Tuesday, 13 August 2019

नागरहोल अभयारण्य : एशियाई हाथियों का आशियाना

   नागरहोल वन्य जीव अभयारण्य को एशियाई हाथियों का आशियाना कहा जाना चाहिए। जी हां, इस शानदार एवं प्राकृतिक सम्पदा समृद्ध अभयारण्य में एशियाई हाथियों की चिंघाड़ वैश्विक पर्यटकों को खास तौर से आकर्षित करती है।

   शायद इसीलिए नागरहोल वन्य जीव अभयारण्य अपनी खासियत के लिए वैश्विक ख्याति रखता है। भारत के कर्नाटक के मैसूर एवं कोडागू सीमा क्षेत्र में आने वाला यह विहंगम अभयारण्य में एशियाई हाथियों के झुण्ड स्वच्छंद विचरण करते दिखते हैं। 

   बारिश में इस अभयारण्य में रंगों की इन्द्रधनुषी दुनियां खास तौर से दर्शित होती है। कारण प्रवासी पक्षियों के रंग-विरंगे स्वरूप अभयारण्य को इन्द्रधनुषी बना देते हैं। यह दृश्य अति दर्शनीय होता है। पक्षियों का कलरव एवं कोलाहल से अभयारण्य का परिवेश एक सुमधुर संगीत से अनुगूंजित हो उठता है। 

  खास तौर से एक अनोखा वातावरण सृजित होता है। पशु एवं पक्षी प्रेमियों के लिए यह किसी स्वर्ग से कम नहीं होता। इस शानदार एवं सुन्दर नागरहोल वन्य जीव अभयारण्य को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है। खास यह कि इसे राजीव गांधी राष्ट्रीय उद्यान के रूप में भी जाना पहचाना जाता है। 

   विशेषज्ञों की मानें तो राजा रजवाड़ों के शासनकाल में नागरहोल वन्य जीव अभयारण्य मैसूर राजघराने का शिकारगाह था। बाद में इसे शासकीय अभयारण्य में तब्दील कर दिया गया। करीब 640 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला यह शानदार अभयारण्य वस्तुत: दक्कन पठार का हिस्सा है।

   नागरहोल नदी इस अभयारण्य का मुख्य आकर्षण है। इसे अभयारण्य के वन्य जीवों की लाइफ लाइन भी कह सकते हैं। नागरहोल नदी आगे चल कर कबीनी नदी में समाहित हो जाती है। 
  इस नदी पर बने बांध के कारण नागरहोल वन्य जीव अभयारण्य के एक हिस्से में एक विशाल झील ने आकार ले लिया है। इस झील की एक दिशा में बांदीपुर टाइगर रिजर्व है। 

   विशेषज्ञों की मानें तो राजसी काल के बाद वर्ष 1955 में इसे शासकीय अभयारण्य का स्वरूप दिया गया। खास यह कि इसे वर्ष 1999 में देश के 37 वें टाइगर रिजर्व के रूप में घोषित किया गया।

   नागरहोल वन्य जीव अभयारण्य में एशियाई हाथियों के अलावा भालू, तेंदुए, बाघ, जंगली कुत्ते, जंगली सुअर, सांभर, चार सींग वाले हिरन, चित्तीदार हिरन, बार्किंग हिरन आदि इत्यादि शान एवं शोेभा हैं। इस अभयारण्य में शेर एवं काले हिरन भी हैं।  
   सफारी का आनन्द: पर्यटक नागरहोल वन्य जीव अभयारण्य में सफारी का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। सफारी से जंगली पशु पक्षियों कोे निकट से देखने का बेहद रोमांचक अनुभव होता है। खास यह कि सफारी में पर्यटक एक निश्चित सीमा क्षेत्र में ही भ्रमण कर सकते हैं।
   ब्रह्मगिरी अभयारण्य: पर्यटक नागरहोल वन्य जीव अभयारण्य की यात्रा करें तो निकट ही ब्रह्मगिरी अभयारण्य का रोमांचक अनुभव भी अवश्य हासिल करें। करीब 181 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले ब्राह्मगिरी अभयारण्य कुट्टा एवं माकुट्टा के मध्य स्थित है। 
   इपरु वॉटर फॉल्स : इपरु वॉटर फॉल्स वस्तुत: ब्राह्मगिरी पर्वत की तराई पर स्थित एक शानदार झरना है। वस्तुत: यह इलाका अभयारण्य एवं पर्वतों का प्रवेश द्वार माना जाता है। 
  बारिश के मौसम में यहां का परिवेश अत्यंत सुहावना हो जाता है। निकट ही ईश्वर मंदिर है। मान्यता है कि इस स्थान पर भगवान श्रीराम ने शिवलिंग की पूजा अर्चना की थी।

   कुट्टा : कुट्टा इस इलाके का अत्यंत मनोरम एवं धार्मिक स्थान है। मान्यता है कि देवी काली ने यहां पर निम जाति के कुरुबस से विवाह किया था। उनके पुत्र का नाम कुट्टा था। लिहाजा इस स्थान को कुट्टा के नाम से जाना पहचाना जाता है।

    नागरहोल वन्य जीव अभयारण्य की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट मैसूर है। मैसूर एयरपोर्ट से नागरहोल वन्य जीव अभयारण्य की दूरी करीब 96 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन मैसूर जंक्शन है। रेलवे स्टेशन से नागरहोल वन्य जीव अभयारण्य की दूरी करीब 80 किलोमीटर है। पर्यटक सड़़क मार्ग से भी नागरहोल वन्य जीव अभयारण्य की यात्रा कर सकते हैं।
12.301770,76.664124

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