Monday, 18 November 2019

कलिंग घाटी: आैषधीय वनस्पतियों का खजाना

   कलिंग घाटी का प्राकृतिक सौन्दर्य निश्चित पर्यावरणीय इन्द्रधनुषी आयाम कहा जाना चाहिए। जी हां, कलिंग घाटी का शानदार एवं सुन्दर परिवेश सदैव सुगंध से लबरेज रहता है। 

   लिहाजा पर्यटक कलिंग घाटी के प्राकृतिक एवं पर्यावरणीय सौन्दर्य पर मुग्ध हो जाते हैं। इसे पौराणिक एवं ऐतिहासिक धरोहर के तौर पर देखा जाता है।
   भारत के ओड़िशा के कंधमाल जिला के फूलबानी-बरहामपुर रोड़ पर स्थित कलिंग घाटी को वैश्विक ख्याति हासिल है। इसे आैषधीय वनस्पतियों का दुर्लभ खजाना भी कह सकते हैं। 
    फूलबानी से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित कलिंग घाटी सिल्वीकल्चर गार्डेन एवं आैषधीय वनस्पतियों के लिए खास तौर से प्रसिद्ध है। खास यह है कि इस सुन्दर घाटी के निकट ही दशमिल्ला स्थान है। दशमिल्ला में ही सम्राट अशोक ने कलिंग का युद्ध लड़ा था।

    दशमिल्ला कलिंग युद्ध के लिए जाना जाता है। कलिंग घाटी आैषधीय वनस्पतियों के लिए देश दुनिया में विशिष्ट स्थान रखती है। विशेषज्ञों की मानें तो इस दुर्लभ घाटी में दुनिया की दुर्लभ आैषधीय वनस्पतियों की उपलब्धता बड़ी तादाद में है। सिल्वीकल्चर गार्डेन में रबर एवं बांस की विभिन्न प्रजातियां खास तौर से हैं।

   यह घाटी सुगंध से सदैव महकती रहती है। वन्य जीवन का कोलाहल इस शानदार घाटी को गुलजार रखता है। वस्तुत: कलिंग घाटी एशियाई हाथियों का शानदार आशियाना है। झीलों-झरनों का यह इलाका अति दर्शनीय है। कलिंग घाटी एवं आसपास दर्शनीय एवं आकर्षक स्थानों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। 

   प्राकृतिक सौन्दर्य के बीच रचा बसा पक्काझार झरना कलिंग घाटी का एक खास आकर्षण है। करीब 60 फुट की ऊंचाई से गिरने वाले इस झरना का सौन्दर्य देखते ही बनता है। प्राकृतिक सघन वन क्षेत्र में स्थित यह झरना कलिंग घाटी की शान एवं शोभा माना जाता है। 

   राशिमल पर्वत श्रंखलाओं का यह इलाका राशिकुल्या नदी का उद्गम स्थल भी है। पहाड़ी की चोटी पर एक शानदार प्राचीन गुफा भी है। जिसे रशगंपुंडा के नाम से जाना जाता है। वस्तुत: देखें तो पक्काझार झरना, डुंगी, मंदसुरु कुटी एवं बेलघर आदि इत्यादि कलिंग घाटी के मुख्य आकर्षण हैं।
   डुंगी : डुंगी वस्तुत: कंधमाल का एक मात्र पुरातात्विक क्षेत्र है। फूलबानी से करीब 45 किलोमीटर दूर फूलबानी-बरहामपुर रोड स्थित डुंगी को राष्ट्रीय धरोहर के तौर पर मान्यता हासिल है। विशेषज्ञों की मानें तो 11वीं शताब्दी में यहां एक अति दर्शनीय बौद्ध विहार था। 

   बौद्ध विहार नष्ट हो जाने के बाद डुंगी में एक विशाल शिव मंदिर अस्तित्व में आया। विशेषज्ञों की मानें तो शिव मंदिर निर्माण की अवधि में इस क्षेत्र में बौद्ध विहार के अवशेष मिलेे थे। इन अवशेष का प्रदर्शन शिव मंदिर में किया गया। हालांकि बौद्ध विहार से प्राप्त बुद्ध प्रतिमा को राज्य संग्रहालय भुवनेश्वर ओड़िशा में प्रदर्शित किया गया।

   मंदसरु कुटी: मंदसरु कुटी वस्तुत: एक शानदार एवं अति प्राचीन चर्च है। फूलबानी से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित मंदसरु कुटी वस्तुत: एक अति दर्शनीय गांव है। इस गांव के बाहर एक सुन्दर चर्च है।

    इस चर्च को मंदसरु कुटी के नाम से जाना पहचाना जाता है। चौतरफा पहाड़ियों से घिरा मंदसरु अति दर्शनीय क्षेत्र है। घाटियों-वादियों का यह इलाका वस्तुत: एक शानदार पिकनिक स्पॉट है। पहाड़ों की गूंजती प्रतिध्वनि पर्यटकों को रोमांचित करती है। 
   बेलघर: बेलघर वस्तुत: प्राकृतिक सौन्दर्य का अद्भुत दर्शन कराता है। कुटिया खोटा जनजातियों की बहुलता वाला यह इलाका अपनी एक अलग संस्कृति एवं रहन-सहन को दर्शाता है। दोस्ताना स्वभाव बेलघर के बाशिंदों की खासियत है। समुद्र तल से करीब 2555 फुट की ऊंचाई पर स्थित बेलघर को रोमांचक यात्राओं के लिए जाना पहचाना जाता है। निकट ही कोटा वन्य जीव अभयारण्य है।

    कलिंग घाटी की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बीजू पटनायक इण्टरनेशनल एयरपोर्ट भुवनेश्वर है। एयरपोर्ट से कलिंग घाटी की दूरी करीब 220 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन बरहामपुर जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी कलिंग घाटी की यात्रा कर सकते हैं।
20.163020,84.415580

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