Thursday, 28 November 2019

रत्नागिरी: अरब सागर की शान एवं शोभा

   रत्नागिरी को पौराणिक एवं ऐतिहासिक धरोहर का शहर कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। अरब सागर की शान एवं शोभा रखने वाला रत्नागिरी अद्भुत एवं विलक्षण है। 

   रत्नागिरी खास तौर से समुद्र तटों, पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्मारकों, लाइट हाउस सहित असंख्य खूबियां रखता है। समुद्र तट के शौकीन पर्यटकों के लिए रत्नागिरी किसी स्वर्ग से कम नहीं है। भारत के महाराष्ट्र राज्य का रत्नागिरी शहर प्राकृतिक सौन्दर्य का विशिष्ट आयाम है।

   शायद यही कारण है कि रत्नागिरी वैश्विक पर्यटकों के विशेष आकर्षण का केन्द्र रहता है। रत्नागिरी समुद्र तटों के साथ ही अल्फांसो आम के लिए दुनिया भर मेें जाना पहचाना जाता है। 
   अल्फांसो आम को भारतीय आम का राजा भी कहा जाता है। मुम्बई से करीब 350 किलोमीटर एवं पुणे से करीब 308 किलोमीटर दूर स्थित रत्नागिरी वस्तुत: अरब सागर का एक शानदार बंदरगाह शहर है। 

  महाराष्ट्र के दक्षिण-पश्चिम इलाके में स्थित रत्नागिरी शहर सहयाद्री पर्वतमालाओं से घिरा है। सहयाद्री पर्वत श्रंखलाओं का प्राकृतिक सौन्दर्य अति दर्शनीय है। खास यह भी है कि रत्नागिरी बाल गंगाधर तिलक की जन्मस्थली है। सहयाद्री की खूबसूरत पहाड़ियां रत्नागिरी की शान एवं शोभा हैं। 

   बीजापुर एवं सतारा शासकों की राजधानी रह चुका रत्नागिरी पौराणिक धरोहरों के लिए भी खास तौर से जाना पहचाना जाता है। रत्नागिरी कोंकण का एक अति महत्वपूर्ण हिस्सा है। 
  पर्यटक रत्नागिरी की यात्रा पर एक खास रोमांच का एहसास करते हैं। पर्यटक रत्नागिरी पर सुन्दर समुद्र तटों, ऐतिहासिक इमारतों एवं शांत मंदिरों की विशिष्टता रखता है। यह आकर्षण पर्यटकों को मुग्ध कर लेता है। 

   रत्नागिरी का मांडवी बीच अति दर्शनीय एवं प्रसिद्ध है। गणेशगुले बीच, भटवे बीच, गणपति बुले बीच आदि इत्यादि रत्नागिरी का खास आकर्षण हैं। समुद्र तटों के अलावा रत्नागिरी किला, थिबाव पैलेस, रत्नागिरी प्रवेश द्वार, गणपति मंदिर, विजय दुर्ग किला, जयगढ़ किला एवं लाइट हाउस बेहद दर्शनीय एवं आकर्षक हैं।
   रत्नागिरी का एक मुख्य आकर्षण अली संग्रहालय है। देवी भगवती का मंदिर भी खास है। इसका वास्तुशिल्प बेहद सुन्दर है। रत्नागिरी की यात्रा का सबसे बेहतरीन समय अक्टूबर से फरवरी एवं नवम्बर से जनवरी की अवधि है। 
   जयगढ़ किला: जयगढ़ किला की संरचना 17वीं शताब्दी में हुई थी। जयगढ़ किला वस्तुत: एक खड़ी पहाड़ी पर बना सुन्दर वास्तुशिल्प है। संगमेश्वर नदी के तट पर स्थित यह शानदार किला अति दर्शनीय है।


    रत्नागिरी किला: रत्नागिरी किला का निर्माण बहमनी काल में हुआ था। इस किला का आकार प्रकार घोड़े की नाल पर आधारित है। इसकी लम्बाई 1300 मीटर एवं चौड़ाई 1000 मीटर है। यह किला तीन दिशाओं में समुद्र से घिरा है। इस किला का एक बुर्ज सिद्धा लाइट हाउस के रूप में कार्य करता है। 
  इस दिव्य भव्य किला में देवी भगवती का शानदार मंदिर है। खास यह कि किला की तीन दिशाओं में समुद्र का खारा जल होने केे बावजूद किला के कुंआ का जल मीठा है।  
   बौद्ध मठ: बौद्ध मठ की विशालता देखते ही बनती है। दो मंजिला इस मठ में एक विशाल आंगन है। बौद्ध भिक्षुओं के प्रवास के लिए कक्षों की बेहतरीन संख्या खास है। मंदिरों के अलावा हजारों की संख्या में स्तूप एवं असंख्य मूर्तियां बौद्ध मठ की शान एवं शोभा हैं। 
    थीवा महल: थीवा महल का निर्माण 1910 में हुआ था। यह महल अपनी विशिष्टताओं के लिए जाना पहचाना जाता है। राजवंश की समाधि भी इस महल में हैं।
  मालगूंड: मालगूंड वस्तुत: प्रसिद्ध मराठी कवि केशवसूत का जन्म स्थान है। वस्तुत: यह एक छोटा सा गांव है। केशवसूत के घर को अब एक स्मारक का स्वरूप दे दिया गया है।
   पावस: पावस एक आध्यात्मिक स्थान है। यह स्थान महाराष्ट्र के आध्यात्मिक गुरु स्वामी स्वरूपानन्द से ताल्लुक रखता है। इस दिव्य-भव्य स्थान को एक आश्रम का स्वरूप दिया गया है। 
   वेलनेश्वर: वेलनेश्वर रत्नागिरी से करीब 170 किलोमीटर दूर स्थित है। एक शानदार समुद्र तट पर स्थित वेलनेश्वर अति दर्शनीय है। नारियल के शानदार वृक्षों से आच्छादित वेलनेश्वर में एक अति प्राचीन शिव मंदिर है। यह मंदिर शैव धर्म से ताल्लुक रखता है।
   गणपतिपुलेे: गणपतिपुले रत्नागिरी से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का दिव्य भव्य मंदिर है। इसे स्वयंभू मंदिर भी कहते हैं। मान्यता है कि गणेश जी के दर्शन मात्र से इच्छाओं की पूर्ति होती है।
   रत्नागिरी की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट छत्रपति शिवाजी महाराज इण्टरनेशनल एयरपोर्ट मुम्बई है। एयरपोर्ट से रत्नागिरी की दूरी करीब 346 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेेशन रत्नागिरी जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी रत्नागिरी की यात्रा कर सकते हैं।
16.992500,73.294197

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