उदयगिरि एवं खण्डगिरि गुफाएं: अनुपम सौन्दर्य
उदयगिरि एवं खण्डगिरि गुफाएं को प्राचीन काल की स्थापत्य कला की अनुपम
धरोहर कहा जाना चाहिए। वस्तुत: यह प्राचीन गुफाएं ऋषि-मुनियों के जीवन,
रहन-सहन को रेखांकित करती हैं।
भारत के उड़ीसा प्रांत के भुवनेश्वर के निकट स्थित यह प्राचीन गुफाएं
राष्ट्रीय धरोहर हैं। भुवनेश्वर के सन्निकट वस्तुत: यह दो पहाड़ियां है। इन
पहाड़ियों को उदयगिरि एवं खण्डगिरि के नाम से जाना एवं पहचाना जाता है।
इन पहाड़ियों को आंशिक तौर पर गुफाओं का स्वरूप दिया गया है। इन गुफाओं का
ऐतिहासिक, पौराणिक एवं पुरातात्विक महत्व है। प्राचीन शिलालेख में इसका
वर्णन कुमारी पर्वत के तौर पर किया गया है। खास यह कि यह उदयगिरि एवं
खण्डगिरि गुफाएं एक दूसरे से करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो उदयगिरि एवं खण्डगिरि गुफाएं महाराष्ट्र के
आैरंगाबाद स्थित अजंता एवं एलोरा गुफाओं जैसी प्रसिद्ध तो नहीं किन्तु इनका
निर्माण अति सुन्दर ढं़ग से किया गया है। लिहाजा उदयगिरि एवं खण्डगिरि
गुफाएं अति दर्शनीय हैं।
मान्यता है कि प्राचीनकालीन इन गुफाओं का निर्माण राजा खारवेल के शासनकाल
में किया गया था। खास यह कि यह गुफाएं जैन संतों-साधुओं की निर्वाण यात्रा
को भी दर्शाती हैं। इतिहास, वास्तुकला, कलात्मकता एवं धार्मिक दृष्टि से भी
इन गुफाओं का विशेष महत्व है।
उदयगिरि में 18 गुफाएं एवं खण्डगिरि में 15 गुफाएं हैं। इनमें से कुछ
गुफाएं प्राकृतिक हैं तो वहीं कुछ गुफाओं का निर्माण जैन मुनियों ने किया
था। पत्थर की विशाल चट्टानों को काट कर जैन मंदिरों की संरचना की गयी। यह
मंदिर वास्तुकला के अनुपम अलंकरण हैं। शिलालेख में इन गुफाओं को 'लेना" कहा
गया है।
खास यह कि गुफाओं के प्रवेश द्वार की संरचना दरवाजों जैसी है। खास यह भी
है कि रात में गुफाएं चांदनी से रोशन रहती हैं। मान्यता है कि यह असाधारण
गुफाएं जैन मुनियों की तप स्थली रहीं हैं।
सुगंधित फूलों की सुगंध, पक्षियों का कलरव-कोलाहल, शांत शीतल हवाओं के
झोके, शीतल चन्द्रमा का सानिध्य एवं प्राकृतिक सौन्दर्य उदयगिरि एवं
खण्डगिरि गुफाएं की शान एवं शोभा हैं।
सत्य, शांति, प्राकृतिक सौन्दर्य, मोक्ष एवं आत्मज्ञान का यह स्थान सभी
दृष्टि से अति महत्वपूर्ण एवं दर्शनीय है। उदयगिरि गुफाएं करीब 135 फुट
ऊंची एवं खण्डगिरि गुफाएं करीब 118 फुट ऊंची हैं। प्राचीनकाल की यह गुफाएं
वस्तुत: बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के प्रभाव को दर्शाती एवं रेखांकित करती
हैं।
वास्तुकला की यह अनुपम कलाकृति अति दर्शनीय हैं। हालांकि यह दोनों गुफाएं
अपनी एक अलग विशिष्टता रखती हैं। उदयगिरि गुफाओं का फर्श पत्थर की समतल
शिलाओं से आच्छादित है। सीढ़ीनुमा पत्थरों पर चलते-चलते 18 गुफाओं के दर्शन
हो जाते हैं।
रानी गुम्फा को रानी गुफा कहा जाता है। यह दो मंजिला गुफा है। यह गुफा
ध्वनि संतुलन की विशिष्टता के लिए खास प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इस गुफा
का उपयोग प्राचीनकाल में मंत्र उच्चारण एवं रंगमंचीय गतिविधियों के लिए
किया जाता था।
गुफा में रथ पर सवार सूर्य देव की प्रतिमा विद्यमान है। इस गुफा के निचले
हिस्से में एक विशाल कक्ष है। इसमें तीन प्रवेश स्थल वाला विशाल बरामदा है।
चतुर्भुज आकार की शिला को काट कर इसकी संरचना की गयी है।
गुफाओं में बेहद सुन्दर एवंं दर्शनीय नक्काशी है। इनमें तोरण, जीव-जन्तुओं
के दृश्य, धार्मिक एवं राजसी परिदृश्य बेेहद आकर्षक हैं। नृत्य एवं संगीत
की विशिष्टता भी पर्यटकों को प्रभावित करती है।
खण्डगिरि गुफाएं भी अपना एक अलग आकर्षण रखती हैं। पहली एवं दूसरी गुफाओं
को तातोबा गुम्फा के नाम से जाना एवं पहचाना जाता है। यह गुफा प्रवेश स्थल
पर रक्षकों, दो बैलों एवं सिंहों से सुसज्जित हैं।
प्रवेश द्वार पर तोरण पर तोते की आकृति है। एक अन्य गुफा अनंत गुफा कहलाती
है। इसमें महिलाओं, हाथियों, खिलाड़ियों एवं फूल उठाए हंसों की मूर्तियां
दर्शनीय हैं। तेंतुली गुफा भी एक खास आकर्षण है। खण्डगिरि गुफाएं दो मंजिला
हैं।
सामान्य तौर से काट छांट कर संरचित यह गुफा अपना एक अलग आकर्षण रखती हैं।
इनमें खास तौर से ध्यान गुफा, नया मुनि गुफा, बाराभुजा गुफा, त्रिशुल गुफा,
अम्बिका गुफा, ललतेंदुकेसरी गुफा आदि इत्यादि हैं।
खण्डगिरि गुफाओं की पिछली दीवारोें पर जैन तीर्थंकरों, भगवान महावीर एवं
भगवान पाश्र्वनाथ की नक्काशी वाले मूर्तिशिल्प अति दर्शनीय हैं। एकादशी
गुफा भी काफी कुछ खास है। खास यह कि उदयगिरि एवं खण्डगिरि गुफाओं की
स्थापत्य कला अति विशिष्ट एवं दर्शनीय है।
उदयगिरि एवं खण्डगिरि गुफाओं की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं।
निकटतम एयरपोर्ट बीजू पटनायक इण्टरनेशनल एयरपोर्ट भुवनेश्वर एयरपोेर्ट है।
निकटतम रेलवे स्टेशन भुवनेश्वर जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी उदयगिरि
एवं खण्डगिरि गुफाओं की यात्रा कर सकते हैं।
20.278940,85.731680
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