कोल्हापुर: शिल्पकला का अद्भुत संगम
कोल्हापुर को शिल्पकला एवं लजीज व्यंजनों का अद्भुत संगम कहा जाना चाहिए। जी हां, कोल्हापुर अपने प्राकृतिक सौन्दर्य शास्त्र के साथ ही चप्पलों, आभूषणों एवं स्वादिष्ट-लजीज व्यंजनों के लिए देश दुनिया में खास प्रसिद्ध है।
भारत के महाराष्ट्र के दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित कोल्हापुर वस्तुत: एक सुन्दर एवं धार्मिक शहर है। कोल्हापुर को खास तौर से देवी महालक्ष्मी के लिए जाना एवं पहचाना जाता है। मुम्बई से करीब 400 किलोमीटर दूर स्थित कोल्हापुर वस्तुत: महाराष्ट्र का एक जिला है।
मुम्बई के निकट होने के कारण कोल्हापुर वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा पर्यटन क्षेत्र है। पौराणिक, ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण शहर कोल्हापुर मराठी कला के लिए खास तौर से जाना एवं पहचाना जाता है। विशेष रूप से कोल्हापुरी हस्तशिल्प वैश्विक ख्याति रखता है।
कोल्हापुरी चप्पलें तो दुनिया में अपनी एक खास पहचान एवं ख्याति रखती हैं। कोल्हापुर का प्राकृतिक सौन्दर्य, इतिहास, संस्कृति एवं आध्यात्म पर्यटकों को मुग्ध कर लेता है।
कोल्हापुर एवं उसके आसपास आकर्षक एवं दर्शनीय स्थलों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। इनमें खास तौर से महालक्ष्मी मंदिर बेहद प्रसिद्ध है। महालक्ष्मी मंदिर, नया महल, छत्रपति साहू जी संग्रहालय, पन्हाला किला, काशी विश्वेश्वर मंदिर, जोतिबा मंदिर, रंकाला तालाब, दाजीपुर अभयारण्य एवं टाउनहाल आदि इत्यादि हैं।
महालक्ष्मी मंदिर: महालक्ष्मी मंदिर वस्तुत: कोल्हापुर की शान एवं शोभा हैं। मंदिर का सौन्दर्य शास्त्र पर्यटकों, दर्शकों एवं श्रद्धालुओं को मुग्ध कर लेता है। यह मंदिर देवी महालक्ष्मी को समर्पित है। महालक्ष्मी को देवी अम्बा के नाम से भी जाना जाता है।
मंदिर परिसर में काशी विश्वेश्वर, कार्तिक स्वामी, सिद्धिविनायक, महासरस्वती, महाकाली, श्री दत्ता एवं भगवान श्री राम विराजमान हैं। महालक्ष्मी मंदिर का निर्माण चालुक्य शासक करन देव ने 7वीं शताब्दी में किया था। मंदिर के गर्भगृह में देवी महालक्ष्मी की 40 किलो की दिव्य-भव्य प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठापित है।
पौराणिक मान्यताओं की मानें तो प्राचीनकाल में केशी राक्षस के पुत्र कोल्हासुर का यहां शासन था। महालक्ष्मी ने राक्षस कोल्हासुर का वध किया था। लिहाजा इस स्थान को राक्षस कोल्हासुर एवं देवी महालक्ष्मी के लिए जाना जाता है। मंदिर का वास्तुशिल्प अति दर्शनीय एवं लुभावना है।
नया महल: नया महल एक दिव्य भव्य पौराणिक संरचना है। वर्ष 1884 में बने इस महल को महाराज का नया महल कहा जाता है। इस शानदार महल का वास्तुशिल्प गुजरात एवं राजस्थान के सौन्दर्य शास्त्र पर आधारित है।
इसमें हिन्दू स्थापत्य कला, जैन स्थापत्य कला एवं राजवाड़ा शैली का समिश्रण दिखता है। छत्रपति साहू जी महाराज का यह महल स्थापत्य कला का अद्भुत एवं विलक्षण संगम है। महल के भूतल पर प्राचीन वस्त्रों, हथियारों एवं आभूषणों आदि इत्यादि का भव्य संग्रहालय है। इसे छत्रपति साहू जी महाराज संग्रहालय के नाम से जाना जाता है। छत्रपति साहू जी महाराज की अनेक वस्तुएं संग्रहालय में प्रदर्शित हैं।
पन्हाला किला: पन्हाला किला समुद्र तल से करीब 3127 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। किला एवं आसपास का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है।
पन्हाला किला का नामकरण पन्ना नामक एक जनजातीय पर आधारित है। इस जनजाति ने इस किला पर शासन किया था। इस किला का निर्माण 1015 में राजा भेज ने किया था।
