कटारमल सूर्य मंदिर: विशिष्ट स्थापत्य कला
कटारमल सूर्य मंदिर की स्थापत्य कला एवं शिल्प कला की विशिष्टता खास तौर से देश दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करती है।
कटारमल सूर्य मंदिर उत्तराखण्ड की आगोश में रचे-बसे अल्मोड़ा में स्थित है। समुद्र तल से करीब 2116 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह सूर्य मंदिर देश दुनिया के आकर्षण का केन्द्र है। अधेली गांव स्थित कटारमल सूर्य मंदिर की स्थापत्य कला विलक्षण है। इसकी संरचना में कलात्मकता के विविध पहलुओं का दिग्दर्शन होता है।
विशेषज्ञों की मानें तो कटारमल सूर्य मंदिर की संरचना कत्यूरी राजवंश के शासनकाल में हुई थी। कुमाऊं के ऊंचे इलाके में कटारमल सूर्य मंदिर की पौराणिकता एवं ऐतिहासिकता का अपना एक अलग आयाम है।
विशेषज्ञों की मानें तो अल्मोड़ा का यह सूर्य मंदिर देश के प्राचीनतम सूर्य मंदिरों में से एक है। विशेषज्ञों की मानें तो कटारमल सूर्य मंदिर का निर्माण 6 वीं से 9 वीं शताब्दी के मध्य किया गया।
सुन्दर पत्थरों की यह संरचना श्रंखला अति दर्शनीय है। बताते हैं कि कटारमल सूर्य मंदिर की संरचना कत्यूरी राजवंश के शासक कटारमल के शासनकाल में किया गया था।
सूर्य देव को समर्पित कटारमल सूर्य मंदिर के शिखर भले ही खण्डित हो चुके हों, लेकिन विशालता, दिव्यता, भव्यता एवं वैभव आज भी रोमांचित करता है।
मुख्य कटारमल सूर्य मंदिर के आसपास 45 से अधिक छोटे-छोटे मंदिरों की एक शानदार श्रंखला है। मुख्य मंदिर की संरचना त्रिरथ आधारित है। वर्गाकार गर्भगृह के साथ चक्ररेखी शिखर सहित निर्मित है। गर्भगृह का प्रवेश द्वार काष्ठ कला का बेजोड उत्कीर्ण है।
हालांकि इसके कुछ अवशेष नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में प्रदर्शित हैं। कटारमल सूर्य मंदिर का पौराणिक महत्व भी कम नहीं है।
विशेषज्ञों की मानें तो उत्तराखण्ड की कंदराओं में ऋषियों मुनियों की तपस्या में असुरों ने विघ्न डाले। असुरों ने अत्याचार किया। अत्याचार से परेशान ऋषियों मुनियों ने कंजार पर्वत पर सूर्य देव की स्तुति एवं आराधना की।
सूर्य देव ने प्रसन्न होकर अपने दिव्य तेज को वटशिला में स्थापित कर दिया था। इसी वटशिला पर कत्यूरी राजवंश के शासक कटारमल ने बड़ादित्य नामक तीर्थ स्थान के रूप में सूर्य मंदिर का निर्माण कराया था। बाद में यह सूर्य मंदिर कटारमल सूर्य मंदिर के नाम से विख्यात हुआ।
अब इस स्थान को कटारमल के नाम से जाना पहचाना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो सूर्य मंदिर कुमाऊं मण्डल में सबसे ऊंचा, विशाल एवं अनूठा मंदिर माना जाता है।
उडीसा के कोणार्क सूर्य मंदिर के बाद कटारमल सूर्य मंदिर को सबसे प्राचीन सूर्य मंदिर के तौर पर माना जाता है।
इसकी भव्यता-दिव्यता एवं विशिष्टता देख कर भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित स्मारक घोषित किया है। सूर्य देव प्रधान देवताओं की श्रेणी में आते हैं। सूर्य देव समस्त सृष्टि के आधार स्वरूप माने जाते हैं। सम्पूर्ण भारत में सूर्य देव की उपासना श्रद्धा एवं समर्पण के साथ की जाती है।
विशेषज्ञों की मानें तो समय-समय पर कटारमल सूर्य मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाता है। इसे बड़ा आदित्य सूर्य मंदिर भी कहा जाता है।
खास यह कि सूर्य देव के इस मंदिर में भगवान आदित्य की प्रतिमा किसी धातु या पत्थर की न होकर लकड़ी की है। पूूर्व दिशा की ओर मुख वाले इस मंदिर को विलक्षण माना जाता है। मंदिर की संरचना नागर शैली पर आधारित है।
कटारमल सूर्य मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट पंतनगर है। पंतनगर एयरपोर्ट से कटारमल सूर्य मंदिर की दूरी करीब 135 किलोमीटर है।
निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है। काठगोदाम रेलवे स्टेशन से कटारमल सूर्य मंदिर की दूरी करीब 130 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी कटारमल सूर्य मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
29.843050,79.337480
29.843050,79.337480







No comments:
Post a Comment