सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान: सुन्दर एवं विलक्षण
सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान को वन्य जीवोंं का शानदार आशियाना कहा जाना चाहिए। जी हां, खास तौर से विलुप्त वन्य जीवों का यह संरक्षण क्षेत्र है।
भारत के राजस्थान के अलवर जिला स्थित सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। अरावली पर्वत माला के मध्य स्थित सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान भारत के चुनिंदा एवं प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है।
करीब 866 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले इस राष्ट्रीय उद्यान की विधिवत स्थापना वर्ष 1955 में की गयी थी। सरिस्का अलवर राज परिवार का यह शिकारगाह था। लिहाजा कभी इसे राजसी शिकारगाह के तौर पर जाना पहचाना जाता था।
अलवर के महाराजा ने सरिस्का में एक भव्य-दिव्य राजमहल का निर्माण कराया था। इस शानदार अभयारण्य के मध्य में स्थित राजमहल बेहद रोमांचक प्रतीत होता है।
हालांकि अब इसे शानदार होटल में परिवर्तित कर दिया गया है। इस होटल में रह कर पर्यटक वन्य जीवों की रोमांचक अनुभूति कर सकते हैं। इस शानदार राजमहल के सामने विशाल जलाशय हैं।
इस जलाशय में वन्य जीवों की अठखेलियां पर्यटकों को खास तौर से रोमांचित करती हैं। विशेषज्ञों की मानें तो वर्ष 1955 में इसे वन्य जीव आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था।
वन्य जीवन की विविधिता एवं महत्व को देखते हुए सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष 1978 में बाघ परियोजना अभयारण्य घोषित किया गया। जयपुर से करीब 107 किलोमीटर दूर एवं दिल्ली से करीब 200 किलोमीटर दूर स्थित सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान अति दर्शनीय एवं रोमांचक है।
वस्तुत: इसे सरिस्का बाघ अभयारण्य कहा जाना चाहिए। हालांकि इस शानदार अभयारण्य में बाघ के अलावा चीता, तेंदुआ, जंगली बिल्ली, कैरकल, धारीदार बिज्जू, सियार स्वर्ण, चीतल, सांभर, नीलगाय, चिंकारा, चार सींग वाला मृग, जंगली सुअर, जंगली भैंसा, खरगोश एवं लंगूर आदि इत्यादि सहित अंसख्य वन्य जीव प्रजातियां इस अभयारण्य में पर्यटकों को रोमांचित करती हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो वर्ष 2008 में सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान में बाघ पुर्नवास कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया। इसके बाघ वंश में काफी तेजी से वृद्धि हुई। बंजर एवं रेगिस्तान की मिली जुली भूमि वाला यह शानदार अभयारण्य वन्य जीवों के किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
आैषधीय वनस्पतियों एवंं पर्यावरणीय वृक्ष श्रंखला से समृद्ध यह उद्यान विभिन्न आकार एवं प्रकार के वन्य जीवों को संरक्षण देता है। विशेषज्ञों की मानें तो इस विशाल उद्यान में कई मंदिर एवं पौराणिक स्थल भी विद्यमान हैं।
हालांकि अब इनके अवशेष ही दिखते हैं। इस प्रकार इसे धरोहर का क्षेत्र भी कह सकते हैं। ऐतिहासिक कनकवाड़ी किला भी सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान में ही स्थित है। फोटोग्राफर्स के लिए सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान धरती पर स्वर्ग के समान है।
विशेषज्ञों की मानें तो 1982 में इसे नेशनल पार्क का दर्जा दिया गया था। पर्यटक सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान में जंगल सफारी का भी भरपूर आनन्द ले सकते हैं।
पर्यटकों को खास तौर से सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा अक्टूबर से मार्च की अवधि में करना चाहिए। इस दौरान वन्य जीवों एवं पक्षियों की दर्शनीयता बेेहतरीन रहती है।
सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैंं। निकटतम एयरपोर्ट सांगानेर एयरपोर्ट जयपुर है। निकटतम रेलवे स्टेशन अलवर जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा कर सकते हैं।
27.367500,76.400700
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