Wednesday, 28 November 2018

पुराना किला: प्राचीन वास्तुशिल्प

   प्राचीन वास्तुशिल्प देखना हो तो दिल्ली का पुराना किला अवश्य घूमना-देखना चाहिए। जी हां, पुराना किला का शानदार एवं विलक्षण वास्तुशिल्प पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है। 

   नई दिल्ली के मथुरा रोड़ स्थित पुराना किला को इन्द्रप्रस्थ भी कहते हैं। कभी इस प्राचीन किला को शहर की पहचान माना जाता था। 
  विशेषज्ञों की मानें तो पुराना किला दिल्ली के पुराने किलों में से एक है। माना जाता है कि इस किला का निर्माण हुमांयू एवं अफगान शेर शाह ने कराया था। 

   पुरातात्विक खुदाई में इस किला परिसर में ईसा पूर्व एवं मौर्य काल के भी संकेत मिले हैं। देश की राजधानी को नया आयाम आकार देने के लिए 1920 में एडविन लुटियंस ने डिजाइन किया तो पुराना किला को केन्द्रीयता में शामिल किया था।

   इस भव्य-दिव्य किला की दर-ओ-दीवार की सुन्दरता एवं विशेषता देखते ही बनती है। किला की मुख्य दीवार करीब 18 मीटर ऊंची है। करीब 1.50 किलोमीटर लम्बी है। इसमें तीन मेहराबदार द्वार हैं। पश्चिम का दरवाजा बड़ा दरवाजा कहलाता है। दक्षिणी दरवाजा को हुमांयू दरवाजा कहा जाता है।
   विशेषज्ञों की मानें तो इस दरवाजा का निर्माण हुमांयू ने कराया था। इस स्थान से हुमांयू का मकबरा भी स्पष्ट तौर पर दिखता है। सबसे आखिरी दरवाजा को तलाकी दरवाजा कहा जाता है।

    इसे वर्जित गेट भी कहा जाता है। सभी दरवाजा दो मंजिला हैं। दरवाजा सहित किला का निर्माण लाल बलुआ पत्थरों से किया गया है। किला के कंगुरा एवं बुर्ज दर्शनीय है। इस पौराणिक किला में लाल बलुआ पत्थरों से साथ ही सफेद एवं रंगीन संगमरमर का उपयोग किया गया है। 

   नीले रंग के टाइल्स किला की दिव्यता-भव्यता को आैर भी बढ़ाते हैं। किला परिसर में सुन्दर मस्जिद भी है। इसे किला ए कुहना मस्जिद कहा जाता है। यह मुगल संरचना का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। 

   खास यह कि इसके मेहराब घुमावदार घोड़े की नाल की आकार प्रकार के हैं। इसे सुल्तान एवं उनके दरबारियों के लिए तैयार किया गया था। खास यह कि इस बुलंद किला में मुगल वास्तुशिल्प के साथ ही राजस्थानी वास्तुकला की खास झलक मिलती है।

   पुराना किला बड़े-बड़े घास के मैदानों से सुसज्जित है। मखमली घास पर्यटकों को खास तौर से आकर्षित करती है। शाही परिवार की आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर विशेष निर्माण किये गये। 

  किला से बाहर देखने के लिए विशेष झरोखे भी हैं। हम्माम में निर्माण की प्राचीनता अवलोकित होती है। वस्तुत: पुराना किला एक शासकीय संरक्षित इमारत है। 

   हुमांयू का निजी पुस्तकालय भी अपनी एक अलग दशा एवं दिशा रखता है। इसे शेर मंडल कहा जाता है। खास यह कि किला में छत तक पहंुचने के लिए विशेष सीढ़ियों का निर्माण है। पुराना किला परिसर में संग्रहालय भी अति दर्शनीय है। 

   प्राचीन बर्तन, दैनिक उपयोग की वस्तुओं से लेकर अस्त्र-शस्त्र भी प्रदर्शित हैं। खगोलीय अध्ययन के लिए किला में एक लघु वेधशाला भी है। खास यह कि पुराना किला परिसर में संाझ होने पर लाइट एवं साउण्ड आधारित एक विशेष प्रदर्शन किया जाता है।

