Sunday, 12 January 2020

विक्टोरिया मेमोरियल: अतुलनीय सौन्दर्य

   विक्टोरिया मेमोरियल को वास्तुशिल्प का जादुई सौन्दर्य कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। विक्टोरिया मेमोरियल का सौन्दर्य निश्चय ही अतुलनीय है। जिसकी शायद कहीं तुलना नहीं की जा सकती। 

   वस्तुत: विक्टोरिया मेमोरियल एक शानदार स्मारक है। भारत के पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित विक्टोरिया मेमोरियल ब्रिटिशकालीन एक राष्ट्रीय धरोहर है। यह अद्भुत एवं शानदार स्मारक महारानी विक्टोरिया को समर्पित है। इसकी संरचना वर्ष 1906 से 1921 की अवधि में की गयी।

   इस स्मारक की स्थापत्य कला अद्भुत एवं अतुलनीय है। स्मारक की संरचना में शिल्पकला का एक सुन्दर सम्मिश्रण दिखता है। विक्टोरिया मेमोरियल के गुम्बद मुगल शैली पर आधारित हैं तो वहीं इनकी संरचना में सारसेनिक एवं पुर्नजागरण काल का प्रभाव भी दिखता है। 

   मार्बल से संरचित विक्टोरिया मेमोरियल वस्तुत: मुगल एवं ब्रिाटिश स्थापत्य कला का शानदार संगम है। स्मारक की दीवारों पर बेहतरीन नक्काशी अति दर्शनीय है। महारानी विक्टोरिया को समर्पित इस स्मारक में एक शानदार एवं अति समृद्ध संग्रहालय भी है। 

   इस शानदार संग्रहालय में महारानी विक्टोरिया के पियानो, स्टडी डेस्क सहित 3000 से अधिक सुन्दर एवं आकर्षक वस्तुुएं प्रदर्शित हैं। 
  विशेषज्ञों की मानें तो विक्टोरिया मेमोरियल की स्थापना लार्ड कर्जन की पहल पर की गयी थी। इस पहल में इण्डो-ब्रिाटिश इतिहास पर विशेष जोर दिया गया था। इसी परिप्रेक्ष्य में महारानी विक्टोरिया की याद में काल विशेष संग्रहालय की परिकल्पना भी की गयी थी।

   करीब 57 एकड़ में फैले विक्टोरिया मेमोरियल में चौतरफा इण्डो-ब्रिटिश स्थापत्य कला की अद्भुत संरचना दिखती है। शायद इसीलिए इसे 'राज का ताज" कहा जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो वर्ष 1935 में इसे अधिनियम के जरिए राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया था।

   इसके बाद विक्टोरिया मेमोरियल को राष्ट्रीय पर्यटन की दृष्टि से देखा जाने लगा। खास यह कि स्मारक का संंग्रहालय एवं बाग बगीचा अति दर्शनीय है। 
   विक्टोरिया मेमोरियल संग्रहालय की नौ दीर्घाओं में 28394 कला कृतियां प्रदर्शित हैं। यह कलाकृतियां भारतीय एवं ब्रिाटिश संस्कृति को दर्शाती हैं। इस विशाल संरचना में वैश्विक शिल्पकला का भी विलक्षण दर्शन होता है। 

   इनमें यूरोपीय कलाकारों मसलन चाल्र्स डोली, जोहान जेफाली, विलियम हेजिज, विलियम सिम्पसन, टिली केटल, थोमस हिके, बुलजार सोलविन्स, इमली एडन आदि इत्यादि कलाकारों द्वारा सृजित तैलचित्र एवं जल रंगों से बने चित्र प्रदर्शित हैं। 

   मान्यता यह भी है कि कलाकार डेनियल्स की तस्वीरों का यह विश्व का सबसे बड़ा संग्रह है। दीवारों की शानदार नक्काशी पर्यटकों को मुग्ध कर लेती हैं। 

