मेहरानगढ़ किला: समृद्ध विरासत, अद्भुत स्थापत्यकला
मेहरानगढ़ किला की स्थापत्य कला को अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए। कारण किला की नक्काशी अति दर्शनीय है।
खास यह कि अपनी विशिष्टता के कारण मेहरानगढ़ किला वैश्विक ख्याति रखता है। भारत के प्रांत राजस्थान के शहर जोधपुर स्थित मेहरानगढ़ किला एक अति विशाल संरचना है। इस विहंगम किला में काफी कुछ विशिष्ट है।
पथरीली चट्टान पर करीब 150 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह किला 15वीं शताब्दी में बना था। इस दिव्य-भव्य किला में आठ प्रवेश द्वार, असंख्य बुर्ज एवं करीब दस किलोमीटर लम्बी एवं ऊंची दीवार है। इन संरचनाओं से यह किला अति अभेद माना जाता है। घुमावदार सड़कों से इस किला के चार प्रवेश द्वार जुड़े हैं।
खास यह कि मेहरानगढ़ किला में कई शानदार महल, अद्भुत नक्काशीदार किवाड़, नक्काशीदार-जालीदार खिड़कियां आदि इत्यादि बहुत कुछ खास हैं। इनमें खास तौर से मोती महल, फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना एवं दौलतखाना आदि इत्यादि हैं।
इन शानदार महलों एवं संग्रहालय में भारतीय राजवेशों के साज सामान का विस्मयकारी संग्रह अति दर्शनीय है। मोती महल को पर्ल महल के रूप में भी जाना एवं पहचाना जाता है। मेहरानगढ़ किला का यह सबसे बड़ा महल है। इस महल में महाराजा सूर सिंह अपनी प्रजा से मिलते थे।
पर्यटक यहां श्रीनगर चौकी एवं जोधपुर का शाही सिंहासन भी देख सकते हैं। फूल महल राजा का निजी महल था। इसे फूलों के महल के रूप में जाना एवं पहचाना जाता है। शीश महल सुन्दर शीशों के काम से सजा बेेहतरीन महल है।
शीश महल में धार्मिक आकृतियों की साज सज्जा देखी जा सकती है। मेहरानगढ़ किला का संग्रहालय अति समृद्ध है। संग्रहालय में राजसी शानदार पालकी, हाथियों के हौदे, विभिन्न शैलियों के मित्ति एवं लघु चित्र, संगीत वाद्य यंत्र, राजसी एवं सामान्य पोशाकें, युद्धक अस्त्र-शस्त्र एवं राजसी फर्नीचर आदि इत्यादि बेहद दर्शनीय हैं। इस संग्रहालय में 14 विशाल कक्ष हैं।
खास यह कि मेहरानगढ़ किला भारत के अति प्राचीन किलों में से एक है। मेहरानगढ़ किला भारत के समृद्धशाली अतीत का प्रतीक भी है। जोधपुर राजवंश के शासक राव जोधा ने इस दिव्य भव्य किला का निर्माण किया था। राव जोधा ने 12 मई 1459 को इस किला के निर्माण की नींव रखी थी।
हालांकि महाराजा जसवंत सिंह ने 1678 में इस किला का निर्माण पूर्ण किया। महाराजा राव जोधा की चामुंडा माता में अगाध श्रद्धा थी। लिहाजा मेहरानगढ़ किला के निकट महाराजा ने माता चामुंडा के दिव्य-भव्य मंदिर का निर्माण कराया था।
मान्यता है कि चामुंडा देवी जोधपुर शासकों की कुलदेवी हैं। महाराजा राव जोेधा ने 1460 में इस दिव्य-भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। चामुंडा देवी के दर्शन के लिए आगे बढ़ते ही लोक कलाकार लोक संगीत से पर्यटकों का स्वागत करते दिखते हैं।
यह परम्परा राजस्थान के लोक संगीत को एक जीवंतता एवं भव्यता प्रदान करती है। जोधपुर शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित मेहरानगढ़ किला राजस्थान की शान एवं शोभा है। लाल बलुआ पत्थरों से बना यह किला अद्भुत बारीक जालियों की खिड़कियों के लिए भी जाना जाता है।
खास यह कि मेहरानगढ़ किला के महलों के कक्षों की अपनी एक अलग विशिष्टता है। इतना ही नहीं, मेहरानगढ़ किला अपने प्रभावशाली शस्त्र भण्डार के लिए भी जाना जाता था।
मेहरानगढ़ किला के निकट ही योद्धा कीरत सिंह सोड़ा स्मारक है। छतरीदार गुंबद के आकार का मंडप राजपूतों की समृद्ध संस्कृति एवं आदर्श को व्यक्त करता है। भारत की इस अति समृद्ध विरासत को देखने दुनिया भर के पर्यटक आते हैं।
मेहरानगढ़ किला की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जोधपुर एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन जोधपुर जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी मेहरानगढ़ किला की यात्रा कर सकते हैं।
26.307110,73.031310
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