Wednesday, 14 August 2019

भद्रा वन्य जीव अभयारण्य: वनस्पतियों की सुगंध

   भद्रा वन्य जीव अभयारण्य को वस्तुत: आैषधीय वनस्पतियों का भण्डारण कहा जाना चाहिए। जी हां, भद्रा वन्य जीव अभयारण्य में दुर्लभ आैषधीय वनस्पतियां भी खास तौर से पुष्पित एवं पल्लवित हैं। 

   लिहाजा वनस्पतियों की सुगंध से परिवेश महकता रहता है। शायद इसी लिए इस वन्य जीव अभयारण्य को विशेष माना जाता है। भारत के कर्नाटक प्रांत के जिला चिकमंगलूर का यह शानदार अभयारण्य वस्तुत: बाघ संरक्षित क्षेत्र है।

   मैसूर की तत्कालीन सरकार ने वर्ष 1951 में जगार घाटी वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया था। वर्ष 1974 में जगार घाटी वन्य जीव अभयारण्य का नाम बदल कर भद्रा वन्य जीव अभयारण्य कर दिया गया। यह अभयारण्य भद्रावती से करीब 23 किलोेमीटर दक्षिण एवं चिकमंगलूर से पश्चिम दिशा में करीब 38 किलोमीटर तक विस्तारित है। 

   भद्रा वन्य जीव अभयारण्य की खासियत है कि वन्य जीवों के साथ ही आैषधीय वनस्पतियों का संरक्षण क्षेत्र भी है। विशेषज्ञों की मानें तो 120 से अधिक आैषधीय प्रजातियों की वनस्पतियां इस अभयारण्य में सुरक्षित एवं पल्लवित हैं।

  भौगोलिक दृष्टि से देखें तो भद्रा वन्य जीव अभयारण्य पश्चिमी घाट का हिस्सा है। भद्रा वन्य जीव अभयारण्य बेहद दर्शनीय एवं प्रकृति का एक शानदार उपहार है। इस शानदार अभयारण्य का मुख्य आकर्षण भद्रा नदी है।

   फोटोग्राफर्स, प्रकृति एवं वन्य जीव प्रेेमियों के लिए भद्रा वन्य जीव अभयारण्य किसी स्वर्ग से कम नहीं है। समुद्र तल से करीब 1875 मीटर ऊंचाई पर स्थित भद्रा वन्य जीव अभयारण्य साहसी गतिविधियों के लिए भी जाना पहचाना जाता है। 

   इस शानदार अभयारण्य में हाथियों के झुण्ड स्वच्छंद विचरण करते देखे जा सकते हैं। एशियाई हाथियों के अलावा इस अभयारण्य में तेंदुआ, बाघ, सांभर, जंगली सुअर, चीतल, हिरन, साही आदि इत्यादि हैं। पक्षियों की तो असंख्य प्रजातियां इस अभयारण्य में पल्लवित हैं।

    विशेषज्ञों की मानें तो इस अभयारण्य मेें 300 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां हैं। इनमें खास तौर से पन्ना कबूतर, दक्षिण हरा शाही कबूतर, काला कठफोड़वा, मालाबार परकेट एवं पहाड़ी मैना आदि इत्यादि हैं। पक्षियों के इन्द्रधनुषी रंग देख कर पर्यटक मुग्ध हो जाते हैं। 

    बारिश के मौसम में भद्रा वन्य जीव अभयारण्य का मिजाज ही बदला दिखता है। चौतरफा प्रवासी पक्षियों का बसेरा दिखता है। पक्षियों का कोलाहल, कोकिल कलरव संगीत की एक मीठी तान सुनाता है। विशेषज्ञों की मानें तो इस शानदार अभयारण्य में तीन दर्जन से अधिक बाघ वंश हैं। 

   वन्य जीवों की विलुप्त प्रजातियां भी इस अभयारण्य में खास तौर से संरक्षित हैं। उड़ने वाली गिलहरी भी इस अभयारण्य का खास आकर्षण है। खास यह कि भद्रा वन्य जीव अभयारण्य में कई ऊंची पर्वत चोटियां हैं।

    लिहाजा पर्यटक यहां पर्वतारोहण का भी आनन्द ले सकते हैं। इस इलाके की सबसे अधिक ऊंची पर्वत चोटी हेब्बे गिरी शिखर है। भद्रा वन्य जीव अभयारण्य के मखमली घास के मैदान बेहद दर्शनीय है। 
   सफारी का आनन्द: भद्रा वन्य जीव अभयारण्य की यात्रा के दौरान पर्यटक सफारी का भरपूर आनन्द ले सकते हैं। हालांकि सफारी का आनन्द पर्यटक भद्रा वन्य जीव अभयारण्य के एक निर्धारित सीमा क्षेत्र में ही ले सकते हैं। सफारी भ्रमण के दौरान पर्यटक वन्य जीवों को निकटता से देख सकते हैं।

    भद्रा वन्य जीव अभयारण्य की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट मंगलूर एयरपोर्ट है। मंगलूर एयरपोर्ट से भद्रा वन्य जीव अभयारण्य की दूरी करीब 180 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन कदूर हासन जंक्शन है। कदूर हासन जंक्शन से भद्रा वन्य जीव अभयारण्य की दूरी करीब 83 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी भद्रा वन्य जीव अभयारण्य की यात्रा कर सकते हैं।
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