   स्मारक का कलात्मक सृजन देख कर इसे शिल्पकला का सुन्दर समिश्रण भी कह सकते हैं। हावड़ा जंक्शन से करीब 7 किलोमीटर दूर स्थित विक्टोरिया मेमोरियल पश्चिम बंगाल का एक आदर्श पर्यटन या स्मारक है।

  खास यह कि विक्टोरिया मेमोरियल अपनेे शिल्प सौन्दर्य या स्थापत्य कला से पर्यटकों को खुद ब खुद आकर्षित करता है।

   विक्टोरिया मेमोरियल कोलकाता की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इण्टरनेशनल एयरपोर्ट कोलकाता है। 

    निकटतम रेलवे स्टेशन हावड़ा जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी विक्टोरिया मेमोरियल कोलकाता की यात्रा कर सकते हैं।
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Thursday, 9 January 2020

फोर्ट विलियम: अद्भुत एवं विलक्षण

   फोर्ट विलियम को स्थापत्य कला की अद्भुत एवं विलक्षण संरचना कहा जाना चाहिए। जी हां, फोर्ट विलियम की स्थापत्य कला अति दर्शनीय है। साथ ही यह संरचना स्थापत्य कला की विविधिता को भी दर्शाती है। 

   भारत के पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता का फोर्ट विलियम वस्तुत: एक शानदार एवं बहुआयामी महलनुमा भवन है। कोलकाता में हुबली नदी के पूर्वी किनारे पर बने फोर्ट विलियम को खास तौर से एक शानदार किला कहा जाना चाहिए।

   कारण इसका वृहद स्वरूप किसी किला से कम नहीं है। इसका निर्माण ब्रिाटिश शासन में किया गया था। फोर्ट विलियम का निर्माण 1698 से 1715 के मध्य किया गया। इसका निर्माण राबर्ट क्लाइव ने किया था। 

   विशेषज्ञों की मानें तो इसके निर्माण मूलत: दस वर्ष का समय लगा था। फोर्ट विलियम का निर्माण इंग्लैंड के राजा विलियम तृतीय के नाम पर किया गया था। लिहाजा इसे फोर्ट विलियम के नाम से जाना एवं पहचाना गया। 

    खास यह है कि इस किला के सामने एक विशाल मैदान भी है। यह विशाल मैदान किला का ही हिस्सा है। कोलकाता का यह सबसे बड़ा शहरी पार्क है। विशेषज्ञों की मानें तो ईस्ट इंडिया कम्पनी को 1698 में जमींदारी में 3 गांव कोलीकट, गोविन्दपुरी एवं सूतानुती प्राप्त हुए थे। इसी भूमि पर फोर्ट विलियम का निर्माण हुआ था।

   फोर्ट विलियम पश्चिम बंगाल का एक आदर्श एवं महत्वपूर्ण पर्यटन है। गंगा नदी के पूर्वी तट पर बना यह शानदार किला वास्तुकला की दृष्टि से विशेष एवं विलक्षण है।

   निकट ही विद्यासागर सेतु है। वस्तुत: देखें तो फोर्ट विलियम भारत में ब्रिाटिश विरासत एक का अवशेष है। यह अवशेष ब्रिाटिश सैन्य शक्ति का स्मरण कराता है। 
  फोर्ट विलियम को ब्रिटिश शासन की एक प्रभावशाली संरचना माना जाता है। करीब 532 बीघा में फैला फोर्ट विलियम वस्तुत: 1781 में विस्तृत: स्वरूप में अस्तित्व में आया था। 

   इस दिव्य भव्य किला का ढ़ांचा दो मंजिला है। पंखों का प्रोजेक्ट एवं आंतरिक गार्ड रूम सहित बहुत कुछ इस संरचना में शामिल है। फोर्ट शांत, अतुलनीय सौन्दर्य एवं हरे भरे वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। 

   करीब पांच वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले फोर्ट विलियम का आकार प्रकार अष्टकोणीय है। इसकी तीन दिशाएं हुबली नदी की ओर हैं। खास यह है कि इसकी संरचना रणनीतिक रूप से की गयी थी। जिससे किसी भी हमले का बेहतर जवाब दिया जा सके।

