Sunday, 7 October 2018

भीमबेटका गुफाएं: प्राचीन सौन्दर्य

    भीमबेटका गुफाएं निश्चय ही प्राचीन सौन्दर्य का अनुपम आयाम हैं। मध्य प्रदेश के रायसेन जिला के इस पुरातात्विक एवं प्राचीन स्थल का सौन्दर्य शास्त्र दर्शनीय है।

   भीमबेटका गुफाओं को भीमबेटका शैलाश्रय भी कहा जाता है। भीमबेटका शैलचित्रों एवं शैलाश्रय के लिए देश दुनिया में प्रसिद्ध है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 45 किलोमीटर दूर भीमबेटका की गुफाएं मध्य पाषाण काल की मानीं जाती हैं।

    विशेषज्ञों की मानें तो भारतीय उपमहाद्वीप में मानव जीवन के प्राचीनतम चिह्न यह गुफाएं हैं। विशेषज्ञों की मानें तो भीमबेटका गुफाओं की खोज वर्ष 1957-1958 के आसपास डाक्टर विष्णु श्रीधर याकणकर ने की थी।

   विशिष्टताओं से प्रभावित होकर वर्ष 1990 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इस क्षेत्र को राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित कर दिया था। यूनेस्को ने भीमबेटका गुफाओं को वर्ष 2003 में विश्व धरोहर स्थल घोषित कर दिया था। 

    भीमबेटका गुफाओं में प्राचीन किला, लघु स्तूप, पाषाण निर्मित भवन, शुंग गुप्त कालीन अभिलेख, परमार कालीन मंदिर आदि इत्यादि हैं। मान्यता है कि भीमबेटका गुफाओं का ताल्लुक महाभारत काल के चरित्र भीम से है। शायद इसी लिए इस स्थान का नामकरण भीमबेटका है। 

   भीमबेटका गुफाएं वस्तुत: विंध्याचंल की पहाड़ियों के निचले किनारे पर स्थित है। इसी स्थान पर दक्षिण में सतपुड़ा पहाडियों की श्रंखला प्रारम्भ हो जाती हैं। भीमबेटका गुफाएं खास तौर से करीब 750 शैलाश्रय चित्रों से सुशोभित हैं। भीमबेटका गुफाओं में प्रवेश करते ही शिलाओं पर अंकित जानकारियां वस्तुस्थिति से अवगत कराती हैं। 

   इन शैलचित्रों में मुख्यत: नृत्य, सामूहिक नृत्य, संगीत, रेखांकित मानव आकृति, शिकार, पशु-पक्षी, युद्ध, प्राचीन मानव इतिहास, हाथियों की सवारी, घोड़ों की दौड़, आभूषण सज्जा, बाघ, सिंह, शेर आदि इत्यादि हैं।

   चित्रों में खास तौर से खनिज रंगों का उपयोग किया गया है। इनमें लाल, गेरुआ, सफेद, हरा एवं पीला रंग प्रयोग किया गया है। यह शैल चित्र हजारों वर्ष पूर्व का जीवन दर्शाते हैं। भीमबेटका गुफाओं की दर-ओ-दीवार पर धार्मिक संकेत भी दिखते हैं।

    भगवान गौतम बुद्ध का दर्शन शास्त्र भी यहां दिखता है। इतना ही नहीं भीमबेटका गुफाओं के आसपास भी प्राचीन धरोहर की एक लम्बी श्रंखला है। भीमबेटका गुफाओं से करीब 5 किलोमीटर दूर पेंगावन में 35 शैलाश्रय पुरातत्व विभाग को मिले थे। 

   यह शैल चित्र भी अति दुलर्भ माने जाते हैं। इन शैल चित्रों की प्राचीनता भी हजारों वर्ष पुरानी है। भीमबेटका गुफाओं की यह श्रंखला रायसेन जिला के ओबेदुल्लागंज से करीब 9 किलोमीटर दूर स्थित है।

   खास यह भीमबेटका गुफाओं का यह क्षेत्र विशेष वनस्पतियों से घिरा है। प्राकृतिक सौन्दर्य का यह इन्द्रधनुषी आयाम अति दर्शनीय है।

   भीमबेटका गुफाओं की तुलना आस्ट्रेलिया के ककाडू नेशनल पार्क से की जाती है। विशेषज्ञों की मानें तो गुफाओं एवं आश्रय स्थलों की प्राचीनता 30000 साल से भी पुरानी अवलोकित होती है।


   भीमबेटका गुफाओं की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट भोपाल है। भोपाल से भीमबेटका गुफाओं की दूरी करीब 45 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन भी भोपाल में स्थित है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी भीमबेटका की यात्रा कर सकते हैं।
23.330000,77.784100

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