Wednesday, 14 November 2018

अर्की किला: कांगड़ा शैली की संरचना

   अर्की किला को सौन्दर्य शास्त्र का एक बेहतरीन आयाम कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। अर्की किला कांगड़ा चित्रकला शैली को बेहतरीन तौर तरीके से रेखांकित करता है। 

  हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन स्थित अर्की किला अपनी आन-बान एवं शान के लिए देश दुनिया में खास तौर से जाना पहचाना जाता है। वस्तुत: अर्की सोलन का एक छोटा शहर है। 

  अर्की किला को अर्नी महल भी कहा जाता है। आधुनिकता के इस युग ने अर्की किला को अर्की पैलेस भी नाम दे दिया है। विशेषज्ञों की मानें तो राणा सभा चन्द्र के वंशज राणा पृथ्वी सिंह ने इस दिव्य-भव्य किला का निर्माण कराया था। 

  अर्की क्षेत्र कभी अर्की बागल रियासत की पर्वतीय राजधानी था। इसकी स्थापना पंवार राजपूत राणा अजय देव ने की थी। इस राज्य की स्थापना 1664 में हुई थी। अर्की को 1650 में विधिवत राजधानी घोषित किया गया था। 

   अर्की किला को किला या महल कुछ भी कहा जा सकता है। अर्की किला के दीवान खान को सुन्दरता का श्रेष्ठतम आयाम कहा जा सकता है। किला के आंतरिक क्षेत्र में कांगड़ा चित्रकला शैली की जीवंतता देखते ही बनती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चित्र जीवंत हों। 

   किला में यत्र, तत्र एवं सर्वत्र कांगड़ा चित्रकला शैली का रेखांकन दिखता है। इस सुन्दर चित्रांकन में पौराणिक कथानक, धर्म-आध्यात्म, इतिहास एवं संस्कृति को दर्शाने वाला रूपांकन है। यहां सिख मुगल लड़ाई को रेखांकित किया गया है।

   इस अति समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन करने के लिए देश विदेश के पर्यटक निरन्तर आते रहते हैं। अर्की किला एवं उसके आसपास सदैव मौसम सुहावना रहता है।
   अर्की के शानदार मैदान एवं अर्की पहाड़ियां सुन्दरता का श्रेष्ठतम आयाम हैं। शांत एवं शीतलता से आच्छादित परिवेश पर्यटकों को एक विशिष्ट ऊर्जा प्रदान करता है। जीवंतता एवं आक्सीजन से लबरेज अर्की क्षेत्र पर्यटकों को आकर्षित करता है।

   समुद्र तल से करीब 4100 फुट की ऊंचाई पर स्थित अर्की किला का अपना एक गौरवशाली इतिहास है। अर्की किला के चौतरफा वनस्पतियों की सुगंध परिवेश को आैर भी सुखद बनाती है। 

   आकाश एवं पर्वत श्रंखलाओं से घिरा अर्की किला पौराणिकता की दास्तां स्वयं बयां करता है। सुन्दर वास्तुकला एवं आकर्षक संरचना किला की शान है।  
  अर्की किला की स्थापत्य कला में मुगल एवं राजपूताना शैली का मिश्रण दिखता है। साथ ही राजस्थान शैली का भी प्रभाव अपना अलग अस्तित्व प्रदर्शित करता है। 

   चूंकि अर्की की राजस्थान एवं पंजाब से निकटता है। लिहाजा पंजाब की जीवन शैली से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। आशय यह कि अर्की किला विलक्षणता का खास आयाम है। 

   जिसमें एक साथ स्थापत्य कला की कई शैलियां प्रतिबिंबित होती हैं। खास यह कि अति प्राचीन होने के बावजूद चित्रांकन का रंग संयोजन अभी भी यथावत दिखता है।
   मूल रंग संयोजन की चमक अभी भी बरकरार है। सुरम्य पहाड़ियों के मध्य रचा-बसा अर्की किला अपने शानदार वैभव से पर्यटकों को आकर्षित करता है। 

  खास यह कि अर्की किला के आसपास आकर्षक स्थानों की एक लम्बी श्रंखला है। इनमें खास तौर से दुर्गा मंदिर, शांखनी महादेव मंदिर, लूत्र महादेव मंदिर, धुंडन, बनिया देवी, शिव गुफा, देवधर मंदिर आदि इत्यादि हैं।
   अर्की के चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की आभा आलोकित होती है। घना वन क्षेत्र एवं वनस्पतियों की प्रचुरता इस इलाके को कुछ खास बना देती है। शिमला से करीब 38 किलोमीटर दूर स्थित अर्की किला पौराणिकता के कारण दूर-दूर तक ख्याति रखता है।

   अर्की किला की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट शिमला है। शिमला एयरपोर्ट से अर्की किला की दूरी करीब 40 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन भी शिमला है। पर्यटक अर्की किला की यात्रा सड़क मार्ग से भी कर सकते हैं।
31.154700,76.969000

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