चमोली : पर्वतीय सौन्दर्य
चमोली को प्राकृतिक सौन्दर्य का इन्द्रधनुषी आयाम कहा जाना चाहिए। जी हां, उत्तराखण्ड के चमोली में चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की निराली छटा विद्यमान है।
चमोली प्राकृतिक सुन्दरता के संग पौराणिकता, धार्मिकता एवं आध्यात्किता की विशिष्टता भी रखता है। चमोली में केदारनाथ एवं गोपेश्वर सहित धार्मिक स्थानों की एक लम्बी श्रंखला रखता है तो वहींं झीलों-झरनों एवं नदियों की भी बड़ी संख्या है। खास यह कि विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी भी चमोली के सीमा क्षेत्र में विद्यमान है।
मखमली घास के लॉन-मैदान यहां की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं तो वहीं हिम शिखर पर्यटकों को रोमांचित करते हैं। सर्दियों के मौसम में बर्फबारी का भरपूर आनन्द पर्यटक यहां ले सकते हैं। गढ़वाल मण्डल का चमोली प्राकृतिक सुन्दरता से देश दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करता है।
वस्तुत: चमोली मध्य हिमालय में स्थित एक खूबसूरत पर्वतीय शहर है। चमोली की मुख्य नदी अलकनंदा है। अलकनंदा तिब्बत के जासकर से निकल कर चमौली होकर प्रवाहित होती है।
करीब 3525 वर्ग मील में फैला चमोली अपने आगोश में खूबसूरती का हर आयाम रखता है। यह प्राकृतिक भण्डारण के लिए खास तौर से प्रसिद्ध है। नदियों का संगीतमय प्रवाह कर्णप्रिय प्रतीत होता है।
खास यह कि हिन्दुओं के चार धाम में एक धाम बद्रीनाथ चमोली जिला में ही स्थित है। चमोली की प्राकृतिक सुन्दरता के कारण ही इसे उत्तराखण्ड की शान कहा जाता है।
चमोली एवं उसके आसपास धार्मिक, ऐतिहासिक, पर्यटन एवं खूबसूरत स्थानों की एक लम्बी श्रंखला है। खास तौर से देखें तो बद्रीनाथ, तपकुण्ड, वसुंधरा वॉटर फॉल्स, हेमकुण्ड साहिब, गोपेश्वर, नन्द प्रयाग, पंच प्रयाग, देव प्रयाग, विष्णु प्रयाग, फूलों की घाटी एवं आैली सहित बहुत कुछ दर्शनीय है।
बद्रीनाथ धाम: बद्रीनाथ धाम देश का प्रमुख धार्मिक स्थान है। बद्रीनाथ धाम मुख्यत: भगवान विष्णु को समर्पित है। मंदिर की स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी। बद्रीनाथ धाम में गर्भगृह, दर्शन मण्डप एवं सभा मण्डप खास हैं।
बद्रीनाथ धाम: बद्रीनाथ धाम देश का प्रमुख धार्मिक स्थान है। बद्रीनाथ धाम मुख्यत: भगवान विष्णु को समर्पित है। मंदिर की स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी। बद्रीनाथ धाम में गर्भगृह, दर्शन मण्डप एवं सभा मण्डप खास हैं।
धार्मिक मान्यता है कि गंगा अवतरण के बाद 12 धाराओं में विभक्त होकर धरती पर आयीं थीं। इनमें से एक अलकनन्दा के रूप प्रसिद्ध है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने यहां तप किया था।
तप के दौरान हिमपात होने लगा तो माता लक्ष्मी ने वृक्ष का रूप धारण कर भगवान को हिमपात से बचाया था। बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु का पूजन-अर्चन लक्ष्मी जी के साथ होता है।
तपकुण्ड: तपकुण्ड वस्तुत: अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। इस कुण्ड का जल सदैव गर्म रहता है। लिहाजा इसे तपकुण्ड कहा जाता है। बद्रीनाथ धाम में दर्शन से पहले तपकुण्ड में स्नान करना आवश्यक होता है।
वसुंधरा वॉटर फॉल्स: वसुंधरा वॉटर फॉल्स की एक लम्बी श्रंखला चमोली में विद्यमान है। चुनिंदा वॉटर फॉल्स को वसंुधरा के नाम से जाना पहचाना जाता है। यह खूबसूरत वॉटर फॉल्स अलकनंदा नदी पर स्थित है।
वसुंधरा वॉटर फॉल्स की बद्रीनाथ धाम से दूरी करीब 9 किलोमीटर है। इसकी ऊंचाई करीब 400 फुट है। वसुंधरा वॉटर फॉल्स चमोली का आदर्श स्थान है।
हेमकुण्ड: हेमकुण्ड वस्तुत: एक बर्फ झील है। समुद्र तल से करीब 4632 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हेमकुण्ड का क्षेत्र सात पर्वत श्रंखला से घिरा है। यहां विशिष्ट आकार-प्रकार का गुरुद्वारा है।
