बेकल किला: विलक्षण सुन्दर संरचना
बेकल किला को स्थापत्य कला एवं शिल्प सौन्दर्य का एक बेहतरीन आयाम कहें तो शायद कुछ गलत न होगा।
केरल के कासारगोड स्थित यह दिव्य-भव्य किला बेहद दर्शनीय है। शायद इसी लिए इसे पर्यटन स्थल घोषित किया गया है। खास यह कि बेकल किला केरल के मुख्य पर्यटन स्थलों में एक है। देखें तो बेकल किला तटीय किला की श्रेणी में आता है।
कासारगोड के दक्षिण-पूर्व में करीब 15 किलोमीटर दूर पल्लीक्करे गांव के अरब सागर तट पर यह सुन्दर किला स्थित है।
विशेषज्ञों की मानें तो बेकल किला की संचरना एवं निर्माण शिवप्पा नायक ने किया था। कर्नाटक से निकटता होने के कारण बेकल किला का सामरिक महत्व विजयनगर से खास तौर से रहा।
मान्यता यह भी है कि बेकल किला कोलाथिरी राजाओं के शासनकाल में मौजूद था। बेकल किला की दिव्यता-भव्यता बेहद विहंगम है। करीब चालीस एकड़ क्षेत्रफल में फैले बेकल किला की सुन्दर संरचना पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है।
लैटेराइट पत्थरों से संरचित किला की दीवारें 12 मीटर ऊंची हैं। किला का ताल्लुक समुद्र से भी है। किला के लिए स्थल का चयन बेहद सूूझबूझ के साथ किया गया।
कारण किला से क्षेत्र का पूरा परिदृश्य दिखता है। समुद्र की दिशा में प्राचीर एवं परकोटे हैं। बीच-बीच में तोपों के लिए बुर्ज बने हैं।
मुख्य द्वार सहित पूर्ण किला बुर्ज से सुरक्षित है। महत्वपूर्ण यह है कि किला में सीढ़ीदार टैंक भी है। सुरंग किला की गोपनीयता को बयां करती है तो गोला बारुद रखने के लिए बारुदखाना भी है। निगरानी मंच तक जाने के लिए चौड़ा रास्ता है।
विशेषज्ञों की मानें तो उत्खनन में धर्म निरपेक्ष एवं धार्मिक ढ़ांचे भी मिले हैं। उत्खनन में टकसाल की भी महत्वपूर्ण खोज हो सकी। इसी में मध्ययुगीन महल परिसर भी शामिल हैं। समुद्र तल से करीब 130 फुट ऊंचाई पर बना यह किला सुन्दर संरचना का विहंगम आयाम है।
बेकल किला से सूर्योदय एवं सूर्यास्त का लालित्य पूर्ण दृश्य बेहद लुभावना प्रतीत होता है। बेकल किला प्राकृतिक सुषमा के साथ ही एक खूबसूरत धरोहर भी है। प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर बेकल किला अपनी विशिष्टताओं के कारण देश दुनिया में एक अलग ही स्थान रखता है।
यह स्थान साम्प्रदायिक सौहाद्र्र को भी प्रदर्शित करता है। हनुमान जी का मुखप्रणाणा मंदिर एवं प्राचीन मस्जिद यहां की शोभा हैं। वस्तुत: देखें तो बेकल किला भूमि एवं समुद्र का संगम स्थल है।
विशेषज्ञों की मानें तो बेकल किला केरल का सबसे बड़ा एवं सुन्दर किला है। हालांकि इसका अपना एक लम्बा इतिहास है। फिर भी यह किला करीब 500 वर्ष पुराना है।
भारतीय पुरातात्विक विभाग ने इसे विशेष पर्यटन क्षेत्र घोषित किया है। यहां की विशिष्टताएं ही पर्यटकों, इतिहासकारों एवं प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करती हैं।
मखमली घास के हरे-भरे मैदान पर्यटकों को न केवल लुभाते हैं बल्कि खिलंदड़पन का मन होता है। समुद्र की लहरें रोमांचित करती हैं। इसे एक आदर्श पिकनिक स्पॉट भी कह सकते हैं। पर्यटक बेकल किला में सैरसपाटा या घूमना फिरना सुबह सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक कर सकते हैं।
बेकल किला की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट मंगलोर है। निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा कालीकट में स्थित है।
कालीकट एयरपोर्ट से बेकल किला की दूरी करीब 200 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन कासरगोड जंक्शन है। यहां से बेकल किला की दूरी करीब 12 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी बेकल किला की यात्रा कर सकते हैं।
12.394680,75.034410
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