बागेश्वर : अद्भुत एवं विलक्षण
बागेश्वर को हिन्दुओं का महातीर्थ कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। इस पवित्र भूमि को भगवान सदाशिव की भूमि कहा जाता है।
भारत के उत्तराखण्ड का शहर बागेश्वर आध्यात्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक एवं खास तौर से धार्मिक महत्व है। समुद्र तल से करीब 1004 मीटर की ऊंचाई पर रचा-बसा यह शहर काफी कुछ अद्भुत एवं विलक्षण है।
बागेश्वर वस्तुत: तीन नदियों के संगम पर स्थित है। सरयू नदी, गोमती नदी एवं अव्यक्त भागीरथी नदी बागेश्वर में प्रवाहमान हैं।
मान्यता है कि बागेश्वर की पवित्र धरती के दर्शन मात्र से पापों से मुक्ति मिल जाती है। मान्यता है कि पुराणों में बागेश्वर के महात्म का सारगर्भित उल्लेख है।
कहावत है कि बागेश्वर की पवित्र भूमि के दर्शन से व्यक्ति जन्म एवं मृत्यु के शाश्वत बंधन से मुक्त हो जाता है। बागेश्वर वस्तुत: एक छोटा शहर है लेकिन इसका धार्मिक महत्व शिखर की ख्याति रखता है।
सरयू नदी, गोमती नदी एवं भागीरथी नदी का संगम होने के कारण बागेश्वर का विशेष धार्मिक महत्व है। हालांकि बागेश्वर को एक बड़े बाजार के तौर पर भी जाना पहचाना जाता है। सरयू नदी की मान्यता है कि सरयू नदी में स्नान करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही अश्वमेघ यज्ञ का पुण्य हासिल होता है।
सरयू का सतोगुणी जल पीने से सोमपान का फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस तीर्थ यात्रा के दौरान किसी की मृत्यु होती है तो उसे भगवान सदाशिव का सानिध्य प्राप्त होता है।
बागेश्वर तीर्थ वस्तुत: सूर्य तीर्थ एवं अग्नि तीर्थ के मध्य विद्यमान है। शहर के पूर्व मेें भुलेश्वर महादेव, पश्चिम में नीलेश्वर पर्वत, उत्तर दिशा में सूर्य कुण्ड तीर्थ एवं दक्षिण दिशा में अग्नि कुण्ड तीर्थ विद्यमान हैं।
खास यह कि बागेश्वर में बागेश्वर नाथ का प्राचीन मंदिर भी है। बागेश्वर नाथ को बागनाथ एवं बाघनाथ भी कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव ने बाघ का स्वरूप धारण किया तो इस स्थान को ब्याघ्रेश्वर कहा जाने लगा।
कालान्तर में यह बदल कर बागीश्वर फिर बागेश्वर हो गया। मान्यता है कि अनादिकाल में मुनि वशिष्ठ तपबल से ब्राह्मा के कमण्डल से निकली सरयू को धरती पर ला रहे थे। मार्ग में ऋषि मार्कण्डेय को तपस्या करते देख मां सरयू वहीं रूक गयीं।
मुनि वशिष्ठ ने भगवान शिव से प्रार्थना की तोे भगवान शिव ने बाघ का स्वरूप धारण किया। साथ ही पार्वती जी को गाय स्वरूप प्रदान किया। कथानक के अनुसार बाघ ने गाय पर हमला किया। जिस पर गाय रंभाने लगी।
इस पर ऋषि मार्कण्डेय की तपस्या टूटी। जैसे ही ऋषि मार्कण्डेय गाय को बचाने के लिए दौड़े तो भगवान शिव ने बाघ का स्वरूप त्याग कर साक्षात शिव के स्वरूप में प्रकट हो गये। पार्वती ने भी गाय का स्वरूप त्याग कर स्वयं प्रकट हो गयीं।
ऋषि मार्कण्डेय को शिव एवं पार्वती के दर्शन हुए। इसके बाद मां सरयू आगे बढ़ सकीं। बागेश्वर एवं आसपास आकर्षक एवं धार्मिक स्थानों की एक लम्बी श्रंखला है।
बाघनाथ मंदिर: बाघनाथ मंदिर वस्तुत: भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है। इसका निर्माण अल्मोड़ा के राजा लक्ष्मी चन्द ने कराया था।
सूर्य कुण्ड एवं अग्नि कुण्ड: सूर्य कुण्ड एवं अग्नि कुण्ड वस्तुत: सरयू नदी से जनित प्राकृतिक कुण्ड हैं।
चण्डिका मंदिर: चण्डिका मंदिर शहर बागेश्वर से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित है। श्रद्धालुओं का सैलाव यहां नवरात्र में दिखता है।
श्रीहर मंदिर: श्रीहर मंदिर भी बागेश्वर का एक आकर्षण है। विजयादशमी पर यहां विशाल मेला का आयोजन होता है।
गौरी उड्यार: गौरी उड्यार एक प्राचीन गुफा है। इसमें भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। यह स्थान शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित है।
सूर्य कुण्ड एवं अग्नि कुण्ड: सूर्य कुण्ड एवं अग्नि कुण्ड वस्तुत: सरयू नदी से जनित प्राकृतिक कुण्ड हैं।
चण्डिका मंदिर: चण्डिका मंदिर शहर बागेश्वर से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित है। श्रद्धालुओं का सैलाव यहां नवरात्र में दिखता है।
श्रीहर मंदिर: श्रीहर मंदिर भी बागेश्वर का एक आकर्षण है। विजयादशमी पर यहां विशाल मेला का आयोजन होता है।
गौरी उड्यार: गौरी उड्यार एक प्राचीन गुफा है। इसमें भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। यह स्थान शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित है।
बागेश्वर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट पंत नगर एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी यात्रा कर सकते हैं।
29.838300,79.773900
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