हेमकुण्ड सिख धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थानों में से एक है। इसे सिख समुदाय का वैश्विक धार्मिक केन्द्र कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। मान्यता है कि सिख पंथ के गुरु गोविन्द सिंह जी ने यहां तपस्या की थी।
गोपेश्वर: गोपेश्वर चमोली का प्रमुख धार्मिक स्थान है। हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में गोपेश्वर की अपनी एक अलग विशिष्टता है। गोपेश्वर में हालांकि शिव मंदिरों की एक लम्बी श्रंखला है। फिर भी प्राचीन मंदिर शिव जी को समर्पित है।
नन्द प्रयाग: नन्द प्रयाग वस्तुत: अलकनन्दा का संगम स्थल है। नन्द प्रयाग हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ है।
नन्द प्रयाग: नन्द प्रयाग वस्तुत: अलकनन्दा का संगम स्थल है। नन्द प्रयाग हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ है।
समुद्र तल से यह स्थान करीब 2805 फुट ऊंचाई पर स्थित है। नन्द प्रयाग में भगवान गोपाल जी के दर्शन कर सकते हैं। नन्द प्रयाग की अपनी एक अलग धार्मिक मान्यता है।
पंच प्रयाग: पंच प्रयाग वस्तुत: नदियों का संगम स्थल है। हिमालय से निकलने वाली पांच नदियों का संगम स्थल है। मुख्य रूप से यह पांच नदियां विष्णु प्रयाग, नन्द प्रयाग, कर्ण प्रयाग, रुद्र प्रयाग एवं देव प्रयाग हैं।
देव प्रयाग: देव प्रयाग वस्तुत: अलकनंदा एवं भागीरथी का संगम स्थल है। देव प्रयाग में कई प्रसिद्ध मंदिर भी हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने राजा बाली से यहां तीन कदम भूमि मांगी थी। यहां दशहरा, रामनवमी एवं बसंत पंचमी को मेला भी लगता है।
पंच प्रयाग: पंच प्रयाग वस्तुत: नदियों का संगम स्थल है। हिमालय से निकलने वाली पांच नदियों का संगम स्थल है। मुख्य रूप से यह पांच नदियां विष्णु प्रयाग, नन्द प्रयाग, कर्ण प्रयाग, रुद्र प्रयाग एवं देव प्रयाग हैं।
देव प्रयाग: देव प्रयाग वस्तुत: अलकनंदा एवं भागीरथी का संगम स्थल है। देव प्रयाग में कई प्रसिद्ध मंदिर भी हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने राजा बाली से यहां तीन कदम भूमि मांगी थी। यहां दशहरा, रामनवमी एवं बसंत पंचमी को मेला भी लगता है।
विष्णु प्रयाग: विष्णु प्रयाग वस्तुत: अलकनंदा एवं धौली गंगा का संगम स्थल है। यह स्थान समुद्र तल से करीब 6000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। विष्णु प्रयाग से जोशीमठ की दूरी करीब 12 किलोमीटर है।
फूलों की घाटी: फूलों की घाटी प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। हिमालय श्रंखला की यह घाटी फूलों की विभिन्न प्रजातियों से मौसम के अनुकूल गुलजार रहती है।
फूलों की घाटी: फूलों की घाटी प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। हिमालय श्रंखला की यह घाटी फूलों की विभिन्न प्रजातियों से मौसम के अनुकूल गुलजार रहती है।
पौराणिक कथाओं की मानें तो लक्ष्मण की प्राण रक्षा के लिए हनुमान जी यहां संजीवनी लेने आये थे। इस घाटी में फूलों की 521 प्रजातियां हैं। वर्ष 1982 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। फूलों की घाटी में वन्य जीवन भी अवलोकित होता है। फूलों की घाटी में काला भालू, हिरण, भूरा भालू, तेंदुआ, चीता एवं अन्य जीव जन्तु देखने को मिलते हैं। यूनेस्को ने फूलों की इस घाटी विश्व धरोहर घोषित किया है।
चमोली की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जॉली ग्रांट देहरादून है। जॉली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून से चमोली की दूरी करीब 221 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। ऋषिकेश से चमोली की दूरी करीब 105 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी चमोली की यात्रा कर सकते हैं।
30.403600,79.330900
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