अजंता गुफाएं: आश्चर्यजनक वास्तुशिल्प
अजंता गुफाओं का वास्तुशिल्प आश्चर्यजनक एवं अति सुन्दर कहा जाना चाहिए। वास्तुशिल्प की यह सुन्दर संरचना वस्तुत: भारत की अति समृद्ध विरासत है।
इस अद्भुत एवं विलक्षण वास्तुशिल्प को वैश्विक स्तर पर सराहना मिलती है। भारत के महाराष्ट्र के जिला आैरंगाबाद स्थित यह भारतीय विरासत वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है। खास यह कि अजंता गुफाओं को विश्व विरासत के तौर पर मान्यता है।
इस अद्भुत एवं विलक्षण वास्तुशिल्प को वैश्विक स्तर पर सराहना मिलती है। भारत के महाराष्ट्र के जिला आैरंगाबाद स्थित यह भारतीय विरासत वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है। खास यह कि अजंता गुफाओं को विश्व विरासत के तौर पर मान्यता है।
यूनेस्को ने इसे विश्व विरासत का दर्जा प्रदान किया है। अजंता गुफाओं को वैश्विक विरासत का यह खिताब वर्ष 1983 में मिला। करीब 29 विशाल शिलाखण्ड को काट कर बौद्ध स्मारक गुफाओं की संरचना की गयी है। खास यह कि अजंता गुफाओं के इस शानदार स्मारक के शिल्प एवं चित्रण में बौद्ध धर्म का रेखांकन मिलता है।
आैरंंगाबाद में यह संरचनाएं अजंता गांव के निकट स्थित हैं। अजंता गांव से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित अजंता गुफाओं में खास तौर से बौद्ध धर्म, मंदिर, देवी-देवताओं का चित्रण, हिन्दू राजाओं का शासन, आश्रय व्यवस्था आदि इत्यादि बहुत कुछ दर्शनीय है।
खास यह कि इन गुफाओं का आकार-प्रकार घोड़े की नाल जैसा है। गुफाओं का विहंगम दृश्य पर्यटकों को मुग्ध कर लेता है। सघन वन क्षेत्र से घिरी अजंता गुफाएं आैरंगाबाद से करीब 106 किलोमीटर दूर हैं। जलगांव से करीब 60 किलोमीटर एवं भुसावल से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित यह गुफाएं सौन्दर्य शास्त्र की अनुपम गाथा हैं।
खास यह कि इस शानदार घाटी की तलहटी में धारा बाघूर बहती है। विशेषज्ञों की मानें तो यहां कुल 29 गुफाएं विद्यमान हैं। अजंता गुफाओं का यह समूह वस्तुत: आवासीय मठ जैसा है।
विशेषज्ञों की मानें तो अजंता गुफाओं की अंतिम गुफा की खोज वर्ष 1956 के आसपास की गयी थी। इस खनन में बौद्ध स्तूप एवं मठ आदि की खोज हुयी थी। आंग्ल-भारतीय की दृष्टि में अजंता गुफाएं वस्तुत: अभिव्यंजन गुफा एवं मंदिर हैं।
अजंता एक प्रकार का महाविद्यालय मठ था। गुफाओं का नक्काशी कार्य अति दर्शनीय एवं अद्भुत है। भगवान बुद्ध अपनी धर्म-चक्र-प्रवर्तन मुद्रा में विराजमान दर्शित हैं। दीवारों के साथ एक शानदार गलियारा भी शोभा को बढ़ाता है। दर एवं दीवार नक्काशी एवं चित्रांकन से परिपूरित है।
महाकक्ष की प्रत्येक दीवार करीब 40 फुट लम्बी आैर 20 फुट ऊंची है। दर्शित दृश्यों में अधिकतर उपदेशों, धार्मिक अलंकरण से आच्छादित हैं। अधिसंख्य चित्रांकन जातक कथाओं एवं गौतम बुद्ध के जीवन पर आधारित हैं। फलकों की नक्काशी कहीं अधिक शानदार एवं सुन्दर है।
नक्काशी की गहनता अति दर्शनीय है। अधिसंख्य मूर्तियां सजीव प्रतीत होती हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे मूर्तियां अभी बोल उठेंगी। द्वार के दोनों ओर वर्गाकार खिड़कियां अति शोभायमान हैं।
खास यह कि बौद्ध धर्म एवं आस्था का प्रवाह इन अजंता गुफाओं मेें दर्शित है। विशेषज्ञों की मानें तो अजंता गुफाओं की यह संरचना शिक्षक एवं छात्र समूह की सक्रियता को दर्शाता है।
माना जाता है कि वाकाटक राजा हरिसेना इस उत्तम संरचना अर्थात अजंता गुफा के संरक्षक रहे थे। अजंता गुफाओं का वास्तुशिल्प एवं संरचना अति शानदार एवं सुन्दर है। लिहाजा इन संरचनाओं को वैश्विक ख्याति है। खास यह कि अजंता गुफाओं का यह समूह वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा है।
अजंता गुफाओं की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट आैरंगाबाद एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन आैरंगाबाद जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी अजंता गुफाओं की यात्रा कर सकते हैं।
20.552450,75.699531
20.552450,75.699531












No comments:
Post a Comment