ओरछा किला: अद्भुत एवं विलक्षण
ओरछा किला के वास्तुशिल्प को अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए। जी हां, ओेरछा किला का सौन्दर्य अति दर्शनीय है।
भारत के मध्य प्रदेश का शहर ओरछा खास तौर से इस अद्भुत संरचना के लिए प्रसिद्ध है। यूं कहें कि ओरछा किला ओरछा शहर की शान एवं पहचान है तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। वस्तुत: ओरछा किला मध्य प्रदेश के जिला निवाड़़ी में स्थित एक अति पौराणिक संरचना है।
इस भव्य-दिव्य किला का निर्माण सोलहवीं सदी में राजा रुद्र प्रताप सिंह ने प्रारम्भ किया था। ओरछा वस्तुत: वेतवा नदी एवं जामनी नदी के संगम पर स्थित यह एक छोटा शहर है।
यहां ग्रेनाइट से एक भव्य-दिव्य पुल भी बना है। निवाड़ी से करीब 27 किलोमीटर दूर स्थित शहर ओरछा वस्तुत; पौराणिकता के लिए जाना पहचाना जाता है।
झांसी से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित ओरछा वास्तुशिल्प की शानदार संरचनाओं का शहर है। ओरछा किला की दिव्यता-भव्यता अति दर्शनीय है। किला परिसर में भवनों, मंदिरों एवं आलीशान संरचनाओं की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है।
विशेषज्ञों की मानें तो इस शानदार शहर को स्मारकों का शहर भी कहा जा सकता है। अति सुन्दर एवं दर्शनीय राज महल एवं राम मंदिर की स्थापना राजा मधुरकर सिंह ने की थी। जहांगीर महल एवं सावन भादों महल का निर्माण राजा वीर सिंह देव ने किया था।
मान्यता है कि राम राजा मंदिर ईश्वरी चमत्कार की देन है। भगवान राम को समर्पित चतुर्भुज मंदिर का निर्माण किया गया लेकिन चतुर्भुज मंदिर में मूर्ति स्थापना से भगवान श्री राम की प्रतिमा को राम राजा महल में रख दिया गया लेेकिन मंदिर बनने के बाद भगवान श्री राम की प्रतिमा को स्थापित करने के लिए उठाया गया तो प्रतिमा हिली तक नहीं।
लिहाजा राजा महल को राम राजा महल के तौर पर परिवर्तित कर दिया गया। ओरछा किला में आकर्षक एवं सुन्दर स्थानों की एक शानदार श्रंखला विद्यमान है। इतना ही नहीं, ओरछा शहर में पौराणिक स्मारकों की एक शानदार श्रंखला है।
राजा महल: राजा महल वस्तुत: राजाओं एवं रानियों का निवास था। राजवंश ने वर्ष 1783 तक यहां निवास किया था। हालांकि इस महल को अति साधारण स्वरूप दिया गया था लेकिन फिर भी इसकी दिव्यता-भव्यता अति दर्शनीय है।
राजा महल: राजा महल वस्तुत: राजाओं एवं रानियों का निवास था। राजवंश ने वर्ष 1783 तक यहां निवास किया था। हालांकि इस महल को अति साधारण स्वरूप दिया गया था लेकिन फिर भी इसकी दिव्यता-भव्यता अति दर्शनीय है।
खास यह कि इसका एक हिस्सा धर्म एवं आध्यात्म को समर्पित है। महल के कक्षों में देवी-देवताओं एवं पौराणिकता से सुसज्जित किया गया है। महल की ऊपरी मंजिल एवं छतों को कांच से सुसज्जित किया गया है।
खास यह कि सूर्य की तपिश केे बावजूद महल के कक्ष शीतल रहते हैं। खास यह कि इस शानदार महल में कई गुप्त मार्ग भी हैं।
जहांगीर महल: जहांगीर महल वस्तुत: मुगल शासक जहांगीर एवं बुंदेेलों की मित्रता की शानदार निशानी है। इसे ओरछा की शान एवं आकर्षण भी माना जाता है। इस महल केे प्रवेश द्वार पर दो हाथी बने हैं।