   इसमें पुराना किला के इतिहास का वर्णन किया जाता है। इतना ही नहीं पुराना किला के बाहरी क्षेत्र में एक अन्य भव्य दिव्य स्मारक है। किला की सुरक्षा को ध्यान में रख कर झील को आयाम आकार दिया गया। जिससे किला की आन्तरिक हलचल से कोई भी दूर रह सके।

    पुराना किला की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट अंतराष्ट्रीय इन्दिरा गांधी एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन नई दिल्ली जंक्शन है। इसके साथ ही पर्यटक पुराना किला अर्थात इन्द्रप्रस्थ की यात्रा सड़क मार्ग से भी कर सकते हैं।
28.632430,77.218790

Friday, 23 November 2018

नागा विरासत गांव: समृद्ध संस्कृति

   नागा विरासत गांव की विशिष्टता एवं सुन्दरता देख कर कोई भी मुग्ध हो जाएगा। जी हां, नागालैण्ड के कोहिमा का यह विशिष्ट गांव देश दुनिया मेें खास तौर से ख्याति रखता है। 

   चमकदार एवं सदाबहार पहाड़ियों के मध्य रचा-बसा नागा विरासत गांव बेहद दर्शनीय है। लुभावने सुन्दर दृश्य से आच्छादित नागा गांव अपनी खास संस्कृति एवं परम्पराओं के लिए भी जाना पहचाना जाता है। 
  आैषधीय वनस्पतियों एवं वन्य आधारित वनस्पतियों से घिरा यह गांव एक खास चैतन्यता प्रदान करता है। 
   परिवेश ऐसा मानों फेफड़ों को पंख लग जाते हों। परम्पराओं एवं संस्कृतियों से समृद्ध नागा विरासत गांव सदैव पर्यटकों का पसंदीदा स्थान रहता है। नागालैण्ड का प्रमुख पर्यटन क्षेत्र होने के कारण देश विदेश के पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है।
    खास यह कि नागा संस्कृति एवं परम्पराओं में वन्य आधारित झलक मिलती है। नागा विरासत गांव में आवासीय संरचना पर्यटकों को विशेष तौर से आकर्षित करती है।

    यूं कहें कि नागा विरासत गांव में ईको डेवेलपमेंट का खास ख्याल रखा गया तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। आशय यह कि लकड़ी की संरचनाएं बेहद दर्शनीय एवं लोक लुभावन होती हैं। आवास में अधिसंख्य लकड़ी का उपयोग किया जाता है।

   लकड़ी की दीवार एवं लकड़ी की छत एवं बहुत कुछ डिजाइन आधारित संरचना आवास को आकर्षक बना देती हैं। लकड़ी से संरचित आवास की डिजाइन एवं नक्काशी देख कर कोई भी तारीफ कर सकता है। नक्काशी में अद्वितीय छिद्र व्यवस्था देखते ही बनती है। 

  यहां की समृद्ध संस्कृति एवं परम्पराएं एवं बोली बानी पर्यटकों को मोह लेती हैं। खास यह कि ग्रामीण परिवेश में जीवनकाल का एक विशिष्ट युग अवलोकित होता है। हालांकि नागा विरासत गांव में अत्याधुनिक संरचना से भी आवासीय निर्माण किया गया है। 

   फिर भी यहां की एक अलग ही परम्परा एवं संरचना दिखती है। आशय यह कि इस गांव को ईको विलेज कहा जा सकता है।
   नागा विरासत गांव के खाद्य सभा कक्ष, बांस एवं लकड़ी से संरचित बड़े-बड़े हाल, स्टेडियम की वृहद संरचना बेहद दर्शनीय है। नागा विरासत गांव का हॉर्नबिल महोत्सव विशेष ख्याति रखता है।

   यह विशेष गांव को विशेष आकर्षक बना देता है। गांव एवं हॉर्नबिल महोत्सव की सुन्दरता पर्यटकों को मुग्ध कर देती है।
  खास यह कि हॉर्नबिल महोत्सव की तैयारियां वर्ष पर्यन्त चलती रहती हैं। इस विशेष महोत्सव का दिसम्बर में आयोजन होता है। इस महोत्सव में शौर्य से लेकर सूर्य तक बहुत कुछ प्रदर्शित होता है। 

