भीतरकनिका: प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग
भीतरकनिका को प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग कहा जाना चाहिए। जी हां, भीतरकनिका प्राकृतिक सौन्दर्य का अद्भुत आयाम है।
लिहाजा यह प्रकृति प्रेमियों को बरबस आकर्षित करता है। भारत के ओडिशा के जिला केन्द्रपाड़ा स्थित भीतरकनिका वस्तुत: एक सुन्दर वन्य जीव अभयारण्य है। वन्य जीवों के रोमांचक क्रियाकलाप एवं प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण इसे ओडिशा का महत्वपूर्ण पर्यटन माना जाता है।
प्रकृति प्रेमियों को भीतरकनिका की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। आैषधीय वनस्पतियों का आच्छादन भीतरकनिका के प्राकृतिक सौन्दर्य में चार चांद लगा देता है। इतना ही नहीं, भीतरकनिका आैषधीय वनस्पतियों की सुगंध से हमेशा महकता रहता है।
शायद इसीलिए भीतरकनिका की यात्रा करने से पर्यटकों का मन मस्तिष्क प्रफुल्लित हो उठता है। भीतरकनिका वस्तुत: एक शानदार राष्ट्रीय उद्यान है। यहां विलुप्त आैषधीय वनस्पतियों एवं वन्य जीवों की एक विशाल श्रंखला है। यह स्थितियां भीतरकनिका को काफी कुछ अद्भुत बना देती हैं।
भीतरकनिका का मुख्य आकर्षण चिलका झील है। चिलका झील को प्रवासी पक्षियों का आशियाना कहा जाना चाहिए। चिलका झील में प्रवासी पक्षियों की 170 से अधिक प्रजातियां संंरक्षण पाती हैं।
इनमें खास तौर से किंगफिशर, समुद्री चील, ओपेन बिल स्टार्क, सैंड पाइपर्स, पतंगे, सीटी बजाने वाले टील्स आदि इत्यादि हैं। इतना ही नहीं, सर्दियों में एशिया एवं यूरोप से आने वाले करीब 215 से अधिक प्रजातियों के पक्षी चिलका झील को अपना आशियाना बनाते हैं।
सर्दियों में पक्षियों के प्रजनन का समय माना जाता है। लिहाजा पक्षियों की संख्या में वृद्धि भी होती है। करीब 672 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले इस शानदार अभयारण्य में झीलों-झरनों एवं नदियों का अपना एक अलग सौन्दर्य है।
खास तौर से भीतरकनिका में ब्रााह्मणी नदी, बैतरनी नदी एवं धामरा नदी प्रवाहमान हैं। विशाल जलाशयों, नदियों एवं झीलों की उपलब्धता जलीय जीवों कोे एक जीवंतता प्रदान करती हैं। लिहाजा भीतरकनिका में मगरमच्छ, सफेद मगरमच्छ, भारतीय अजगर आदि इत्यादि बड़ी संख्या में प्रवास करते हैं।
अनुमान है कि भीतरकनिका में 700 से अधिक मगरमच्छ प्रवास करते हैं। वर्ष 1998 में घोषित राष्ट्रीय उद्यान भीतरकनिका ने सौन्दर्य के कई प्रतिमान स्थापित किये। वनस्पतियों को देखें तो कच्छ वनस्पतियां यहां की शान एवं शोभा हैं।
भीतरकनिका का गहिरमाथा अति प्रसिद्ध तट है। यह तट कछुआ संरक्षण एवं प्रजनन केन्द्र के तौर पर जाना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो गहिरमाथा दुनिया का प्रसिद्ध कछुआ प्रजनन एवं संरक्षण केन्द्र है। यहां हिरन, बाघ, तेंदुआ, बंदर, भालू आदि इत्यादि वन्य जीवों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है।
भीतरकनिका पर्यटकों को रोमांचक अनुभव के भरपूर अवसर प्रदान करता है। नदियों, झीलों एवं झरनों की विशाल श्रंखला होने के कारण पर्यटक भीतरकनिका में जलक्रीड़ा एवं जलयात्रा का भरपूूर आनन्द ले सकते हैं।
रोमांचक एहसास के लिए पर्यटक भीतरकनिका में प्रवास भी कर सकते हैं। भीतरकनिका में आलीशान रिसार्ट, गेस्ट हाउस एवं काटेज आदि इत्यादि उपलब्ध रहते हैं। इनमें प्रवास कर पर्यटक भीतरकनिका का रोमांचक अनुभव कर सकते हैं।
भीतरकनिका की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध है। निकटतम एयरपोर्ट भुवनेश्वर एयरपोर्ट है। भुवनेश्वर एयरपोर्ट से भीतरकनिका की दूरी करीब 68 किलोमीटर है।
निकटतम रेलवे स्टेशन कटक रेलवे जंक्शन है। कटक रेलवे स्टेशन से भीतरकनिका की दूरी करीब 55 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी भीतरकनिका की यात्रा कर सकते हैं।
20.515900,86.397990
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