    पानी की कमी से बचने के लिए फोर्ट के जलाशयों को आंतरिक रूप से भूमिगत सुरंंगों से गंगा नदी से जोड़ा गया था। जिससे फोर्ट के जलाशयों में पानी का कोई संकट न रहे। फोर्ट का डिजाइन किसी दिव्य भव्य किला की भांति किया गया था। फोर्ट विलियम में 10000 दर्शकों के लिए स्थान है। 

   फोर्ट में एक शानदार संग्रहालय भी है। यह संग्रहालय पर्यटकों को खास तौर से आकर्षित करता है। इस संग्रहालय में प्राचीन हथियारों, तलवारों, मशीन-बंदूकें, वर्मा अभियान की तस्वीरें आदि इत्यादि हैं। शानदार स्थापत्य कला की संरचना फोर्ट विलियम में छह द्वार है। 

   इनको चौरंगी, प्लासी, कलकत्ता, जल द्वार, सेंट जोर्जेस एवं ट्रेजरी गेट के नाम से जाना एवं पहचाना जाता है। खास यह है कि फोर्ट विलियम में शानदार स्विमिंग पूल, शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल, बेहतरीन रेस्टोरेंट, आउटडोर खेल के मैदान आदि इत्यादि हैं। खास यह है कि फोर्ट विलियम परिसर में एक 9 होल गोल्फ कोर्स भी है। सेंट पीटर चर्च यहां की शान है। 
   फोर्ट विलियम की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट कोलकाता है। निकटतम रेलवे स्टेशन कोलकाता रेलवे स्टेशन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी फोर्ट विलियम कोलकाता की यात्रा कर सकते हैं।
22.552210,88.331940

Wednesday, 8 January 2020

भीतरकनिका: प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग

   भीतरकनिका को प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग कहा जाना चाहिए। जी हां, भीतरकनिका प्राकृतिक सौन्दर्य का अद्भुत आयाम है। 

   लिहाजा यह प्रकृति प्रेमियों को बरबस आकर्षित करता है। भारत के ओडिशा के जिला केन्द्रपाड़ा स्थित भीतरकनिका वस्तुत: एक सुन्दर वन्य जीव अभयारण्य है। वन्य जीवों के रोमांचक क्रियाकलाप एवं प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण इसे ओडिशा का महत्वपूर्ण पर्यटन माना जाता है। 

   प्रकृति प्रेमियों को भीतरकनिका की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। आैषधीय वनस्पतियों का आच्छादन भीतरकनिका के प्राकृतिक सौन्दर्य में चार चांद लगा देता है। इतना ही नहीं, भीतरकनिका आैषधीय वनस्पतियों की सुगंध से हमेशा महकता रहता है। 

   शायद इसीलिए भीतरकनिका की यात्रा करने से पर्यटकों का मन मस्तिष्क प्रफुल्लित हो उठता है। भीतरकनिका वस्तुत: एक शानदार राष्ट्रीय उद्यान है। यहां विलुप्त आैषधीय वनस्पतियों एवं वन्य जीवों की एक विशाल श्रंखला है। यह स्थितियां भीतरकनिका को काफी कुछ अद्भुत बना देती हैं।

   भीतरकनिका का मुख्य आकर्षण चिलका झील है। चिलका झील को प्रवासी पक्षियों का आशियाना कहा जाना चाहिए। चिलका झील में प्रवासी पक्षियों की 170 से अधिक प्रजातियां संंरक्षण पाती हैं। 

   इनमें खास तौर से किंगफिशर, समुद्री चील, ओपेन बिल स्टार्क, सैंड पाइपर्स, पतंगे, सीटी बजाने वाले टील्स आदि इत्यादि हैं। इतना ही नहीं, सर्दियों में एशिया एवं यूरोप से आने वाले करीब 215 से अधिक प्रजातियों के पक्षी चिलका झील को अपना आशियाना बनाते हैं।

   सर्दियों में पक्षियों के प्रजनन का समय माना जाता है। लिहाजा पक्षियों की संख्या में वृद्धि भी होती है। करीब 672 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले इस शानदार अभयारण्य में झीलों-झरनों एवं नदियों का अपना एक अलग सौन्दर्य है। 

