Monday, 15 October 2018

द्वाराहाट: मंदिरों का प्राचीन सौन्दर्य

   द्वाराहाट का सौन्दर्य शिल्प देख कर कोई भी मुग्ध हो सकता है। इसे पौराणिक एवं ऐतिहासिक लघु शहर कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। 

   उत्तराखण्ड का द्वाराहाट वस्तुत: पर्वतीय क्षेत्र का एक सुन्दर आबाद क्षेत्र है। अल्मोड़ा जिला का द्वाराहाट अपनी विशिष्टता के कारण विश्व में एक खास स्थान रखता है। रानीखेत से करीब 21 किलोमीटर दूर स्थित द्वाराहाट मंदिरों के लिए विशेष तौर पर प्रसिद्ध है। 
   खास यह कि कई मंदिर तो प्रतिमा विहीन हैं लेकिन मंदिरों का सौन्दर्य शिल्प देखते ही बनता है। पर्वतीय क्षेत्र का यह सुन्दर इलाका अपनी आगोश में मंदिरों की विशिष्टता रखता है। 
   विशेषज्ञों की मानें तो द्वाराहाट में मंदिरों की 3 श्रेणियां हैं। इनको कचहरी, मनिया एवं रत्नदेव कहा जाता है। द्वाराहाट के मंदिर पौराणिकता एवं ऐतिहासिकता को खुद-ब-खुद बयां करते हैं। 
   ऐतिहासिक दृष्टि से द्वाराहाट का विशेष महत्व है। यहां गूजरदेव का मंदिर सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका शिल्प सौन्दर्य एवं इसकी प्राचीनता विशिष्ट है। कलात्मकता की दृष्टि से इस मंदिर को उत्कृष्ट कहा जा सकता है। मंदिर को चारों ओरसे भित्ति अंकन एवं कला पूर्ण शिलापट्ट श्रंखला से अलंकृत किया गया है। 

    द्वाराहाट का माता शीतला देवी का मंदिर भी दिव्य-भव्य है। द्वाराहाट को वैराटपट्टन तथा लखनपुर सहित कई अन्य नामों से भी जाना पहचाना जाता है। कुमाऊं की प्रचलित लोककथाओं में द्वाराहाट को देवताओं की राजधानी भी कहा गया है। इसके पीछे एक बड़ा कारण यह है कि द्वाराहाट उत्तराखण्ड के भौगोलिक क्षेत्र के मध्य में स्थित है।

   कहावत है कि देवताओं ने द्वाराहाट को राजधानी के तौर पर चुना था। इसकी सुन्दरता एवं भव्यता दक्षिण भारत के कृष्ण की द्वारका के समानान्तर है। मान्यता है कि इस नगर की योजना प्रारम्भ हुई तो निर्णय लिया गया कि यहां रामगंगा एवं कोसी नदियों का संगम बनाया जाये। 

   देवताओं ने तत्काल गगास नदी से रामगंगा एवं कोसी को सूचना देने को कहा। हालात यह रहे कि विघ्न बाधाओं के कारण द्वाराहाट देव राजधानी नहीं बन सका। फिर भी द्वाराहाट की पौराणिकता, ऐतिहासिकता एवं सौन्दर्य शिल्प अतुलनीय है। उत्तराखण्ड के इस इलाके पर खास तौर से कत्यूरी एवं चन्द शासकों का शासन रहा। 

    कत्यूरी शासकों ने गढ़वाल जोशीमठ से चलकर गोमती नदी के किनारे बैजनाथ गांव के निकट शिव पुत्र स्वामी कार्तिकेय के नाम से कर्तिकेयपुर नगर की स्थापना की थी। यह सभी इलाके द्वाराहाट के अधीन आते हैं।
    विशेषज्ञों की मानें तो 12 वीं शताब्दी से लेकर 14 वीं शताब्दी तक कत्यूरी वंश की शाखायें द्वाराहाट से लेकर आसपास के इलाके में फैली हुर्इं थीं। समुद्र तल से करीब 1510 मीटर ऊंचाई पर स्थित द्वाराहाट शीतलता एवं सुन्दरता के लिए विशेष पहचान रखता है। 
   खूबसूरती एवं मंदिरों के लिए प्रसिद्ध द्वाराहाट को मंदिरों का गांव भी कहा जाता है। दूनागिरी एवं नयना देवी मंदिर को शक्ति स्थल के तौर पर मान्यता है। 

   मान्यता है कि दुर्लभ जड़ी बूटियां संजीवनी शक्ति मंदिर के आंतरिक क्षेत्र में पैदा होती हैं। द्वाराहाट में मंदिरों की लम्बी श्रंखला होने के कारण इसे कुमाऊं का खजुराहो भी कहते हैं। द्वाराहाट पर्यटकों को स्वर्णिम एवं देव लोक की यात्रा का एहसास कराता है। 

   द्वाराहाट का महामृत्युंजय मंदिर विशेष है। यह मंदिर भगवान शिव-मृत्युंजय अर्थात मृत्यु पर विजय पाने वालों को समर्पित है। यह मंदिर नागर शिखर शैली में निर्मित है। इसमें गर्भगृह, अंतराल एवं मण्डप आदि बहुत कुछ है।

    द्वाराहाट के मंदिरों का शिल्प विशिष्ट है। पत्थरों को तराश कर कहीं देवी देवताओं का अंकन किया गया है तो कहीं सुन्दर आयामों को गढ़ा गया है। द्वाराहाट की पौराणिकता, ऐतिहासिकता एवं खूबसूरती को पर्यटन ने विकास के पंख लगा दिये।

    लिहाजा इस पौराणिक नगर की ओर देश-विदेश के पर्यटकों का आकर्षण बना रहता है। समुद्र तल से 1510 मीटर ऊंचाई पर स्थित होने के कारण द्वाराहाट ने हिल स्टेशन का भी स्वरूप धारण कर लिया है। शांत वातावरण एवं शीतलता एक सुखद एहसास कराती है। प्राचीन मैथाडिस्ट चर्च भी यहां के सौन्दर्य शास्त्र का एक सुन्दर नगीना है।
    द्वाराहाट की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट पंतनगर है। पंतनगर एयरपोर्ट से द्वाराहाट की दूरी करीब 112 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम जंक्शन है। काठगोदाम रेलवे स्टेशन से द्वाराहाट की दूरी करीब 88 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी द्वाराहाट की यात्रा कर सकते हैं।
29.774800,79.427300

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