Friday, 13 March 2020

सिंधुदुर्ग किला: अद्भुत स्थापत्यकला

   सिंधुदुर्ग किला को अरब सागर का एक अति दर्शनीय द्वीप कहा जाना चाहिए। जी हां, सिंधुदुर्ग किला अरब सागर की गोद में रचा-बसा एक शानदार किला है। 

   समुद्र की गोद में संरचित यह किला किसी द्वीप की भांति दिखता है। भारत के प्रांत महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिला स्थित सिंधुदुर्ग किला स्थापत्य कला की एक सुन्दर संरचना है। समुद्र में तैरता द्वीप नुमा यह किला अति सुन्दर प्रतीत होता है।

   महाराष्ट्र के मालवन में स्थित सिंधुदुर्ग किला अपनी विशिष्टताओं के लिए देश दुनिया में जाना एवं पहचाना जाता है। 
  सिंधुदुर्ग शब्द की उत्पत्ति हिन्दी एवं संस्कृत से मिल कर हुयी है। सिंधु का अर्थ समुद्र से होता है जबकि दुर्ग का शाब्दिक अर्थ किला से है। लिहाजा इसे समुद्र का किला कह सकते हैं।

  विशेषज्ञों की मानें तो वर्ष 1664 में इस दिव्य-भव्य किला का निर्माण महाराजा छत्रपति शिवाजी ने कराया था। विशेषज्ञों की मानें तो सिंधुदुर्ग किला महाराजा छत्रपति शिवाजी द्वारा बनवाए गये किलों में से एक है। 

   समुद्र तट से कुछ दूर स्थित सिंधुदुर्ग किला का महत्व एक नौसैनिक किला के तौर पर भी है। दक्षिण महाराष्ट्र में कोंकण क्षेत्र में स्थित सिंधुदुर्ग किला बेहद अद्भुत एवं विलक्षण है। यह किला प्राचीन वास्तुकला का सुन्दर उदाहरण है।

   दक्षिण मुम्बई से करीब 450 किलोमीटर दूर स्थित सिंधुदुर्ग किला एक विशाल पथरीली चट्टान पर संरचित है। नौका की सवारी कर इस दिव्य भव्य किला तक पहुंचा जा सकता है।

   खास यह कि इस किला के नाम पर ही महाराष्ट्र के इस जिला का नाम आधारित है। चौतरफा अरब सागर से घिरा यह किला प्राचीन काल में मराठा शासकों का मुख्यालय हुआ करता था।
  सिंधुदुर्ग किला में मराठा शासक युद्ध की तैयारी किया करते थे। खास तौर से देखें तो सिंधुदुर्ग किला मराठा शासकों का सुरक्षा गृह भी हुआ करता था। 

  सिंधुदुर्ग किला तीन वर्ष की अवधि में बन कर तैयार हुआ था। संरचना में 100 से अधिक वास्तुकारों ने योगदान दिया था। करीब 3000 श्रमिकों ने अनवरत तीन वर्ष तक कार्य किया था। इसके बाद सिंधुदुर्ग किला अपने दिव्य भव्य स्वरूप में सामने आया। 

   करीब 48 एकड़ भूमि पर बेहद मजबूती के साथ खड़ा यह किला अब वैश्विक आकर्षण का केन्द्र है। करीब 29 फुट ऊंचाई वाला यह किला करीब दो मील तक फैला है। सिंधुदुर्ग किला की नींव अत्यधिक मजबूत है। किला की नींव में करीब 4000 लोहे के टीलों का इस्तेमाल किया गया। 

   सिंधुदुर्ग किला एवं आसपास आकर्षण की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। सिंधुदुर्ग किला में नारियल के सुन्दर पेड़ों की एक शानदार श्रंखला विद्यमान है। किला के नारियल पेड़ों में फल भी होते हैं। 
  खास यह कि सिंधुदुर्ग किला के नारियल पेड़ों में शाखाओं की विशिष्टता दिखती है। किला के आंतरिक क्षेत्र में बेहतरीन कुएं भी हैं।

   खास यह कि सिंधुदुर्ग किला के सुन्दर जलाशय कभी नहीं सूखते। हालांकि गरमी के दिनों में आसपास के इलाकों के गांव के कुआं आदि सूख जाते हैं। 
   सिंधुदुर्ग किला की स्थापत्य कला में वास्तुकारों की कार्यकुशलता भी दिखती है। पानी के नीचे स्थित मार्ग भी कार्यकुशलता का एक विस्मयकारी आयाम है। यह मार्ग किला के अंदर स्थित एक मंदिर में स्थित है।

   हालांकि यह क्षेत्र एक जलाशय की भांति प्रतीत होता है। यह मार्ग सिंधुदुर्ग किला के नीचे करीब तीन किलोमीटर तक जाता है। इस मार्ग का समुद्र में करीब 12 किलोमीटर तक अस्तित्व है। इस विलक्षण सिंधुदुर्ग किला में बहुत कुछ रहस्यमय है। सिंधुदुर्ग किला में कई शानदार मंदिर भी हैं। 

   इनमें खास तौर से देवी भवानी मंदिर, हनुमान मंदिर, जरिमारी मंदिर आदि इत्यादि हैं। सिंधुदुर्ग किला के मंदिर भी विशिष्टता के लिए दुनिया भर में जाने पहचाने जाते हैं। यहां भगवान शिव को समर्पित दिव्य भव्य मंदिर है। 
   मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान शिव के हस्त चिह्न एवं पद चिह्न विद्यमान हैं। पर्यटक सिंधुदुर्ग किला में वाटर गेम्स का भी आनन्द ले सकते हैं। सिंधुदुर्ग किला का हर आयाम अनूठा एवं अद्वितीय है।
   सिंधुदुर्ग किला की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट डम्बोलिन एयरपोर्ट गोवा है। एयरपोर्ट से सिंधुदुर्ग किला की दूरी करीब 98 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन कनकवल्ली रेलवे स्टेशन है। कनकवल्ली रेलवे स्टेशन से सिंधुदुर्ग किला की दूरी करीब 25 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी सिंधुदुर्ग किला की यात्रा कर सकते हैं।
16.056800,73.470900

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