   खास तौर से भीतरकनिका में ब्रााह्मणी नदी, बैतरनी नदी एवं धामरा नदी प्रवाहमान हैं। विशाल जलाशयों, नदियों एवं झीलों की उपलब्धता जलीय जीवों कोे एक जीवंतता प्रदान करती हैं। लिहाजा भीतरकनिका में मगरमच्छ, सफेद मगरमच्छ, भारतीय अजगर आदि इत्यादि बड़ी संख्या में प्रवास करते हैं। 

   अनुमान है कि भीतरकनिका में 700 से अधिक मगरमच्छ प्रवास करते हैं। वर्ष 1998 में घोषित राष्ट्रीय उद्यान भीतरकनिका ने सौन्दर्य के कई प्रतिमान स्थापित किये। वनस्पतियों को देखें तो कच्छ वनस्पतियां यहां की शान एवं शोभा हैं। 

   भीतरकनिका का गहिरमाथा अति प्रसिद्ध तट है। यह तट कछुआ संरक्षण एवं प्रजनन केन्द्र के तौर पर जाना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो गहिरमाथा दुनिया का प्रसिद्ध कछुआ प्रजनन एवं संरक्षण केन्द्र है। यहां हिरन, बाघ, तेंदुआ, बंदर, भालू आदि इत्यादि वन्य जीवों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है।

  भीतरकनिका पर्यटकों को रोमांचक अनुभव के भरपूर अवसर प्रदान करता है। नदियों, झीलों एवं झरनों की विशाल श्रंखला होने के कारण पर्यटक भीतरकनिका में जलक्रीड़ा एवं जलयात्रा का भरपूूर आनन्द ले सकते हैं।

   रोमांचक एहसास के लिए पर्यटक भीतरकनिका में प्रवास भी कर सकते हैं। भीतरकनिका में आलीशान रिसार्ट, गेस्ट हाउस एवं काटेज आदि इत्यादि उपलब्ध रहते हैं। इनमें प्रवास कर पर्यटक भीतरकनिका का रोमांचक अनुभव कर सकते हैं।

   भीतरकनिका की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध है। निकटतम एयरपोर्ट भुवनेश्वर एयरपोर्ट है। भुवनेश्वर एयरपोर्ट से भीतरकनिका की दूरी करीब 68 किलोमीटर है। 
   निकटतम रेलवे स्टेशन कटक रेलवे जंक्शन है। कटक रेलवे स्टेशन से भीतरकनिका की दूरी करीब 55 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी भीतरकनिका की यात्रा कर सकते हैं।
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Tuesday, 7 January 2020

कांगला पैलेस: अद्भुत स्थापत्यकला

    कांगला पैलेस को पौराणिक धरोहर कहा जाना चाहिए। कांगला पैलेस की स्थापत्य कला अद्भुत एवं विलक्षण है। 

   कांगला पैलेस को हेरिटेज लवर्स का बेहद पसंदीदा हेरिटेज टूरिज्म कहा जाना चाहिए। कारण कांगला पैलेस का वास्तुशिल्प देखने बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं।

   भारत के मणिपुर की राजधानी इम्फाल स्थित यह महल अपने सौन्दर्य के कारण बेहद प्रसिद्ध है। कांगला पैलेस को आमतौर पर कांगला किला के तौर पर जाना एवं पहचाना जाता है। 

   खास यह कि कांगला पैलेस में किला की भांति दिव्यता एवं भव्यता दर्शनीय है। इस दिव्य भव्य किला का राजसी एवं धार्मिक महत्व है। विशेषज्ञों की मानें तो प्राचीनकाल में मणिपुर में मेइती राजाओं का शासन था। 

   मेइती राज परिवार ने कांगला पैलेस को अपना निवास बनाया था। लिहाजा प्राकृतिक सुन्दरता की आगोेश में मेइती राज परिवार ने कांगला पैलेस की संरचना की थी। कांगला पैलेस को मणिपुर में पुराना किला के नाम से भी जाना एवं पहचाना जाता है। 

