लक्ष्मी विलास महल: प्राचीन एवं सुन्दर धरोहर
लक्ष्मी विलास महल को भारत की शानदार राजसी धरोहर कहा जाना चाहिए। जी हां, लक्ष्मी विलास महल की भव्यता-दिव्यता अति दर्शनीय है।
खास यह कि इस महल का वास्तुशिल्प अति सुन्दर एवं शानदार है। शायद इसीलिए लक्ष्मी विलास महल वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा है। भारत के गुजरात प्रांत के बडोदरा शहर में स्थित यह महल राजसी शान का उत्कृष्ट उदाहरण है।
इसे राजसी संरचनाओं की उत्कृष्टता कहा जाना चाहिए। यह ऐतिहासिक महल वास्तुकला की इण्डो-सारासेनिक रिवाइवल शैली पर आधारित है। खास यह कि इसका आकार प्रकार बकिंघम पैलेस के आकार से चार गुना बड़ा है।
राजसी काल में लक्ष्मी विलास महल महाराजा सयाजी राव गायकवाड़ का निजी निवास था। यह शानदार महल गुजरात के साथ साथ देश-विदेश में खास ख्याति रखता है। करीब 700 एकड़ क्षेत्रफल में फैला यह महल एक शानदार राजसी अलंकरण है।
विशेषज्ञों की मानें लक्ष्मी विलास महल भारत की राजसी श्रेष्ठतम संरचनाओं में से एक है। गायकवाड़ राजघराना प्रसिद्ध मराठा राज परिवार के तौर पर देश दुनिया में जाना पहचाना जाता है।
वस्तुत: लक्ष्मी विलास महल एक विहंगम संरचना है। जिसमें सौन्दर्य का हर आयाम रेखांकित है।
खास तौर से बाग-बगीचों से लेकर मंदिर आदि की सुन्दर संरचनायें हैं। प्राचीन शास्त्रीय शैली पर आधारित नजारबाग पैलेस भी अति विलक्षण है।
खास यह कि लक्ष्मी विलास महल की आतंरिक संरचना भी अति दर्शनीय है। आतंरिक साज-सज्जा यूरोपियन शैली को बयां करती है। इस विशाल पैलेस में मोेती बाग पैलेस, महाराजा फतेह सिंह संग्रहालय खास तौर से शोभा एवं शान हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो वर्ष 1930 के दशक में महाराजा प्रताप सिंह ने यूरोपीय मेहमानों के लिए लक्ष्मी विलास महल परिसर में एक शानदार गोल्फ कोर्स बनाया था। हालांकि इसे बाद में देश की जनता के लिए भी खोल दिया गया।
खास यह कि लक्ष्मी विलास महल का दरबार हाल बेहद आकर्षक है। इस दरबार हॉल में संगीत समारोह एवं अन्य सांस्कृतिक समारोह के आयोजन होते हैं। मोजेक फर्श, बेल्जियम ग्लास एवं अन्य बेहतरीन वस्तुओं से सजा यह महल पर्यटकों को स्वत: आकर्षित करता है।
दरबार हाल केे बाहर आंगन में एक शानदार फव्वारा पर्यटकों का स्वागत करता है। खास तौर से महल में कांस्य, संगमरमर एवं टेराकोटा की मूर्तियां दर्शनीय हैं। केव गार्डेन का सौन्दर्य अतुलनीय है।
मोती बाग क्रिकेट ग्राउण्ड गुजरात की शान माना जाता है। दुर्लभ इनडोर टेनिस कोर्ट एवं बैडमिंटन कोर्ट को विशिष्ट माना जाता है।
खास यह कि लक्ष्मी विलास महल में एक रेलवे लाइन भी है। यह रेलवे ट्रैक महल से स्कूल तक जाता है। राज परिवार के राजवंश शिक्षा के लिए रेल से स्कूल आते जाते थे।
खास यह कि लक्ष्मी विलास महल में एक छोटा चिड़ियाघर भी है। चिड़ियाघर में एक तालाब भी है। यह तालाब खास तौर से मगरमच्छों का आशियाना था। यहां की बावली प्राचीन वैभव को बयां करती है।
महाराजा फतेह सिंह संग्रहालय: महाराजा फतेह सिंह संग्रहालय खास तौर से लक्ष्मी विलास महल की शान है। इसे कला का खास खजाना भी कह सकते हैं। यहां राजा रवि वर्मा के कला संसार का दिग्दर्शन किया जा सकता है।
यहां यूूरोपियन कला शैली भी दर्शित है। इस शानदार संग्रहालय में कांस्य के बर्तन, पत्थर के बर्तन, चीनी मिट्टी के बर्तन, जापानी मिट्टी के बर्तन एवं ताम्र बर्तन आदि विशिष्ट दर्शनीय हैं। इसके अलावा प्रसिद्ध ग्रीक एवं रोमन मूर्तियां भी यहां प्रदर्शित हैं।
लक्ष्मी विलास महल की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बडोदरा एयरपोर्ट गुजरात है। एयरपोर्ट शहर से करीब 6 किलोमीटर दूर स्थित है।
निकटतम रेलवे स्टेशन भी बडोदरा में है। बडोदरा जंक्शन शहर में स्थित है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी लक्ष्मी विलास महल, बडौदरा की यात्रा कर सकते हैं।
22.311200,73.181980
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