मैसूर : महलों का इन्द्रधनुषी सौन्दर्य
पौराणिक शहर मैसूर के इन्द्रधनुषी सौन्दर्य का कोई मुकाबला नहीं। जी हां, ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से मैसूर अति समृद्धशाली है।
भारत के कर्नाटक का यह शानदार एवं जानदार शहर पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। कारण चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की निराली छटा पर्यटकों को मुग्ध करती है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से करीब 150 किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में तमिलनाडु की सीमा से सटा मैसूर उत्सव एवं उल्लास के लिए बेहद प्रसिद्ध है।
खास तौर मैसूर का दशहरा देश दुनिया में विशेष ख्याति रखता है। मैसूर की स्थापत्य कला पर्यटकों को खास तौर सेे मुग्ध करती है। मैसूर की खासियत यह है कि मैसूर में राजमहलों की एक शानदार श्रंृखला विद्यमान है। इन राजमहलों का सौन्दर्य देश विदेश के पर्यटकों को स्वत: आकर्षित करता है।
मैसूर महल, जगन मोहन पैलेस, जयलक्ष्मी पैलेस, ललिता पैलेस आदि इत्यादि मैसूर की शान एवं शोभा हैं। कर्ण झील चिड़ियाखाना मैसूर का मुख्य आकर्षण है। मैसूर रेल संग्रहालय ज्ञानवर्धक एवं अति दर्शनीय है।
वृंदावन गार्डेन में पर्यटक एक मखमली एहसास में खो जाते हैं। वृंदावन गार्डेन का म्युजिकल फाउण्टेन पर्यटकों पर एक जादूू सा कर देता है। संगीतमय फव्वारा की जलीय हलचल देख कर पर्यटक रोमांचित हो जातेे हैं।
खास यह कि मैसूर में रंग बिरंगे फूलों से सजे-धजे बाग-बगीचोें की एक लम्बी श्रंृखला विद्यमान है। जिससे मैसूर की खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं। मैसूर शहर से कुछ दूर स्थित कृष्ण राज सागर बांध एक आदर्श पर्यटन क्षेत्र है। इसे आदर्श पिकनिक स्पॉट भी कह सकते हैं।
इतना ही नहीं, मैसूर चिड़ियाघर की यात्रा करना तो पर्यटक भूल ही नहीं सकते। चामुंडी पहाड़ी एवं सोमनाथपुर का प्राकृतिक सौन्दर्य यात्रा का एक शानदार एवं न भूलने वाला संस्मरण बन जाता है। आकर्षण से लबरेज मैसूर को शायद इसी लिए धरती पर स्वर्ग कहा जाता है। खास यह कि मैसूर कलात्मकता का इन्द्रधनुषी रंग है।
मैसूर महल: मैसूर महल इस शहर का मुख्य आकर्षण है। शहर के मिर्जा रोड स्थित यह शानदार महल भारत के सबसे बड़े महलों में से एक है। विशेषज्ञों की मानें तो महाराजा वुडेयार का यह निवास था। बताते हैं कि मैसूर महल पहले लकड़ी का था लेकिन लकड़ी का महल जल जाने के कारण इस शानदार महल का निर्माण कराया गया था।
इसकी दर्शनीयता अति सुन्दर है। वर्ष 1912 में बने इस शानदार महल को ब्रिाटिश शिल्पकार हैनरी इर्विन ने डिजाइन किया था। कल्याण मण्डपम की कांच से बनी छत की इन्द्रधनुषी छटा पर्यटकों को मुग्ध करती है। स्वर्ण सिहांसन इस महल का खास आकर्षण है। बेशकीमती रत्नों से सुसज्जित इस सिंहासन को आम जनता को देखने के लिए दशहरा पर्व पर सार्वजनिक किया जाता है। इस महल का रखरखाव पुरातत्व विभाग के सुपुर्द है।
जगनमोहन महल: जगनमोहन महल वस्तुत: मैसूर की प्राचीन इमारतों में से एक है। तीन मंजिला इस इमारत को वर्ष 1915 में जयचमा राजेन्द्र आर्ट गैलरी का स्वरूप दे दिया गया था। खास यह कि इस शानदार कलादीर्घा में तंजौर एवं मैसूूर शैली की पेंटिंग्स, मूर्तियां एवं दुर्लभ वाद्ययंत्र संग्रहित हैं।
चामुंडी पहाड़ी: चामुंडी पहाडी मैसूर का मुख्य पर्यटन स्थल है। शहर से करीब 13 किलोमीटर दूर स्थित चामुंडी पहाडी एक धार्मिक स्थल भी है। पर्वत की चोटी पर देेवी चामुंडेश्वरी का मंदिर है। मंदिर द्रविड वास्तुकला की सुन्दर संरचना है।
सेंट फिलोमेना चर्च: सेंट फिलोमेना चर्च भारत के सबसे बड़े चर्च में एक है। इसका निर्माण 1933 में किया गया था। नियो गौथिक शैली का यह चर्च अति सुन्दर एवं दर्शनीय है। इसकी 175 फुुट ऊंची मीनारें दूर से दिखायी देती हैं। इसे सेंट जोसेफ चर्च के नाम से भी जाना पहचाना जाता है।
कृष्णा राज सागर बांध: कृष्णा राज सागर बांध शहर से उत्तर-पश्चिम दिशा में करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित है। इस बांध की लम्बाई 8600 फुट एवं ऊंचाई 130 फुट है। करीब 130 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैला यह बांध अति दर्शनीय है। इसी के एक कोने में वृंदावन गार्डेन है।
मैसूर चिड़ियाघर: मैसूर चिड़ियाघर विश्व के प्राचीन चिड़ियाघरों में से एक है। इसका निर्माण 1892 में शाही संरक्षण में हुआ था। शेर, हाथी, सफेद मोर, दरियाई घोड़ा, गैंडा, गोरिल्ला आदि इत्यादि चिड़ियाघर के मुख्य आकर्षण हैंं। यहां एक जैविक उद्यान भी है।
रेल संग्रहालय: रेेल संग्रहालय में रेलवे उपकरणों सहित प्राचीनकाल की रेेल गाड़ियों को दर्शनीयता के लिए रखा गया है। संग्रहालय में भाप से चलने वाले इंजन, सिगनल एवं 1899 में बना सभी सुविधाओं वाला महारानी का सैलून खास है। यहां का मुख्य आकर्षण चामुंडी गैलरी है। इसमें रेल के विकास क्रम को दर्शाया गया है। संग्रहालय खास तौर से बच्चों के ज्ञान को बढ़ाता है।
रेल संग्रहालय: रेेल संग्रहालय में रेलवे उपकरणों सहित प्राचीनकाल की रेेल गाड़ियों को दर्शनीयता के लिए रखा गया है। संग्रहालय में भाप से चलने वाले इंजन, सिगनल एवं 1899 में बना सभी सुविधाओं वाला महारानी का सैलून खास है। यहां का मुख्य आकर्षण चामुंडी गैलरी है। इसमें रेल के विकास क्रम को दर्शाया गया है। संग्रहालय खास तौर से बच्चों के ज्ञान को बढ़ाता है।
मैसूर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बेंंगलुरु एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट से मैसूर की दूरी करीब 139 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन मैसूर जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी मैसूर की यात्रा कर सकते हैं।
12.295810,76.639381
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