मानस राष्ट्रीय उद्यान: विश्व धरोहर
मानस राष्ट्रीय उद्यान को जीव जन्तुओं के लिए अति संरक्षित क्षेत्र कहा जाना चाहिए। जी हां, मानस राष्ट्रीय उद्यान का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है।
खास यह कि मानस राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया है। इसे वर्ष 1985 में विश्व धरोहर घोषित किया गया था।
हिमालय की तलहटी में स्थित यह सुन्दर एवं शानदार अभयारण्य वैश्विक ख्याति रखता है। भारत के असम का यह वन्य जीव अभयारण्य भूटान के रॉयल मानस राष्ट्रीय उद्यान तक फैला है।
खास यह कि बाघ एवं हाथियों के लिए संरक्षित क्षेत्र है। विशेषज्ञों की मानेें तो मानस राष्ट्रीय उद्यान दुर्लभ एवं लुप्त प्राय वन्य जीवों का संरक्षित क्षेत्र है। इनमें खास तौर से असम छत वाले कछुये, हेपीड खरगोश, सुनहरे लंगूर आदि इत्यादि हैं। गैंडा एवं बाराहसिंगा यहां खास तौर से पाये जाते हैं।
करीब 950 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैला मानस राष्ट्रीय उद्यान का प्राकृतिक सौन्दर्य भी पर्यटकों को आकर्षित करता है। सामान्यत: मानस राष्ट्रीय उद्यान जंगली भैंसों के लिए जाना पहचाना जाता है। इस शानदार एवं सुन्दर उद्यान का नाम मानस नदी के नाम पर रखा गया है।
मनसा वस्तुत: सर्पों की देवी की मान्यता रखती हैं। लिहाजा नदी एवं यह राष्ट्रीय उद्यान मनसा देवी के नाम पर हैं। मानस को वन्य जीव अभयारण्य घोषित किये जाने के बाद वर्ष 1973 में मानस बायो रिजर्व की गयी थी।
विशेषज्ञों की मानें तो वन्य जीव अभयारण्य घोषित किये जाने से पहले मानस आरक्षित सघन वन क्षेत्र था। राजसी शासनकाल में इसे राजसी शिकारगाह का दर्जा हासिल था। कूच बिहार का शाही परिवार एवं गौरीपुर का राजघराना इस शिकारगाह में शिकार करते थे।
विशेषज्ञों की मानें तो यह उद्यान 56 से अधिक गांवों से घिरा है। इसकी पश्चिमी सीमा पनबारी से ताल्लुक रखती है। केन्द्रीय सीमा बारपेटा रोड़ को छूती है। पूर्वी सीमा पाथस्ला के निकट भुर्इंयापुर में स्थित है। इस उद्यान का विहंगम दृश्य पर्यटकों को मुग्ध करता है। मानस राष्ट्रीय उद्यान के पश्चिमी इलाके में मानस नदी प्रवाहमान है।
अभयारण्य क्षेत्र की यह मुख्य नदी है। पर्यटक मानस नदी में नौका विहार एंव जलक्रीड़ा का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। वस्तुत: मानस नदी ब्राह्मपुत्र की सहायक नदी है। मानस नदी वस्तुत: भारत एवं भूटान को विभाजित करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय सीमा के तौर पर कार्य करती है।
इस दिव्य-भव्य वन्य जीव अभयारण्य में भारतीय हाथी, एक सींग वाला गैंडा, गौरा, एशियाई जल भैंसा, बाराहसिंगा, भारतीय बाघ, भारतीय तेंदुआ, एशियाई स्वर्ण बिल्ली, टोपी वाला लंगूर, स्वर्ण लंगूर, सांभर, हिरण, चीतल, बड़ी गिलहरी आदि इत्यादि वन्य जीव इस अभयारण्य की शान एवं शोभा हैं।
आैषधीय वनस्पतियों की प्रचुरता इस अभयारण्य को काफी कुछ खास बना देती है। आैषधीय वनस्पतियां वायु मण्डल को शुद्ध एवं ताजगी से युक्त रखती हैं। जिससे पर्यटक खुद को तरोताजा होने का एहसास करते हैं। जैव विविधिता की दृष्टि से मानस राष्ट्रीय उद्यान अति समृद्ध है।
विशेषज्ञों की मानें तो मानस राष्ट्रीय उद्यान जैव विविधिता में दुनिया केे अति समृद्ध उद्यानों में से एक है। इस शानदार अभयारण्य में स्तनधारी जीवों की 55 से अधिक प्रजातियां संरक्षित हैं।
पक्षियों की 380 से अधिक प्रजातियां इस शानदार उद्यान की शोभा हैं। इनके अलावा वन्य जीवों की असंख्य प्रजातियां भी इस अभयारण्य में आश्रय पाती हैं। मानस राष्ट्रीय उद्यान का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकोंं को मुग्ध कर लेता है।
मानस राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट लोकप्रिय गोपीनाथ बारदोलाई इण्टरनेशनल एयरपोर्ट गुवाहाटी है। निकटतम रेलवे स्टेशन बारपेटा रोड जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी मानस राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा कर सकते हैं।
26.727630,90.995403
26.727630,90.995403












No comments:
Post a Comment