अंबिका माता मंदिर: अद्भुत स्थापत्यकला
अंबिका माता मंदिर की संरचना किसी को भी मुग्ध कर लेगी। अति प्राचीन मंदिर का वास्तुशिल्प अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए।
करीब 10वीं शताब्दी के बने इस मंदिर की संरचना बेहद सुन्दर एवं आकर्षक है। भारत के प्रांत राजस्थान के शहर उदयपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित अंबिका माता मंदिर श्रद्धा एवं आस्था के केन्द्र के साथ ही अपने विशिष्ट वास्तुशिल्प के लिए खास तौर से जाना एवं पहचाना जाता है।
उदयपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर जगत गांव में स्थित अंबिका माता मंंदिर वस्तुत: दुर्गा जी को समर्पित है। अंबिका जी को माता दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। लिहाजा इस मंदिर में अंबिका के रूप में माता दुर्गा की पूजा अर्चना होती है।
खास यह कि अंबिका माता मंदिर का सम्पूर्ण परिसर एक खास कलात्मकता से परिपूरित दिखता है। देवी-देवताओं की नक्काशीदार छवियां श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को मुग्ध कर लेती हैं।
प्रांगण में देवी-देवताओं की विभिन्न प्रतिमाएं, दर्शक, नर्तक, संगीतकार एवं अप्सराओं की छवियां एवं अन्य नक्काशी मंदिर की सुन्दरता में चार चांद लगा देते हैं।
सरस्वती, नृत्य भाव में गणपति, महिषासुर मर्दिनी, नवदुर्गा, वीणाधारिणी, यम, कुबेर, वायु, इन्द्र, अग्नि, वरुण, प्रणय भाव में युगल, दर्पण के सामने अंगड़ाई लेती नायिका, शिशु क्रीडा, संगीत वादन आदि का कलात्मक अंकन बेहद दर्शनीय है।
प्रतिमाओं की कलात्मकता निश्चय ही अचंभित कर देती है। सफेद पाषाण से संरचित गणपति की प्रतिमा अत्यंत दुर्लभ प्रतीत होती है।
इस मंदिर कोे सुन्दर मूर्तियों का खजाना कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। इसे स्थापत्य कला का अनुपम संगम भी कहा जा सकता है।
स्थापत्य कला की नागर शैली ने इस मंदिर की सुन्दरता में चार चांद लगा दिये। मूर्तियों का लालित्य, मुद्राभाव, सौन्दर्य, आभूषण, अलंकरण, केश विन्यास, वस्त्रों का अंकन आदि इत्यादि बहुत खूबसूरत है। गर्भगृह की परिक्रमा हेतु सभा मंडप के दोनो ओर छोटे-छोटे प्रवेश द्वार हैं।
गर्भगृह की विग्रह पट्टिका मूूर्तिकला का अद्भुत खजाना है। यहां द्वारपाल से साथ गंगा, यमुना, सुर-सुंदरी, विद्याधर एवं नृत्यांगनाओं का शिल्पांकन देखते ही बनता है। गर्भगृह के मुख्य आसन पर दुर्गा स्वरूपा माता अंबिका की प्रतिमा प्रतिष्ठापित है।
माना जाता है कि 11वीं शताब्दी में मेवाड़ शासक अल्लट ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। धार्मिक एवं पौराणिक महत्व की दृष्टि से देखें तो अंबिका माता मंदिर अति प्राचीन है।
खास यह कि अंबिका माता मंदिर की मान्यता शक्तिपीठ की है। हालांकि पुरातन धरोहर या पौराणिकता की दृष्टि से अंबिका माता मंदिर को संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है।
पुरातत्व, शिल्पकला एवं मूर्तिकला के प्रति आकर्षण रखने वालों के लिए अंबिका माता मंदिर विशेष महत्व रखता है। गिर्वा की पहाड़ियों के बीच कुराबड़ गांव के निकट अवस्थित अंबिका माता मंदिर राजस्थान का खजुराहो भी कहा जाता है।
मान्यता है कि अंबिका माता मंदिर माता दुर्गा की ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण रुाोत है। श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ती रहती है।
अंबिका माता मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट महाराणा प्रताप हवाई अड्ड़ा उदयपुर है। निकटतम रेलवे स्टेशन उदयपुर रेलवे जंक्शन है। पर्यटक या श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी अंबिका माता मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
24.576110,73.700500
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