   स्थानीयता में कांगला का शाब्दिक अर्थ सूखी भूमि होता है। इम्फाल नदी के तट पर स्थित कांगला पैलेस अति प्राचीन है। विशेषज्ञों की मानें तो कांगला पैलेस की संरचना 17वीं शताब्दी में की गयी थी। 

    कांगला पैलेस को मणिपुर का गौरव माना जाता है। हालांकि कांगला पैलेस का अधिसंख्य भाग खण्डहर में तब्दील हो चुका है। आजादी के बाद यह किला सेना के आधिपत्य में रहा। 

    हालांकि इसके पुरातात्विक महत्व को देखते हुए वर्ष 2004 में मणिपुर सरकार को सौंप दिया गया। मणिपुर के इस शानदार एवं वैभवशाली किला की स्थापत्यकला की दर्शनीयता के लिए पर्यटकों को सितम्बर से अप्रैल की अवधि में यात्रा करनी चाहिए। 

    कारण इस अवधि में मणिपुर की जलवायु शांत एवं शीतल रहती है। हालांकि नवम्बर से फरवरी की अवधि में मणिपुर में कहीं अधिक सर्दी होती है। मणिपुर के वाशिंदों की दृष्टि में कांगला का धार्मिक महत्व कहीं अधिक है। 

   मणिपुर में इसे अति पवित्र स्थान माना जाता है। मान्यता है कि मणिपुर की राजधानी इम्फाल स्थित कांगला में भगवान पाखंगबा प्रवास करते हैं। भगवान पाखंगबा मणिपुर एवं ब्राह्मांड पर शासन करतेे हैं। 

    मान्यता यह भी है कि कांगला में 360 महत्वपूर्ण एवं पवित्र स्थान हैं। इनमें खास तौर से गढ़ के खण्डहर, क्रानियल, चीथरोल कुंभाला आदि इत्यादि हैं। कांगला पैलेस के दक्षिणी द्वार के निकट गोविन्द जी मंदिर स्थित है। गोविन्द जी मंदिर अति पवित्र तीर्थधाम है।

   कांगला पैलेस की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट इम्फाल एयरपोर्ट है। इम्फाल एयरपोर्ट से कांगला पैलेस की दूरी करीब 8 किलोमीटर है।

  निकटतम रेलवे स्टेशन दीमापुुर रेलवे जंक्शन है। दीमापुर रेलवे स्टेशन से कांगला पैलेस की दूरी करीब 215 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी कांगला पैलेस इम्फाल की यात्रा कर सकते हैं।
24.807460,93.945460

Friday, 3 January 2020

केयबुल लामजाओ: अद्भुत एवं अतुलनीय

   अद्भुत, अतुलनीय, अविश्वसनीय एवं अकल्पनीय ही कहा जाना चाहिए। जी हां, केयबुल लामजाओ कुछ ऐसा ही है। 

   केयबुल लामजाओ वस्तुत: एक जल में तैरता हुआ वन्य जीव अभयारण्य है। खास यह कि यह वन्य जीव अभयारण्य अपने प्राकृतिक सौन्दर्य एवं विलक्षणता के लिए विश्व में प्रसिद्ध है।
   भारत के मणिपुर की राजधानी इम्फाल से करीब 53 किलोमीटर दूर स्थित केयबुल लामजाओ वस्तुत: अति दर्शनीय लोकतक झील का एक शानदार हिस्सा है। 

   हालांकि यह विशाल झील मणिपुर के जिला बिशुनपुर में स्थित है। लोकतक झील भारत ही नहीं, विश्व में प्रसिद्ध है। कारण इस विशाल झील मेें तैरता नेशनल पार्क है। इस प्रकार का शायद यह दुनिया का इकलौता पार्क है। 

   इस फ्लोटिंग नेशनल पार्क को केयबुल लामजाओे के नाम से जाना एवं पहचाना जाता है। प्राकृतिक सौन्दर्य से आच्छादित यह नेशनल पार्क वस्तुत: विलुप्त होते संगाई हिरनों का आशियाना है। इसे विलुप्त हिरन प्रजाति संगाई का संरक्षण क्षेत्र भी कह सकते हैं।