   इस महोत्सव में गांव के अलावा पर्यटक एवं आसपास के बाशिंदे बड़ी तादाद में जुटते हैं। स्थानीय शब्दों में हॉर्नबिल महोत्सव वस्तुत: त्योहार एवं पर्व का राजा होता है। चूंकि नागालैण्ड कृषि आधारित राज्य है। 

   लिहाजा यह महोत्सव विशेष महत्वपूर्ण हो जाता है। जनजातीय एवं अन्य समुदाय के मध्य इस हॉर्नबिल महोत्सव को अति पवित्र माना जाता है। 

   हॉर्नबिल महोत्सव के दौरान स्टेडियम की भव्यता-दिव्यता देखते ही बनती है। इस दौरान स्टेडियम में एक विशेष रोमांचक दौर दिखता है। यह एक रोमांचक अनुभव होता है। चूंकि नागालैण्ड के शीर्ष पर यह नागा विरासत गांव स्थित है।

   लिहाजा शीतलता एवं शांत वातावरण की दृष्टि से भी श्रेष्ठ रहता है। नागा विरासत गांव की यात्रा के लिए शीतकालीन सर्वाधिक पसंदीदा मौसम होता है। पर्यटक इस विरासत गांव के निकट ही जापफू चोटी का भी भ्रमण कर सकते हैं।
   यह नागालैण्ड की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है। पर्यटक बारा बस्ती में भी लोक संस्कृति का आनन्द उठा सकते हैं। इसके आसपास कई रोमांचक एवं साहसिक यात्रा के स्थान हैं।

   नागा विरासत गांव की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट दीमापुर है। दीमापुर एयरपोर्ट से नागा विरासत गांव की दूरी करीब 41 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन भी दीमापुर जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी यात्रा कर सकते हैं।
25.698810,94.097020

Wednesday, 21 November 2018

कैपिटल कॉम्प्लेक्स: सुन्दर वास्तुशिल्प

   कैपिटल कॉम्प्लेक्स को वास्तुशास्त्र का विलक्षण आयाम कहना चाहिए। जी हां, चंडीगढ़ स्थित कैपिटल कॉम्प्लेक्स की सुन्दरता एवं विशिष्टता का कोई जोड़ नहीं।

   शायद इसीलिए यूनेस्को ने कैपिटल कॉम्प्लेक्स को विश्व धरोहर घोषित किया है। वास्तु शिल्पी ले कॉर्बूसियर ने इस आधुनिक विरासत को अस्तित्व दिया। शिल्पकार ले कॉर्बूसियर ने इस आधुनिक संरचना में आवश्यकता एवं विहंगमता के पक्ष को ध्यान में रखा। 

   खास यह कि वास्तुकार ले कॉर्बूसियर ने 20 शताब्दी के पूर्वाद्र्ध में दुनिया के 17 देशों में आधुनिक एवं अद्भुत संरचनाएं प्रदान की हैं। वास्तुकार ले कॉर्बूसियर की इस संरचना ने चंडीगढ़ में एक नया आयाम दिया है।

   खास यह कि चंडीगढ़ के सेक्टर एक में स्थित इस दिव्य-भव्य परिसर में आधुनिकता का करीब-करीब हर रंग खिलता दिखता है। कैपिटल कॉम्प्लेक्स में हरियाणा एवं पंजाब उच्च न्यायालय के साथ ही हरियाणा एवं पंजाब की विधानसभा एवं सचिवालय सहित बहुत कुछ है। 

   करीब 100 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित कैपिटल कॉम्प्लेक्स वस्तुत: वास्तुकला की एक शानदार एवं प्रमुख अभियक्ति है। इसमें तीन भवन, तीन स्मारक एवं एक झील शामिल हैं। पैलेस ऑफ एसेम्बली के तौर पर विधानसभाएं हैं। 

