Wednesday, 19 June 2019

एलोरा गुफाएं: विलक्षण सौन्दर्य

   एलोरा गुफाओं की संरचना को अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए। इन गुफाओं की नक्काशी एवं पच्चीकारी पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। 

   एलोरा गुफाओं का यह स्मारक देश दुनिया में खास ख्याति रखता है। भारत के महाराष्ट्र के आैरंगाबाद का एलोरा गुफाओं का यह शानदार स्मारक विश्व में प्रसिद्ध है। विशिष्टताओं के कारण ही इसे यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है।

  खास यह कि एलोरा गुफाएं भारतीय पाषाण शिल्प स्थापत्य कला का शानदार दर्शन है। विशेषज्ञों की मानें तो इसका वास्तविक नाम वेरुल है। इस पुरातात्विक स्मारक की सुन्दरता अति दर्शनीय है। 

  एलोरा गुफाओं के इस समूह में 34 शानदार एवं दर्शनीय गुफाएं हैं। इसे चरणाद्रि पर्वत का फलक क्षेत्र माना जाता है। इस शानदार संरचना में हिन्दू, बौद्ध एवं जैन मंदिर एवंं गुफाएं हैं।

   विशेषज्ञों की मानें तो एलोरा में 12 बौद्ध, 17 हिन्दू एवं 5 जैन गुफाएं संरचित हैं। यह सभी गुफाएं एक दूसरे के सन्निकट हैं। एलोरा गुफाओं की यह संरचना धार्मिक सौहाद्र्र को भी प्रदर्शित करती है। मठ एवं मंदिरों की यह श्रंखला करीब दो वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली है। 

   बेसाल्ट की खड़ी चट्टान को काट कर बनायी गयी एलोरा गुफाओं का यह समूह वैश्विक पर्यटकों की खास पसंदीदा है। दुर्गम पहाड़ियों का यह क्षेत्र भारतीय प्राचीन सभ्यता का जीवंत प्रदर्शन है।

   बौद्ध, हिन्दू एवं जैन धर्म को समर्पित एलोरा गुफाएं शिल्प देवता विश्वकर्मा को समर्पित हैं। इस संरचना का सर्वोच्च एवं श्रेष्ठ अलंकरण कैलाश मंदिर है। इसका निर्माण राष्ट्रकूट शासक ने कराया था। एलोरा गुफाओं की इस संरचना में मूर्ति शिल्प की एक शानदार श्रंखला विद्यमान है। 

  इन मूर्तियों में कहीं जोश दर्शित है तो वहीं कहीं भावनाओं का प्रवाह दिखता है। शिल्पकला एवं चित्रकला की इस शानदार संरचना की विलक्षणता पर्यटकों को मुग्ध करती है।

   बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म की तराशी मूर्तियां गुफा की शोभा एवं शान हैं। इनमें शांति एवं आध्यात्म की शानदार झलक मिलती है। पर्वत श्रंखला पर पच्चीकारी का कलात्मक अंकन पर्यटकों को लुभाता है। 
  पूजा कक्ष, मठ-विहार, हिन्दुओं के विभिन्न संस्कारों को दर्शित किया गया है। कैलाश मंदिर की नक्काशी एवं पच्चीकारी पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। मंदिर की कलात्मकता श्रेेष्ठतम आयाम को स्पर्श करती है।

   विशेषज्ञों की मानें तो मंदिर की प्रतिमा एक ही शिलाखण्ड पर संरचित दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा है। सीढ़ियां, दरवाजे, खिड़कियां आदि इत्यादि बहुत कुछ दर्शनीयता को बढ़ाते हैं। भगवान विष्णु की शानदार प्रतिमा कलात्मकता का एक अति सुन्दर आयाम है।


   राक्षस से देव युद्ध, मनुष्य का शेर में परिवर्तित होना बेहद सजीव प्रतीत होते हैं। नन्दी का स्मारक बेहद आकर्षक लगता है। प्रवेश द्वार एवं दिव्य-भव्य आंगन की शान एवं शोभा निराली है।
  हाथियों का झुण्ड, शेर वंश सहित अन्य वन्य जीवों की एक लम्बी श्रंखला एलोरा गुफाओें में दर्शित हैं। दीवारों पर पौराणिक कथानकों का शानदार दृश्यांकन है।

   इनमें कलात्मकता का विशेष दर्शन होता है। रावण का शक्ति प्रदर्शन पर्यटकों को रोमांचित करता है। कमल के फूलों का शानदार सृजन कलात्मकता को स्वत: बयां करता है। आभूषण की सुन्दर सजावट भी बेहतरीन है। एलोरा गुफाएं खास तौर से अपने सौन्दर्य शास्त्र से पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।

   एलोरा गुफाओं की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट आैरंगाबाद एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन आैरंगाबाद जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी एलोरा गुफाओं की यात्रा कर सकतेे हैं।
19.876165,75.343315

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