सरखेज रोजा : विलक्षण वास्तुशिल्प
सरखेज रोजा का वास्तुशिल्प अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए। सरखेज रोजा का वास्तु सौन्दर्य निश्चय ही पर्यटक को आकर्षित करता है।
सरखेज रोजा भारत के गुजरात प्रांत के शहर अहमदाबाद में स्थित है। अहमदाबाद की यह शानदार इमारत वैश्विक पर्यटकों के खास आकर्षण का केन्द्र है।
इसे गुजरात की खूबसूरत एवं पौराणिक इमारतों में एक माना जाता है। खास यह कि इसे अहमदाबाद शहर की शान भी माना जाता है।
विशेषज्ञों की मानें तो सरखेज रोजा का निर्माण मुगल शासक सुल्तान अहमद शाह के शासनकाल में किया गया था। वस्तुत: प्राचीनकाल में सरखेज अहमदाबाद का एक छोटा गांव था।
मान्यता है कि इसी गांव में पीर शेख अहमद गट्टू गंज बक्श रहा करते थे। विशेषज्ञों की मानें तो मुगल शासक सुल्तान अहमद ने पीर साहब की याद में इस शानदार मकबरा का निर्माण कराया था।
मान्यता है कि 15 वीं शताब्दी में महमूद बेगडा ने इस मकबरा के निकट एक शानदार महल एवं सुन्दर झील का निर्माण कराया था।
इसके शानदार अतीत एवं गौरव को ध्यान में रखते हुए गुजरात सरकार ने इसे पौराणिक स्थल घोषित कर दिया। फिलहाल इस सौन्दर्यशाला की देखरेख गुजरात सरकार एवं पुरातत्व विभाग संयुक्त रूप से करते हैं।
खास यह कि सरखेज रोजा का वास्तु शिल्प अति दर्शनीय है। गुजरात में इसे रोजा काम्प्लेक्स के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। इसकी भव्यता-दिव्यता अति दर्शनीय है।
खास यह कि यह आलीशान मकबरा अपने अस्तित्व में बहुत कुछ रखता है। सरखेज रोजा में महल, मकबरा झील, शानदार मस्जिद, मखमली घास से आच्छादित मैदान-लॉन आदि इत्यादि हैं।
अहमदाबाद से करीब 7 किलोमीटर दूर स्थित यह आलीशान एवं पौराणिक इमारत सौन्दर्य शास्त्र को खुद-ब-खुद बयां करती है।
हालांकि वर्तमान परिवेश में सरखेज रोजा को एक आदर्श पिकनिक स्पॉट माना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो महमूद बेगडा ने इसके स्वरूप को आधुनिक विस्तार दिया था। जिससे सरखेज रोजा के सौन्दर्य में चार चांद लग गये।
खास यह कि सरखेज रोजा के महल में गर्मी महल भी है। गर्मी महल में कभी भी गर्मी का एहसास नहीं होेता है। यह खास महल हमेशा एक शांत शीतलता का एहसास कराता है।
बाद में सरखेज रोजा के इसी परिसर में मुगल शासक सुल्तान अहमद शाह ने अपने बेटे एवं बेगम का भी मकबरा बनवाया था।
इस शानदार इमारत की विशेषता यह है कि इसका वास्तु शिल्प मिश्रितशैली पर आधारित है। इसमें इस्लामिक वास्तुशिल्प दिखता है तो वहीं इसमें हिन्दू शैली एवं जैन अलंकरण भी दिखते हैं। यह मिश्रित निर्माण शैली अद्भुत एवं विलक्षण है।
विशेषज्ञों की मानें तो यह निर्माण शैली दुर्लभ है। ऐसा वास्तुशिल्प कम ही स्मारकों में देखने को मिलता है। सरखेज रोजा के गुम्बद, खम्भों एवं कोष्ठक आदि इस्लामिक शैली पर आधारित हैं।
खास यह कि अलंकरण आदि हिन्दू शैली पर आधारित हैं। यहां की अधिकांश संरचनाओं में मेहराब नहीं है। पत्थरों पर यहां डिजाइन की शानदार श्रंखला दर्शनीयता को बढ़ाती है।
विशेषज्ञों की मानें तो इस दिव्य-भव्य इमारत के वास्तुकार आजम एवं मुआज्जम खान थे। सरखेज रोजा की संरचना इसकी पौराणिकता के साथ-साथ सौन्दर्य शास्त्र को भी बयां करती है।
सरखेज रोजा की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट सरदार वल्लभ भाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट अहमदाबाद है। निकटतम रेलवे स्टेशन अहमदाबाद जंक्शन है। पर्यटक सड़़क मार्ग से भी सरखेज रोजा की यात्रा कर सकते हैं।
22.975890,72.497630
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