कैलाश मंंदिर : अद्भुत स्थापत्य कला
कैलाश मंदिर की संरचना को अनूठा वास्तुशिल्प कहा जाना चाहिए। जी हां, कैलाश मंदिर की स्थापत्य कला शानदार एवं अद्भुत है।
लिहाजा इसे एक अति दर्शनीय एवं विलक्षण स्मारक माना जाता है। संसार की इस अनूूठी संरचना की विलक्षणता अति दर्शनीय है। भारत के महाराष्ट्र के आैरंगाबाद स्थित एलोरा गुफा का यह दिव्य-भव्य कैलाश मंदिर बेहद अद्भुत है। राष्ट्रकूट के राजवंश नरेश कृष्ण ने इस शानदार संरचना को आकार प्रकार दिया था।
खास यह कि एक विशाल पत्थर को सलीके से काट-छांट कर इस दिव्य-भव्य स्मारक को आकार दिया गया था। खास यह कि किसी भी संरचना को आकार-प्रकार देेनेे के लिए पत्थरों को एक दूसरे के उपर जमाया जाता है लेकिन कैलाश मंदिर के निर्माण में इस खास तकनीकि के बजाय विपरीत दिशा में कार्य किया गया।
पर्वत को काट कर खोखला कर मंदिर, गर्भगृह, स्तम्भ, द्वार, नक्काशी आदि बनायी गयी। आैरंगाबाद स्थित लयण श्रंखला का यह शानदार स्मारक अति दर्शनीय एवं ख्याति प्राप्त है। एक समूचे पर्वत को काट कर द्रविड़ शैली में कैलाश मंदिर की संरचना की गयी है।
समग्रता में यह शानदार स्मारक 276 फुट लम्बा एवं 154 फुट चौड़ा है। विशेषज्ञों की मानें तो यह विशाल मंदिर पर्वत की केवल एक चट्टान को काट कर संरचित किया गया था। खास यह कि इस संरचना को उपर से नीचे की ओर काट कर किया गया है। इसके निर्माण में खण्ड को काट कर अलग किया गया था।
इस दिव्य-भव्य संरचना की ऊंचाई करीब 90 फुट है। मंदिर की वाह्य क्षेत्र एवं आंतरिक क्षेत्र सुन्दर एवं आकर्षक मूर्ति शिल्प से आच्छादित है। चौतरफा मूर्ति एवं अलंकरणों की विशिष्टताओं वाला यह स्मारक वैश्विक ख्याति रखता है।
इस मंदिर में तीन दिशाओं में कोठरियों की शानदार श्रंखला विद्यमान है। सामने खुले मण्डप में नंदी की विशाल छवि विद्यमान है। इसके दोनों ओर विशालकाय हाथी एवं स्तम्भ बने हैं। यह अति दर्शनीय हैं। यह संरचना भारतीय वास्तुशिल्प के कला कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण है।
एलोरा स्थित लयण श्रंखला में स्थित कैलाश मंदिर वस्तुत: भगवान शिव को समर्पित है। द्रविड़ शैली की इस संरचना में भगवान शिव के भव्य दिव्य दर्शन होते हैंं। सातवीं सदी के इस दिव्य-भव्य मंदिर की संरचना को लेकर पुरातत्वविद भी आश्चर्यचकित हैं।
एलोरा आैरंगाबाद की 34 गुफाओं में कैलाश मंदिर अद्भुत एवं विलक्षण है। विशेषज्ञों की मानेें तो कैलाश मंदिर की संरचना को आकार देने में करीब 18 वर्ष का समय लगा था। अद्भुत डिजाइन का यह मंदिर वैश्विक ख्याति रखता है।
महीन डिजाइन के छज्जे, सीढ़ियां, नालियां, टावर, गुप्त आश्रय स्थल, गर्भगृह आदि इत्यादि अत्यधिक दर्शनीय हैं। इसे प्राचीन काल की इंजीनियरिंग का कमाल कह सकते हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो अब इस तरह की संरचना तैयार करने में सदियां लग जायेंगी। विशेषज्ञों की मानें तो कैलाश मंदिर को वस्तुत: हिमालय के कैलाश का स्वरूप देने का प्रयास किया गया था। शायद इसी लिए इसे कैलाश मंदिर की ख्याति हासिल है।
खास यह कि इस विहंगम संरचना में र्इंट एवं पत्थरों के टुकड़ों का कहीं कोई इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह संरचना प्राचीन काल की वास्तु कला का अनुपम उदाहरण है। दुनिया इस शानदार संरचना को देख कर मुग्ध है।
कैलाश मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट आैरंगाबाद एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन आैरंगाबाद जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी कैलाश मंदिर एलोरा की यात्रा कर सकते हैं।
20.023200,75.175800
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