   संगाई हिरन मणिपुर का राज्य पशु भी है। हालांकि केयबुल लामजाओ वस्तुत: एक विहंगम वन्य जीव अभयारण्य है। इस अभयारण्य में संगाई हिरन के साथ ही कछुए, कोबरा सांप, हिमालय का काला भालू, सफेद भालू, जंगली विल्लियां आदि इत्यादि हैं। इनके अलावा पक्षियों की असंख्य प्रजातियां इस अभयारण्य की शान एवं शोभा हैं। 

   प्रकृति प्रेमियों एवं वन्य जीव प्रेमियों के लिए यह अभयारण्य किसी स्वर्ग से कम नहीं है। भारत के पूर्वोत्तर में स्थित मणिपुर की लोकतक झील वस्तुत: अपनी विशिष्टताओं के लिए खास तौर से जानी एवं पहचानी जाती है। 

   आैषधीय वनस्पतियों एवं मिट्टी के लघु द्वीपों के लिए लोकतक झील की अपनी एक अलग विशिष्टता है। इसे आश्चर्यजनक ही कहा जायेगा कि लोकतक झील में लघु द्वीपों की संरचना स्वत: होती रहती है। इन लघु द्वीपों को स्थानीयता में फुमुदी एवं कुंदी कहा जाता है। 

   करीब 280 वर्ग किलोमीटर में फैली लोकतक झील का सबसे बड़ा द्वीप केयबुल लामजाओ है। लामजाओं का क्षेत्रफल करीब 40 वर्ग किलोमीटर है। 
  इस विशाल फुमदी कोे भारत सरकार ने केयबुल लामजाओ वन्य जीव अभयारण्य को संगाई हिरन के लिए संरक्षित क्षेत्र घोषित किया है। यह विश्व का एकमात्र तैरता राष्ट्रीय उद्यान है। 

  खास यह कि लोकतक झील मणिपुर के लिए आर्थिक एवं सांस्कृतिक महत्व भी रखती है। लोकतक झील का जल बेहद साफ एवं निर्मल है। लिहाजा इस जल का उपयोग विद्युत उत्पादन, सिंचाई एवं पेयजल के रूप में किया जाता है। पर्यटक झील में मछलियां पकड़ने का शौक भी पूरा कर सकते हैं। 

   हालांकि मछलियों का शिकार करना यहां का एक आर्थिक संसाधन है। स्थानीयता में देखें तो लोक का अर्थ नदी या झरना होता है। तक का अर्थ अंत होता है। 
  लोकतक झील चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की निराली छटा रखती है। यह प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को सम्मोहित करता है। इस झील के प्राकृतिक द्वीप अति दर्शनीय हैं। 

   फुमदुी कहे जाने वाले यह द्वीप केवल दर्शनीय ही नहीं हैं, बल्कि बाशिंदे इन पर आशियाना बना कर प्रवास भी करते हैं। प्रकृति के सुन्दर नजारों वाली लोकतक झील मणिपुर के इस इलाके की लाइफ लाइन भी है।

   ताजे एवं स्वच्छ जल वाली लोकतक झील आर्थिक संसाधन का एक बड़ा रुाोत है। पर्यटक लोकतक झील की यात्रा कर केयबुल लामजाओ वन्य जीव अभयारण्य पर रोमांच का शानदार अनुभव करते हैं।

    केयबुल लामजाओे वन्य जीव अभयारण्य की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट इम्फाल एयरपोर्ट है। 
   इम्फाल एयरपोर्ट से केयबुल लामजाओ की दूरी करीब 53 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन दीमापुर रेलवे जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी केयबुल लामजाओ की यात्रा कर सकते हैं।
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शांति निकेतन: सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर    शांति निकेतन को आध्यात्मिक धरोहर कहा जाना चाहिए। जी हां, शांति निकेतन संस्कृति, परम्परा...