काशी विश्वेश्वर मंदिर: काशी विश्वेश्वर मंदिर का निर्माण 7वीं शताब्दी के दौरान किया गया था। इस मंदिर में दो कुण्ड हैं। इनको काशी एवं मणिकर्णिका के नाम से जाना जाता है। यहां महालक्ष्मी उद्यान है। एक प्राचीन गुफा भी है। गुफा का उद्देश्य प्राचीन काल में ध्यान साधना से रहा है।
जोतिबा मंदिर: जोतिबा मंदिर वस्तुत: कोल्हापुर के उत्तर दिशा में पहाड़ों से घिरा एक दर्शनीय एवं सुरम्य स्थान है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण 1730 में नवाजीसवा ने कराया था। मंदिर का वास्तुशिल्प प्राचीन है।
गर्भगृह में जोतिबा की चार भुजाधारी प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठित है। जोतिबा को भैरव का पुर्नजन्म माना जाता है। जोतिबा ने महालक्ष्मी के साथ रत्नासुर से युद्ध लड़ा था। राक्षस रत्नासुर के नाम से पहाड़ सहित पूरे इलाके को जाना एवं पहचाना जाता है।
रंकाला तालाब: रंकाला तालाब वस्तुत: कोल्हापुर की शान एवं शोभा है। वस्तुत: इसे एक सुन्दर झील के तौर पर ख्याति हासिल है। पर्यटक रंकाला मेें पर्यटक जलक्रीड़ा का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। इस झील का निर्माण छत्रपति साहू जी महाराज ने कराया था।
दाजीपुर अभयारण्य: दाजीपुर अभयारण्य वस्तुत: कोल्हापुर एवं सिंधुदुर्ग का सीमा क्षेत्र है। इस प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र में पशु पक्षियों की असंख्य प्रजातियां पाई जाती हैं। चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की निराली छटा पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। आैषधीय वनस्पतियों की उपलब्धता परिवेश को आैर भी अधिक खुशनुमा बना देती है। रोमांच के शौकीन पर्यटकों के लिए दाजीपुर अभयारण्य किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
टाउनहाल: टाउनहाल कोल्हापुुर शहर के मध्य स्थित एक शानदार एवं दर्शनीय इमारत है। टाउनहाल की इमारत में एक दिव्य भव्य संग्रहालय भी है। इस संग्रहालय में ब्राह्मपुरी से लायी गयीं वस्तुएं खास तौर से प्रदर्शित हैं। इनमें खास तौर से प्राचीन मूर्तियां, कलाकृतियां, प्राचीन सिक्के, कढ़ाईदार वस्त्र, तलवारें एवं हथियार आदि दर्शित एवं प्रदर्शित हैं।
दाजीपुर अभयारण्य: दाजीपुर अभयारण्य वस्तुत: कोल्हापुर एवं सिंधुदुर्ग का सीमा क्षेत्र है। इस प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र में पशु पक्षियों की असंख्य प्रजातियां पाई जाती हैं। चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की निराली छटा पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। आैषधीय वनस्पतियों की उपलब्धता परिवेश को आैर भी अधिक खुशनुमा बना देती है। रोमांच के शौकीन पर्यटकों के लिए दाजीपुर अभयारण्य किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
टाउनहाल: टाउनहाल कोल्हापुुर शहर के मध्य स्थित एक शानदार एवं दर्शनीय इमारत है। टाउनहाल की इमारत में एक दिव्य भव्य संग्रहालय भी है। इस संग्रहालय में ब्राह्मपुरी से लायी गयीं वस्तुएं खास तौर से प्रदर्शित हैं। इनमें खास तौर से प्राचीन मूर्तियां, कलाकृतियां, प्राचीन सिक्के, कढ़ाईदार वस्त्र, तलवारें एवं हथियार आदि दर्शित एवं प्रदर्शित हैं।
कोल्हापुर की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बेलगांव एयरपोर्ट है। बेलगांव एयरपोर्ट से कोल्हापुर की दूरी करीब 150 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन कोल्हापुर जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग सेे भी कोेल्हापुर की यात्रा कर सकते हैं।
16.694590,74.223053
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