हेमिस राष्ट्रीय उद्यान: अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य
हेेमिस राष्ट्रीय उद्यान को विशिष्ट कहा जाना चाहिए। इस उद्यान का प्राकृतिक सौन्दर्य निराला है। खास तौर से हिम तेंदुआ सहित सहित कई विलुप्त वन्य जीवों का यह संरक्षण क्षेत्र है।
भारत के जम्मू एवं कश्मीर प्रांत के लेह-लद्दाख का हेमिस राष्ट्रीय उद्यान विशिष्टताओं से परिपूरित है। लिहाजा इसे भारत की राष्ट्रीय धरोहर भी माना जाता है। समुद्र तल से करीब 3300 से 6000 मीटर की ऊंचाई वाला यह इलाका किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
विशेषज्ञों की मानें तो हिमालय के उत्तरी क्षेत्र का यह एकमात्र सुन्दर एवं शानदार राष्ट्रीय उद्यान है। इस राष्ट्रीय उद्यान में वन्य जीवों की असंख्य विलुप्त प्रजातियां संरक्षित एवं पल्लवित हैं। विशेषज्ञों की मानें तो इस दिव्य-भव्य राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना वर्ष 1981 में हुई थी।
सिंधु नदी के शिखर पर विद्यमान यह राष्ट्रीय उद्यान करीब 600 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला था लेकिन इसके विशिष्ट महत्व को देखते हुये वर्ष 1990 में इसका क्षेत्रफल 3350 वर्ग किलोेमीटर बढ़ाया गया। जिससे हेमिस राष्ट्रीय उद्यान का दायरा बढ़ कर अब करीब 4000 वर्ग किलोमीटर हो गया है।
विशेषज्ञों की मानें तो हेमिस राष्ट्रीय उद्यान दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। इस विहंगम उद्यान को हेमिस हाई आल्टीट्यूट राष्ट्रीय उद्यान के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। इस राष्ट्रीय उद्यान का नामकरण हेेमिस मठ पर आधारित है।
यह प्रसिद्ध बौद्ध मठ 400 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। हेमिस मठ एवं आसपास का इलाका शीतल, शांत एवं शानदार हिल स्टेशन भी है। पर्यटक यहां पर्यटन का भरपूर आनन्द ले सकते हैं।
खास यह कि हेमिस राष्ट्रीय उद्यान में चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की शानदार आभा प्रस्फुटित होती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे हेमिस कोई स्वर्ग लोक हो।
खास यह कि चौतरफा मखमली घास के शानदार मैदान हैं तो वहीं सीना तानेे खड़े हिम शिखर प्राकृतिक सौन्दर्य में चार चांद लगाते हैं।
नदियों, झीलों एवं झरनों का प्रवाह एक खास रोमांच पैदा करता है। वन्य जीवों का स्वच्छंद विचरण पर्यटकों में एक खास रोमांच पैदा करता है।
इस राष्ट्रीय उद्यान में हिरन, हिम तेंदुआ, लंगूर, भेडिया, हिम छिपकली, हिम भालू, लैमरगियर गिद्ध एवं हिमालयन गिद्ध आदि इत्यादि स्वच्छंद विचरण करते दिखते हैं।
खास तौर से पक्षियों की विलुप्त प्रजातियों से वन क्षेत्र अनुगूंजित होता रहता है। विशेषज्ञों की मानें तो इस विलक्षण राष्ट्रीय उद्यान में 100 से अधिक पक्षियों की विलुप्त प्रजातियां सरंक्षित हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो इस उद्यान में 200 से अधिक हिम तेंदुआ होने का आंकलन है। खास यह कि हेमिस राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में कई छोटे-छोटे गांव भी हैं।
लिहाजा पर्यटक इन गांवों में भ्रमण केे दौरान प्रवास कर सकते हैं। हेमिस यात्रा का सबसे बेहतरीन समय मई से अक्टूबर की अवधि है।
हेमिस राष्ट्रीय उद्यान प्राकृतिक सम्पदाओं से भी अत्यधिक सम्पन्न है। चौतरफा पाइन के सघन वन क्षेत्र हेमिस की शान एवं शोभा हैं।
आैषधीय वनस्पतियों से आच्छादित सघन वन क्षेत्र पर्यटकों को खास ऊर्जा प्रदान करते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो विलुप्त आैषधीय वनस्पतियां भी यहां संरक्षित हैं।
आैषधीय वनस्पतियों से आच्छादित सघन वन क्षेत्र पर्यटकों को भरपूर ताजगी एवं भरपूर आक्सीजन प्रदान करते हैं।
हेमिस राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट कुशोक बकुला रिम्पोची एयरपोर्ट लेह है। निकटतम रेलवे स्टेशन जम्मू तवी जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी हेमिस राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा कर सकते हैं।
34.163427,77.584344
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