विजयवाड़ा: समृद्ध सांस्कृतिक सौन्दर्य
विजयवाड़ा की सांस्कृतिक समृद्धता को अतुलनीय कहा जाना चाहिए। जी हां, विजयवाड़ा की सांस्कृतिक समृद्धता अति दर्शनीय है।
लिहाजा इसके सांस्कृतिक सौन्दर्य से पर्यटक खिचे चले आते हैं। भारत के आंध्र प्रदेश का विजयवाड़ा अति दर्शनीय शहर है। कृष्णा नदी के तट पर स्थित विजयवाड़ा वस्तुत: पौराणिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य से अति समृद्ध शहर है। इन्द्राकिलाद्री पहाड़ियों से घिरा विजयवाड़ा कलाकृतियों के लिए भी प्रसिद्ध है।
मान्यता है कि यह कलाकृतियां सदियों प्राचीन हैं। खास यह कि विजयवाड़ा का मनोरम परिदृश्य पर्यटकों को शांत शीतलता का एक सुखद एहसास कराता है। लिहाजा पर्यटक एक रोमांच से भर उठते हैं। प्राचीन शहर होने के कारण वियजवाड़ा की भौगोलिक स्थित अति सुन्दर एवं मोहक है।
विजयवाड़ा की यात्रा का सबसे बेहतरीन समय अक्टूबर से मार्च की अवधि होती है। कारण इस अवधि में विजयवाड़ा का मौसम सुहावना होता है। विजयवाड़ा का नामकरण देवी कनक दुर्गा पर आधारित है। देवी कनक दुर्गा को विजया भी कहते हैं। लिहाजा इस शहर को विजया के नाम पर विजयवाड़ा नाम दिया गया।
खास यह कि विजयवाड़ा मंदिरों एवं गुफाओं से भी समृद्ध है। लिहाजा पर्यटक दर्शन, पूजन के साथ ही प्राचीनता की भी अनुभूति कर सकते हैं। विजयवाड़ा में मालेश्वर मंदिर एक अति प्रसिद्ध स्थान है। मंदिर मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर में श्रीचक्र की स्थापना की थी।
विजयवाड़ा के निकट ही पहाड़ी पर स्थित विक्टोरिया म्युजियम भी अति दर्शनीय है। काले ग्रेनाइट पत्थर की विशालकाय बुद्ध प्रतिमा यहां का मुख्य आकर्षण है। विजयवाड़ा से दक्षिण में करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित गंडीवाड़ा जैन मंदिर आस्था एवं विश्वास का प्रसिद्ध केन्द्र है।
बौद्ध धर्म से ताल्लुक रखने वाले अवशेष प्राचीनता को दर्शित करते हैं। बौद्ध धर्म के अवशेष की 99 समाधियां हैं। खास यह कि इस स्थान को विशिष्टता के कारण राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया है।
विजयवाड़ा एवं उसके अासपास दर्शनीय एवं आकर्षक स्थलों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। इनमें खास तौर से देखें तो भवानी आईलैण्ड, उनादल्ली गुफाएं, प्रकाशम बैराज, मोगलाराजपुरम गुफाएं आदि इत्यादि हैं। इनका आकर्षण पर्यटकों को सम्मोहित कर लेता है।
भवानी आईलैण्ड: भवानी आईलैण्ड विजयवाड़ा का एक खास आकर्षण है। विजयवाड़ा की शान एवं शोभा की ख्याति रखने वाला भवानी आईलैण्ड बेहद आकर्षक एवं दर्शनीय है।
करीब 130 एकड़ क्षेत्र में फैला भवानी आईलैण्ड पर्यटकों को रोमांच से भर देता है। भवानी आईलैण्ड कृष्णा नदी का सबसे बड़ा द्वीप है। लिहाजा पर्यटक जलक्रीड़ा का भरपूर आनन्द ले सकते हैं।
पर्यटक भवानी आईलैण्ड पर नौकायन का आनन्द ले सकते हैं तो वाटर स्पोट्र्स का रोमांचक एहसास भी कर सकते हैं। पर्यटकों के बीच यह आईलैण्ड बेहद प्रसिद्ध है।
उनादल्ली गुफाएं: उनादल्ली गुफाएं अति प्राचीन संरचना है। मान्यता है कि चार मंजिला उनादल्ली गुफाएं 7वीं शताब्दी की संरचनाएं हैं। इस क्षेत्र की प्रारम्भिक गुफाओं में यह एक है।
लिहाजा विजयवाड़ा में इसका पौराणिक महत्व है। इसकी शानदार वास्तुकला एवं मूर्ति शिल्प पर्यटकों को मुग्ध कर लेते हैं। सुरम्य पृष्ठभूमि पर आधारित इन गुफाओं में भगवान विष्णु की दिव्य भव्य प्रतिमा विद्यमान है। खास यह कि इस स्थान से सूर्यास्त का अति मनोरम दृश्य दिखता है।
प्रकाशम बैराज: प्रकाशम बैराज कृष्णा नदी की शान एवं शोभा है। करीब 1223.5 मीटर लम्बा प्रकाशम बैराज एक आदर्श पिकनिक स्पॉट भी है। प्रकाशम बैराज का निर्माण वर्ष 1852 से 1855 की अवधि में किया गया।
बांध की तीन जलधाराएं हैं। यह तीनों जलधाराएं शहर विजयवाड़ा के मध्य से होकर गुजरती हैं। इस बांध के जल से एक अति खूबसूरत झील भी बनाई गयी है। बांध से झील का मनोरम परिदृश्य दिखता है।
मोगलाराजपुरम गुफाएं: मोगलाराजपुरम गुफाओं को वस्तुत: विशाल चट्टानों को काट कर बनाया गया है। वस्तुत: यह एक अभयारण्य क्षेत्र है। मान्यता है कि यह दर्शनीय गुफाएं 5वीं शताब्दी में संरचित की गयी हैं।
खास यह है कि इन गुफाओं में प्रवेश करते ही एहसास होता है कि जैसे 5वीं शताब्दी में हों। इन गुफाओं में भगवान अर्धनारीश्वर की राजसी प्रतिमा है। गुफाएं सबसे सुन्दर पुरातन मूर्ति शिल्प को अपने आगोश में संरक्षित रखे हुए है। पर्यटकों को इन गुफाओं में भारत के अति समृद्ध एवं पौराणिक इतिहास के दर्शन होते हैं तो वहीं प्राचीन वास्तुकला से भी परिचय होता है।
विजयवाड़ा की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट गन्नवरम एयरपोर्ट विजयवाड़ा है। एयरपोर्ट शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित है। निकटतम रेलवे स्टेशन विजयवाड़ा रेलवे स्टेशन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी विजयवाड़ा की यात्रा कर सकते हैं।
15.895870,80.764660
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