   सचिवालय, उच्च न्यायालय, ओपेन हैण्ड स्मारक, जियोमेट्रिक हिल एवं छाया का टॉवर अति दर्शनीय हैं। श्रेष्ठताओं एवं विशिष्टताओं के कारण वर्ष 2016 में यूनेस्को ने कैपिटल काम्प्लेक्स को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। 

   वास्तुशिल्पी ले कॉर्बूसियर ने छाया टॉवर की संरचना इस प्रकार की है कि जिससे सूर्य की एक भी किरण प्रवेश न करे। इस टावर का उत्तर पक्ष खुला रहता है। कारण सूर्य की चमक इस दिशा में कभी नहीं रहती।

   वास्तुशिल्पी ने इस सिद्धांत का उपयोग कैपिटल कॉम्प्लेक्स के हर भवन में किया है। वास्तुशास्त्र के मुताबिक भी हर कोना आच्छादित है। ओपेन हैंड स्मारक मूर्तिकला का सुन्दर आयाम है। यह धातु की विशाल मूर्ति है। यह स्थल खुला शहर होने का संदेश देता है। 

   कानून-व्याख्यान स्मारक का निर्माण 1951-1957 की अवधि में किया गया था। इस संरचना में दोहरी छत का उपयोग किया गया है। चित्रित इमारत में विशाल प्रवेश द्वार शोभायमान हैं। अदालत के कमरों के पीछे का हिस्सा भी विशिष्ट है। 

   कानून निस्पादन स्मारक कैपिटल कॉम्प्लेक्स इन तीन इमारतों में सबसे बड़ा एवं लम्बा है। यह आठ मंजिला कंक्रीट स्लैब के आकार-प्रकार का दिखता है। इसके केन्द्र में मूर्तिकला का विशिष्ट अंदाज दिखता है। छत कला एवं वास्तुकला का समिश्रण है। यहां से चण्डीगढ़ शहर का शानदार दृश्य दिखता है। 

   खास यह कि हर मौसम में कैपिटल कॉम्प्लेक्स का अपना एक अलग अंदाज दिखता है। कैपिटल कॉम्प्लेक्स की सुन्दरता एवं विशिष्टता पर्यटकों को खास तौैर से आकर्षित करती है। छाया टॉवर, जियोमेट्रिक हिल एवं मार्टिर मेमोरियल विशेष हैं।
   कैपिटल कॉम्प्लेक्स चंडीगढ़ की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट चण्डीगढ़ है। निकटतम रेलवे स्टेशन चण्डीगढ़ जंक्शन है। पर्यटक इस सुन्दर वास्तुशिल्प का अवलोकन करने के लिए सड़क मार्ग से भी यात्रा कर सकते हैं।
30.697030,76.752130

Wednesday, 14 November 2018

अर्की किला: कांगड़ा शैली की संरचना

   अर्की किला को सौन्दर्य शास्त्र का एक बेहतरीन आयाम कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। अर्की किला कांगड़ा चित्रकला शैली को बेहतरीन तौर तरीके से रेखांकित करता है। 

  हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन स्थित अर्की किला अपनी आन-बान एवं शान के लिए देश दुनिया में खास तौर से जाना पहचाना जाता है। वस्तुत: अर्की सोलन का एक छोटा शहर है। 

  अर्की किला को अर्नी महल भी कहा जाता है। आधुनिकता के इस युग ने अर्की किला को अर्की पैलेस भी नाम दे दिया है। विशेषज्ञों की मानें तो राणा सभा चन्द्र के वंशज राणा पृथ्वी सिंह ने इस दिव्य-भव्य किला का निर्माण कराया था। 

  अर्की क्षेत्र कभी अर्की बागल रियासत की पर्वतीय राजधानी था। इसकी स्थापना पंवार राजपूत राणा अजय देव ने की थी। इस राज्य की स्थापना 1664 में हुई थी। अर्की को 1650 में विधिवत राजधानी घोषित किया गया था। 

   अर्की किला को किला या महल कुछ भी कहा जा सकता है। अर्की किला के दीवान खान को सुन्दरता का श्रेष्ठतम आयाम कहा जा सकता है। किला के आंतरिक क्षेत्र में कांगड़ा चित्रकला शैली की जीवंतता देखते ही बनती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चित्र जीवंत हों। 

