Thursday, 1 August 2019

पाताल भुवनेश्वर : प्रकृति का तोहफा

   पाताल भुवनेश्वर को प्रकृति का शानदार तोहफा कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, पाताल भुवनेश्वर का कोना-कोना प्राकृतिक सौन्दर्य से लबरेज है। 

  खास यह कि पाताल भुवनेश्वर का धार्मिक एवं ऐतिहासिक विशेष महत्व है। इस स्थान से हिमालय की दिव्यता-भव्यता के साक्षात दर्शन होते हैं। भारत के उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ स्थित पाताल भुवनेश्वर वस्तुत: एक शानदार एवं अति प्राचीन गुफा है। चूना पत्थर की यह प्राकृतिक गुफा अति दर्शनीय है। 

  गंगोलीहाट से करीब 14 किलोमीटर दूर स्थित पाताल भुवनेश्वर खास तौर से प्राकृतिक संरचना के लिए जाना पहचाना जाता है। करीब 90 फुट गहराई पर स्थित इस गुफा मेें भव्य-दिव्य देव दर्शन होते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इस विशाल एवं विहंगम गुफा की खोज राजा ऋतुपर्णा ने की थी। सूर्य वंश के यह राजा त्रेता युग में अयोध्या में शासन करते थे। 

   विशेषज्ञों की मानें तो स्कंद पुराण में इस स्थान का वर्णन है कि भगवान शिव पाताल भुवनेश्वर में विराजमान रहते हैं। किवदंती है कि अन्य देवी-देेवता महादेव की स्तुति करने यहां आते हैं। मान्यता है कि राजा ऋतुपर्णा एक जंगली हिरण का पीछा करते-करते इस गुफा में प्रविष्ट हुए तो वह आश्चर्यचकित रह गये।

  विशेषज्ञों की मानें तो राजा ऋतुपर्णा ने महादेव सहित 33 कोटि देवताओं के साक्षात दर्शन किये थे। द्वापर युग में पाण्डव बंधुओं ने गुफा में चौपड़ खेला था। आदि शंकराचार्य ने गुफा में तांबे का भव्य शिवलिंग स्थापित किया था। 
   इस दिव्य-भव्य गुफा में प्रवेश करने के लिए लोहे की जंजीरों का सहारा लेना पड़ता है। पत्थरों की इस गुफा में पानी का रिसाव होता रहता है।

   गुफा का प्रवेश द्वार बेहद चिकना है। लिहाजा बेहद सावधानी से प्रवेश करना होता है। पाताल भुवनेश्वर गुफा में शेषनाग के आकार का पत्थर है। ऐसा प्रतीत होता है कि शेषनाग ने पृथ्वी को पकड़ रखा है। खास यह कि इस गुफा का एक शिवलिंग ऐसा है, जिसका आकार बढ़ता रहता है। 

  मान्यता है कि भविष्य में शिवलिंग का आकार गुफा की छत का स्पर्श कर लेगा। पाताल भुवनेश्वर गुफा की दीवारों पर हंस का अंकन है। मान्यता है कि हंस की यह आकृति ब्रह्मा जी के हंस की है। गुफा में हवन कुण्ड भी है। कहा जाता है कि इस कुण्ड में जनमेजय ने नाग यज्ञ किया था। जिसमें सभी सांप जल कर भस्म हो गये थे।

   खास यह कि इस गुफा में एक हजार पैर वाला हाथी भी दर्शित है। पाताल भुवनेश्वर गुफा की दिव्यता-भव्यता का कोई जोड़ नहीं है। खास तौर से देखें तो इस गुफा में केदारनाथ, बद्रीनाथ एवं अमरनाथ के दर्शन भी होते हैं। 

   बद्रीनाथ की बद्री पंचायत की शिलारूप मूर्तियां भी हैं। इनमें खास तौर से यम-कुबेर, वरुण, लक्ष्मी-गणेश तथा गरुण आदि हैं। तक्षक नाग की आकृति भी गुफा की एक चट्टान पर दर्शित है। इस पंचायत में बाबा अमरनाथ की गुफा भी है। इसी गुफा में बाबा कालभैरव के भी दर्शन होते हैं। मान्यता है कि कालभैरव के सम्पूर्ण दर्शन से श्रद्धालुओं को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

   पाताल भुवनेश्वर वस्तुत: गुफाओं का एक शानदार संग्रह या समूह है। पाताल भुवनेश्वर का बाह्य क्षेत्र भी अति दर्शनीय है। पाताल भुवनेश्वर से हिमालय की दिव्यता-भव्यता के साक्षात दर्शन होते हैं।

  ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे पर्यटक प्रकृति की गोद में हों। चौतरफा हिम शिखर दिखते हैं तो घाटियां-वादियां पर्यटकों को मुग्ध कर लेती हैं। आैषधीय वनस्पतियों से आच्छादित सघन वन क्षेत्र पर्यटकों को भरपूर आक्सीजन प्रदान करते हैं।

  ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे फेफड़ों को पंख लग गये हों। बादलों की घुमक्कड़ी देख कर पर्यटक रोमांच से भर उठते हैं।

   पाताल भुवनेश्वर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट पंतनगर एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट से पाताल भुवनेश्वर की दूरी करीब 244 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी पाताल भुवनेश्वर की यात्रा कर सकते हैं।
29.687870,80.062030

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