तीन मंजिला इस इमारत का निर्माण मुगल शासक जहांगीर के स्वागत एवं शान में राजा वीर सिंह देव ने कराया था। वास्तु की दृष्टि से यह भव्य इमारत अद्वितीय है।
राज महल: राज महल ओरछा के प्राचीन स्मारक में से एक है। यह महल छतरियों, बेहतरीन आंतरिक भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। महल में धर्मग्रंथों से जुड़ी तस्वीरों की लम्बी श्रंखला विद्यमान हैं।
राम राजा मंदिर: राम राजा मंदिर वस्तुत: भगवान श्री राम को समर्पित दिव्य-भव्य मंदिर है। करीब 400 वर्ष पहले ओरछा में भगवान श्री राम का राज्याभिषेक हुआ था।
खास यह कि ओरछा में राजा के रूप में भगवान राम को पूजा जाता है। राम राजा मंदिर दुनिया का एक मात्र मंदिर है, जहां भगवान श्री राम को एक राजा के रूप में पूजा जाता है।
राय प्रवीण महल: राय प्रवीण महल राजा इन्द्रमणि की खूबसूरत गणिका प्रवीण राय की स्मृति को समर्पित है। प्रवीण राय एक कवियत्री एवं संगीतज्ञ थीं।
मुगल शासक अकबर ने प्रवीण की सुन्दरता से प्रभावित होकर दिल्ली लाने का आदेश दिया था लेकिन गणिका का राजा इन्द्रमणि के प्रति प्रेम देख कर वापस ओरछा भेज दिया था। यह महल प्राकृतिक सौन्दर्य से आच्छादित है।
लक्ष्मी नारायण मंदिर: लक्ष्मी नारायण मंदिर वस्तुत: ओरछा गावं के पश्चिम में एक पहाड़ पर स्थित है। मंदिर का निर्माण राजा वीर देव सिंह ने कराया था। मंदिर में खास तौर भगवान श्री कृष्ण एवं रानी झांसी की छवियां हैं।
चतुर्भुज मंंदिर: चतुर्भुज मंदिर वस्तुत: ओरछा की शान है। यह मंदिर चार भुजा धारी भगवान श्री विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1558 से 1573 की अवधि में राजा मधुकर ने कराया था। यह उत्कृष्ठ संरचना यूरोपियन शैली पर आधारित है।
फूलबाग: फूूलबाग बुंदेल राजाओं का सैरगाह था। फूलों की विभिन्न प्रजातियों से आच्छादित यह बाग-बगीचा ओरछा का मुख्य आकर्षण माना जाता है। वस्तुत: फूलबाग बुंदेल राजाओं का आरामगाह था। फूलबाग में भूमिगत महल एवं आठ स्तम्भ वाला मण्डप भी है।
चतुर्भुज मंंदिर: चतुर्भुज मंदिर वस्तुत: ओरछा की शान है। यह मंदिर चार भुजा धारी भगवान श्री विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1558 से 1573 की अवधि में राजा मधुकर ने कराया था। यह उत्कृष्ठ संरचना यूरोपियन शैली पर आधारित है।
फूलबाग: फूूलबाग बुंदेल राजाओं का सैरगाह था। फूलों की विभिन्न प्रजातियों से आच्छादित यह बाग-बगीचा ओरछा का मुख्य आकर्षण माना जाता है। वस्तुत: फूलबाग बुंदेल राजाओं का आरामगाह था। फूलबाग में भूमिगत महल एवं आठ स्तम्भ वाला मण्डप भी है।
ओरछा किला की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट खजुराहो एयरपोर्ट है। खजुराहो एयरपोर्ट से ओरछा किला की दूरी करीब 163 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन ओरछा जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी ओरछा किला की यात्रा कर सकते हैं।
25.416800,78.651398
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