   किला में यत्र, तत्र एवं सर्वत्र कांगड़ा चित्रकला शैली का रेखांकन दिखता है। इस सुन्दर चित्रांकन में पौराणिक कथानक, धर्म-आध्यात्म, इतिहास एवं संस्कृति को दर्शाने वाला रूपांकन है। यहां सिख मुगल लड़ाई को रेखांकित किया गया है।

   इस अति समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन करने के लिए देश विदेश के पर्यटक निरन्तर आते रहते हैं। अर्की किला एवं उसके आसपास सदैव मौसम सुहावना रहता है।
   अर्की के शानदार मैदान एवं अर्की पहाड़ियां सुन्दरता का श्रेष्ठतम आयाम हैं। शांत एवं शीतलता से आच्छादित परिवेश पर्यटकों को एक विशिष्ट ऊर्जा प्रदान करता है। जीवंतता एवं आक्सीजन से लबरेज अर्की क्षेत्र पर्यटकों को आकर्षित करता है।

   समुद्र तल से करीब 4100 फुट की ऊंचाई पर स्थित अर्की किला का अपना एक गौरवशाली इतिहास है। अर्की किला के चौतरफा वनस्पतियों की सुगंध परिवेश को आैर भी सुखद बनाती है। 

   आकाश एवं पर्वत श्रंखलाओं से घिरा अर्की किला पौराणिकता की दास्तां स्वयं बयां करता है। सुन्दर वास्तुकला एवं आकर्षक संरचना किला की शान है।  
  अर्की किला की स्थापत्य कला में मुगल एवं राजपूताना शैली का मिश्रण दिखता है। साथ ही राजस्थान शैली का भी प्रभाव अपना अलग अस्तित्व प्रदर्शित करता है। 

   चूंकि अर्की की राजस्थान एवं पंजाब से निकटता है। लिहाजा पंजाब की जीवन शैली से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। आशय यह कि अर्की किला विलक्षणता का खास आयाम है। 

   जिसमें एक साथ स्थापत्य कला की कई शैलियां प्रतिबिंबित होती हैं। खास यह कि अति प्राचीन होने के बावजूद चित्रांकन का रंग संयोजन अभी भी यथावत दिखता है।
   मूल रंग संयोजन की चमक अभी भी बरकरार है। सुरम्य पहाड़ियों के मध्य रचा-बसा अर्की किला अपने शानदार वैभव से पर्यटकों को आकर्षित करता है। 

  खास यह कि अर्की किला के आसपास आकर्षक स्थानों की एक लम्बी श्रंखला है। इनमें खास तौर से दुर्गा मंदिर, शांखनी महादेव मंदिर, लूत्र महादेव मंदिर, धुंडन, बनिया देवी, शिव गुफा, देवधर मंदिर आदि इत्यादि हैं।
   अर्की के चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की आभा आलोकित होती है। घना वन क्षेत्र एवं वनस्पतियों की प्रचुरता इस इलाके को कुछ खास बना देती है। शिमला से करीब 38 किलोमीटर दूर स्थित अर्की किला पौराणिकता के कारण दूर-दूर तक ख्याति रखता है।

   अर्की किला की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट शिमला है। शिमला एयरपोर्ट से अर्की किला की दूरी करीब 40 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन भी शिमला है। पर्यटक अर्की किला की यात्रा सड़क मार्ग से भी कर सकते हैं।
31.154700,76.969000

Tuesday, 6 November 2018

मार्बल पैलेस: सुन्दर वास्तुशिल्प

    मार्बल पैलेस की खूबसूरती किसी जादू से कम नहीं। जी हां, मार्बल पैलेस वस्तुत: एक भव्य-दिव्य संग्रहालय है। इसकी खूबसूरती देश दुनिया के पर्यटकों को बरबस आकर्षित करती है।

   विशिष्टता के कारण पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित इस मार्बल पैलेस की ख्याति विश्व में है। मार्बल पैलेस कोलकाता के खास एवं महत्वपूर्ण संग्रहालय मेें शीर्ष पर गिना जाता है। वास्तविकता में मार्बल पैलेस सफेद संगरमरमर का एक शानदार किला है। जिसकी खूबसूरती दुनिया को मोह लेती है।

