Sunday, 19 May 2019

झांसी का किला: सुन्दर स्थापत्य कला

   झांसी का किला कोे एक शानदार राष्ट्रीय स्मारक कहा जाना चाहिए। जी हां, देश मे स्वाधीनता आंदोलन में झांसी का किला की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

  इस ऐतिहासिक स्मारक की शानदार एवं सुन्दर संरचना देश विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती है। भारत के उत्तर प्रदेश के शहर झांसी में स्थित झांसी का किला अद्भुत एवं अद्वितीय है। झांसी में बंगरा पर्वत पर स्थित यह किला वास्तुकला का बेजोड़ उदाहरण है। 

  झांसी का किला वस्तुत: रानी लक्ष्मीबाई के पराक्रम के लिए खास तौर से प्रसिद्ध है। इस विशाल दुर्ग का निर्माण ओरछा के बुंदेल राजा बीर सिंह जूदेव ने कराया था।
  खास यह कि करीब 25 वर्षों तक बुंदेल राजाओं ने यहां शासन किया था। इस विशाल दुर्ग पर समय-समय पर मुगल, मराठा एवं ब्रिाटिश हुकूमत का शासन रहा।

  विशेषज्ञों की मानें तो झांसी का किला में कई बार परिवर्तन किये गये। करीब 15 एकड़ में फैले इस विशाल किला में काफी कुछ अद्भुत एवं अद्वितीय है। 
  यह सभी स्थितियां इसे विलक्षण एवं अद्भुत बनाती हैं। झांसी का किला अपनी विरासत एवं विहंगमता के लिए वैश्विक स्तर पर खास प्रसिद्ध है।

  इस दिव्य-भव्य किला में 22 बुर्ज एवं विशाल रक्षा खांई हैं। खास यह कि नगर दीवार की ओर दस द्वार थे। इन दस द्वार को खंदेरो द्वार, दतिया, उन्नाव, झरना, लक्ष्मी, सागर, ओरछा, सैनवर एवं चांद दरवाजा के नाम से जाना पहचाना जाता है।
   झांसी का किला का आंतरिक क्षेत्र भी काफी खास है। आंतरिक क्षेत्र में बारादरी, पंचमहल, शंकरगढ़़, रानी का नियमित पूजा स्थल, शिव मंदिर एवं गणेश मंदिर आदि इत्यादि हैं। 

   खास तौर से गणेश मंदिर मराठा साम्राज्य एवं कलात्मकता का शानदार उदाहरण है। इसकी शानदार संरचना एवं पौराणिक महत्व को देखते हुए वर्ष 1938 में झांसी का किला को केन्द्रीय संरक्षण में ले लिया गया था।
  मराठा स्थापत्य कला का अद्भुत आकर्षण खास तौर से यहां दिखता है। कूदान स्थल, कड़क बिजली तोप झांसी का किला का विशेष आकर्षण है।

   इस दिव्य-भव्य किला में फांसी घर विशेष है। फांसी घर का उपयोग राजा गंगाधर के शासनकाल तक उपयोग किया जाता रहा। 
  इसके बाद रानी ने इसका उपयोग बंद करा दिया था। झांसी का किला के सबसे ऊंचे स्थल पर राष्ट्रीय ध्वज स्थल है। इस स्थल पर हमेशा तिरंगा लहराता रहता है।

  खास यह कि झांसी का किला से शहर झांसी का विशाल स्वरूप दर्शनीय है। किला का रखरखाव एवं अनुरक्षण भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन है। खास यह कि इस शानदार किला को शंकरगढ़ एवं बलवंत नगर केे नाम से भी जाना पहचाना जाता रहा है।

  करीब 22.7 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला झांसी का किला प्रारम्भ में चंदेल राजाओं के नियंत्रण में रहा। झांसी का खास महत्व ओरछा के राजा बीर सिंह देव के शासनकाल में बढ़ा।
  इस शासनकाल में झांंसी में अनेक प्रसिद्ध इमारतों का निर्माण हुआ। झांसी का किला में आकर्षक स्थानों की एक शानदार श्रंखला विद्यमान है। 

  इनमें खास तौर से रानी झांसी गार्डेन, शिव मंदिर, गुलाम गौस खान, मोती बाई एवं खुदा बक्श की मजार दर्शनीय हैं। यह किला प्राचीन वैभव, पराक्रम का शानदार उदाहरण एवं स्थापत्य कला की विलक्षण संरचना है। 
  रानी महल: रानी महल की साज सज्जा अति दर्शनीय है। खास तौर से महल को रंगों एवं चित्रकला से सजाया संवारा गया है। यहां मूर्तियों का विशाल संग्रह देखा जा सकता है। 

   झांसी संग्रहालय: झांसी संग्रहालय स्वाधीनता आंदोलन की पौराणिकता को दर्शाता है। इसे एक ऐतिहासिक धरोहर भी कहा जा सकता है। खास यह कि संग्रहालय बुंदेलखण्ड की शानदार झलक प्रस्तुत करता है। इसमें चंदेल शासनकाल के हथियारों, मूर्तियों, परिधानों एवं तस्वीरों का संग्रह है। 
   महालक्ष्मी मंदिर: महालक्ष्मी मंदिर राज परिवार का मुख्य आस्था स्थल है। खास यह कि राज परिवार के सदस्य पहलेे गणेश मंदिर जाते थे। इसके बाद महालक्ष्मी मंदिर जाते थे। 18 वीं शताब्दी में बना महालक्ष्मी मंदिर वस्तुत: लक्ष्मी देवी को समर्पित है। महालक्ष्मी देवी को झांसी की कुल देवी माना जाता है। झांसी के बाशिंदों के मुख्य आराध्य गणेश जी हैं।
   गंगाधर राव की छतरी: गंगाधर राव की छतरी वस्तुत: लक्ष्मी ताल में गंगाधर राव की समाधि स्थल है। वर्ष 1853 में राव की मृत्यु के बाद महारानी लक्ष्मीबाई ने उनकी स्मृति में इस स्मारक का निर्माण कराया था।
   गणेश मंदिर: गणेश मंदिर वस्तुत: गणेश जी को समर्पित है। इसी मंंदिर में महाराजा गंगाधर राव एवं वीरागंना रानी लक्ष्मी बाई का विवाह हुआ था। मान्यता है कि मंदिर की निरन्तर 21 दिन 21 परिक्रमा करने से श्रद्धालुओं को अप्रत्यक्ष लाभ होता है।
   झांसी का किला की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट ग्वालियर एयरपोर्ट है। ग्वालियर एयरपोर्ट से झांसी का किला की दूरी करीब 100 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन झांसी जंक्शन है। पर्यटक झांसी का किला की यात्रा सड़क मार्ग से भी कर सकते हैं।
25.448759,78.570007

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