षेत्र में बाघ को आसानी से देेखा जा सकता है। खास यह कि रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान एक आभासी द्वीप की भांति एहसास कराता है।
बाघ के अलावा रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान में वन्य जीवों की एक लम्बी श्रंखला पर्यटकों को रोमांचक एहसास कराती है। इनमें खास तौर से तेंदुआ, भालू, लकडबग्गा, जंगली बिल्ली, मछली पकड़ने वाली बिल्ली, कैराकल, लोमड़ी, मगरमच्छ, सांभर, हिरन, नीलगाय, चिंकारा एवं जेब्राा आदि इत्यादि हैं।
खास यह कि प्रकृति प्रेमियों के लिए रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान किसी स्वर्ग से कम नहीं है। खास तौर से फोटोग्राफर्स के लिए तो अद्भुत एवं विलक्षण है। जिससे शाही वन्य जीवों को फोटोग्राफर्स कैमरे में कैद कर सकें।
जीप सफारी से पर्यटक सघन वन क्षेत्र, वनस्पतियों से आच्छादित वन क्षेत्र, मखमली घास के खुले एवं विशाल मैदानों एवं स्मारक अवशेष का भी पर्यटक आनन्द ले सकते हैं।
खास तौर से पर्यटक रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान में रॉयल बंगाल टाइगर की शानदार झलक पा सकते हैं। निश्चय ही रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा कर पर्यटक रोमांचक एहसास का अनुभव बनाये रख सकते हैं।
बाघ शावकों का खिलंदड़पन पर्यटकों को बरबस आकर्षित करता है। शावकों का बाघिन के पीछे-पीछे जाना बेहद आकर्षक प्रतीत होता है। झीलों-झरनों में तैरना बाघ वंश का खास शौक होता है।
लिहाजा बाघों को जलक्रीड़ा करते भी पर्यटक देख सकते हैं। आशय यह कि रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान पर्यटकों को एक रोमांचक एहसास कराता है।
रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट सांगानेर एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन सवाई माधोपुर जंक्शन है। पर्यटक सड़़क मार्ग से भी रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा कर सकते हैं।
26.016540,76.363150
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