Sunday, 15 March 2020

करौली : लाल पत्थरों का अतुलनीय सौन्दर्य

    करौली को अतुलनीय शहर कहा जाना चाहिए। जी हां, करौली वस्तुत: लाल पत्थरों का चमकता शहर है। लिहाजा इसे अद्भुत एवं अतुलनीय शहर कहा जाना चाहिए। 

   भारत के अति दर्शनीय प्रदेश राजस्थान के शहर करौली को पर्यटकों का बेहद पसंदीदा शहर माना जाता है। खास यह कि करौली के रमणीक स्थल, धार्मिक स्थल एवं महातीर्थ, महल-हवेलियां, किला एवं स्मारक आदि इत्यादि पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

   मध्य प्रदेश की सीमा से लगा राजस्थान का यह शहर बेहद दर्शनीय है। इसे लाल पत्थरों का चमकता शहर भी कहा जाता है। खास यह कि इस शहर की एक सीमा रणथम्भौर से जुड़ती है। लिहाजा पर्यटक करौली से रणथम्भौर के शेरों की दहाड़ भी सुन सकते हैं।

   लिहाजा पर्यटक करौली की यात्रा के दौरान रोमांच का खास एहसास कर सकते हैं। लाल पत्थरों की इमारतें करौली को काफी कुछ खास बना देती हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि लाल पत्थर करौली की प्राकृतिक सम्पदा है। प्राकृतिक सम्पदा का यह लाल पत्थर ही शहर की खास चमक बन गया। 

   इतना ही नहीं, करौली का लाल पत्थर सम्पूर्ण भारत को सप्लाई किया जाता है। करौली के दर्शनीय स्थल पर्यटकों को मुग्ध कर लेते हैं। खास तौर से करौली की छतरियां एवं हवेलियां वास्तुशिल्प का मुख्य आकर्षण हैं। ऐतिहासिक किलों एवं मंदिरों के लिए प्रसिद्ध करौली बेहद दर्शनीय पर्यटन है। करौली का एक आकर्षण चंबल भी है। 

   हालांकि करौली एवं उसके आसपास आकर्षक स्थलों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। इनमें खास तौर सेे सिटी पैलेस, भंवर विलास महल, तिमनगढ़ किला, देवगिरी किला, उत्गीर किला, कैला देवी मंदिर, मदन मोहन मंदिर, मेंहदीपुर बालाजी मंदिर, महावीर मंदिर आदि इत्यादि हैं।
   भंवर विलास महल: भंवर विलास महल एक राजसी महल है। पर्यटक अभी भी भंवर विलास महल में राजसी ठाठ का एहसास कर सकते हैं। आंतरिक क्षेत्र अभी भी प्राचीन साज सज्जा से आलोकित है। इस शानदार महल का निर्माण 1938 में महाराजा गणेश पाल देव बहादुर ने कराया था। इसका निर्माण शाही निवास के तौर पर किया गया था।

   सिटी पैलेस: सिटी पैलेस का निर्माण 14वीं शताब्दी में राजा अर्जुनपाल के द्वारा कराया गया था। हालांकि इसके स्वरूप में निखार लाने का श्रेय राजा गोपाल सिंह को दिया गया। इस शानदार महल की नक्काशी, जाली-झरोखे, भित्तिचित्र आदि इत्यादि अति दर्शनीय एवं लुभावने हैं।
   खूबसूरत रंग एवं शैली इस महल को काफी कुछ विशिष्ट बना देते हैं। लाल पत्थरों के साथ सफेद पत्थरों का संयोजन बेहद दर्शनीय है। इस महल के शीर्ष से भद्रावती नदी का सौन्दर्य देखते ही बनता है। इतना ही नहीं, यहां से करौली शहर का नयनाभिराम दृश्य भी दिखता है। 
   तिमनगढ़ किला: तिमनगढ़ किला करौली से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित है। राजा तिमनपाल का यह किला 11वीं शताब्दी में अस्तित्व में आया था। यह एक पौराणिक स्मारक है।

   देवगिरी किला: देवगिरी किला करौली से करीब 70 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। चंबल नदी की सुन्दर घाटियों के बीच स्थित यह किला अपनी शान एवं शोभा के लिए जाना एवं पहचाना जाता है।
   देवगिरी किला करौली राजवंश की धरोहर है। करौली राजवंश आपातकाल में इस किला का उपयोग सैन्य रक्षक दुुर्ग के रूप में करते थे। 
   कैला देवी मंदिर: कैला देवी मंदिर शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित है। त्रिकुट पर्वत की पहाड़ियों के बीच कालीसिल नदी के किनारे बना यह मंदिर वास्तुशिल्प का अतुलनीय उदाहरण है। मान्यता है कि यह मंदिर नौ शक्तिपीठों में से एक है। 
   मदन मोहन मंदिर: मदन मोहन मंदिर का सौन्दर्य शास्त्र अद्भुत है। भगवान श्री कृष्ण को समर्पित यह मंदिर बेहद भाग्यशाली माना जाता है। मध्ययुगीन मंदिर भगवान श्री कृष्ण एवं उनकी संगिनी राधा रानी के लिए जाना एवं पहचाना जाता है। इसकी स्थापत्य कला अति सुन्दर एवं लुभावनी है। खास यह कि मदन मोहन मंदिर सिटी पैलेस से जुड़ा हुआ है। 
   महावीर मंदिर: महावीर मंदिर वास्तुशिल्प की अतुलनीय संंरचना है। इसका निर्माण 19 वीं सदी में किया गया था। महावीर जी का यह मंंदिर वस्तुत: जैन तीर्थ है। इस मंदिर की इमारत जैन शैली पर आधारित है। खास यह कि इस मंदिर की ख्याति देश दुनिया में है।
   करौली राजस्थान की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट सांगानेर एयरपोर्ट जयपुर है। जयपुर से करौली की दूरी करीब 160 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन हिण्डौन सिटी रेलवे जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी करौली की यात्रा कर सकते हैं।
26.495400,77.016400

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