उनाकोटि: अद्भुत एवं विलक्षण शिल्प
उनाकोटि को नक्काशी कला का इन्द्रधनुषी आयाम कहा जाना चाहिए। जी हां, उनाकोटि का सौन्दर्य शास्त्र अद्भुत एवं विलक्षण है।
भारत के राज्य त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से करीब 125 किलोमीटर दूर स्थित उनाकोटि वस्तुत: एक अति प्राचीन पौराणिक धरोहर एवं सम्पदा है। यहां सुन्दर रॉक कट नक्काशी के दुर्लभ दर्शन होते हैं। उनाकोटि का शाब्दिक अर्थ एक करोड़ से कम होता है।
खास यह कि 7वीं एवं 9वीं शताब्दी का यह सौन्दर्य शिल्प वैश्विक ख्याति रखता है। वस्तुत: उनाकोटि को हिन्दुओं का एक प्राचीन तीर्थ भी माना जाता है। कारण सौन्दर्य शास्त्र की यह प्राचीन संरचना देवी देवताओं को समर्पित है। उनाकोटि भगवान शिव के कृतित्व, व्यक्तित्व एवं ईश्वरत्व को रेखांकित करती है।
हिन्दू पौराणिक कथाओं के असंख्य उदाहरण उनाकोटि में दर्शनीय हैं। भगवान शिव, पार्वती, नंदी, भगवान श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, गणेश, हनुमान आदि सहित अनेक देवी देवताओं की प्रतिमाएं उनाकोटि में दर्शनीय एवं शोभायमान हैं। इनके अलावा मां दुर्गा, भगवान विष्णु आदि की भी आकर्षक प्रतिमाएं विद्यमान हैं।
खास यह है कि उनाकोटि के स्थान पर भगवान शिव की विशाल प्रतिमा विद्यमान है। भगवान शिव की इस विशाल प्रतिमा को उनाकोटेश्वर के नाम से जाना एवं पहचाना जाता है। यह प्रतिमा करीब 30 फुट ऊंची है। इसके अलावा भगवान शिव की दो अन्य विशाल प्रतिमाएं भी हैं।
भगवान गणेश की प्रतिमा विलक्षण एवंं अद्भुत है। इस प्रतिमा में भगवान गणेश की प्रतिमा में चार हाथ एवं दांत दर्शनीय हैं। गणेश की यह प्रतिमा अति सुन्दर है। इसके अलावा गणेश की अन्य प्रतिमाएं भी आकर्षक हैं। उनाकोटि की अद्भुत मूर्तियां पर्यटकों में रोमांच पैदा करती हैं।
मान्यता है कि इन दर्शनीय प्रतिमाओं की संरचना कालू शिल्पकार ने की थी। मान्यता है कि शिल्पकार कालू भगवान शिव के साथ कैलाश पर्वत जाना चाहता था लेकिन यह संभव नहीं था। भगवान शिव ने शिल्पकार से कहा कि यदि एक रात में एक करोड़ प्रतिमाएं संरचित कर दे तो वह कैलाश जा सकेगा।
लिहाजा शिल्पकार रात भर मूर्तियों की संरचना करता रहा। सुबह गणना में एक मूर्ति कम निकली। लिहाजा शिल्पकार कालू कैलाश नहीं जा सका। ऐसे मेें शिल्पकार कालू धरती पर ही रह गया लेकिन उसकी इस संरचना ने शिल्पकार कालू को अमर कर दिया।
शायद इसी लिए इस स्थान को उनाकोटि कहा जाता है। उनाकोटि को ट्रैकिंग के लिए बेहतरीन पर्यटन माना जाता है। खास यह है कि उनाकोटि को पूर्वोत्तर भारत के रहस्यों में गिना जाता है।
हालांकि भारतीय पर्यटन का यह सुन्दर आयाम लम्बेे समय से अज्ञात रहा है। अद्भुत एवं विलक्षण मूर्ति शिल्प होने के साथ ही उनाकोटि को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान हासिल है। भगवान शिव सहित अन्य देवी देवताओं को विधिवत पूजन अर्चन किया जाता है।
इन अद्भुत एवं विलक्षण मूर्ति शिल्प की दर्शनीयता के लिए दुनिया भर केे पर्यटक आते हैं। उनाकोटि बेहद रोमांचक है। उनाकोटि का सौन्दर्य शास्त्र एवं नक्काशी बेहद लुभावनी है। लिहाजा पर्यटकों की आवाजाही लगी रहती है।
उनाकोटि की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट अगरतला एयरपोर्ट है।
पर्यटक कमलपुर एयरपोर्ट से भी उनाकोटि की यात्रा कर सकते हैंं। निकटतम रेलवे स्टेशन कुमारघाट जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी उनाकोटि की यात्रा कर सकते हैं।
23.833820,91.282420
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