   इस भव्य-दिव्य किला का निर्माण राजा राजेन्द्र मलिक ने वर्ष 1800 में कराया था। खास यह कि मार्बल पैलेस को भारत की शीर्ष संरचनाओं में गिना जाता है। 

   मार्बल पैलेस कलात्मकता का सुन्दर आयाम है। इस संग्रहालय में पश्चिमी मूर्ति कला, विक्टोरियन फर्नीचर, चित्राकंन आदि इत्यादि मुग्ध करने वाला बहुत कुछ है। 

   मार्बल पैलेस का निर्माण नियो क्लासिकल वास्तु शैली पर आधारित है। यहां के खुले आंगन बंगाल की परम्पराओं को रेखांकित करते हैं। आंगन के बगल में पूजा घर भी है। यहां प्रदर्शित चित्रांकन भारत एवं यूरोपियन कलाकारों का कलाक्रम है।

    इस कलाक्रम में शुक्र एवं कामदेव की छवि भी प्रदर्शित है। सजावटी वस्तुओं में झूमर, घड़ियां, छत के दर्पण आदि हैं। यह सब अति दर्शनीय हैं। मार्बल पैलेस के परिसर में विशाल लॉन, रॉक गार्डेन, झील, चिड़ियाघर, बाग-बगीचा भी हैं। इसे 19 वीं शताब्दी की उदारवादी हवेली भी कहा जाता है।

   यह सर्वश्रेष्ठ एवं संरक्षित हवेलियों में से एक है। संगमरमर की दीवारें एवं मूर्ति शिल्प पर्यटकों को आकर्षित करता है। चिड़ियाघर में हिरन सहित अन्य वन्य जीवन का कोलाहल देखने को मिलेगा। मार्बल पैलेस में बंगाल की प्राचीन संस्कृतियों एवं परम्पराओं की झलक दिखेगी।

   खास यह कि मार्बल पैलेस को कोलकाता की शान भी कहते हैं। मार्बल पैलेस में प्रवेश करते ही बाग-बगीचा देख कर मन मस्तिष्क प्रफुल्लित हो उठता है। संगमरमर की शानदार संरचना पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। इसका नाम इसके स्वरूप पर आधारित है। 

   कारण चौतरफा मार्बल का उपयोग किया गया है। लिहाजा इसे मार्बल पैलेस के नाम से ही ख्याति मिली। मार्बल पैलेस के परिसर कही शेर की मूर्ति आकर्षित करती है तो कहीं विक्टोरियन संरचना है। आंतरिक क्षेत्र में विक्टोरियन फर्नीचर की प्रभावशाली संरचना कोलकाता का गौरवशाली अतीत से वाकिफ कराती है। 

  शीशमहल की छत विस्मयकारी है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे किसी स्वप्नलोक में हों। विशेषज्ञों की मानें तो मार्बल पैलेस कोलकाता का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। मार्बल पैलेस मुक्ताराम बाबू स्ट्रीट में स्थित है। 

   भारतीय एवं पश्चिमी हस्त कला का सुन्दर आयाम है। इस पैलेस की समृद्धता देखते ही बनती है। यहां के सुन्दर झूमर, यूरोपियन एंटीक, वेनेटियन ग्लास, पुराने पियानो एवं चीनी मिट्टी के नीले गुलदान बेहद दर्शनीय हैं।

   यह सब अमीरों की जीवन शैली को दर्शाते हैं। आशय यह कि मार्बल पैलेस कोलकाता की शान है। जिससे देश विदेश के पर्यटक खींचे चले आते हैं। सुन्दरता लाजवाब है।

   मार्बल पैलेस की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट नेता जी सुभाष चन्द्र बोस एयरपोर्ट कोलकाता है। निकटतम रेलवे स्टेशन हावड़ा जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी मार्बल पैलेस की यात्रा कर सकते हैं।
22.579750,88.360700

शांति निकेतन: सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर    शांति निकेतन को आध्यात्मिक धरोहर कहा जाना चाहिए। जी हां, शांति निकेतन संस्कृति, परम्परा...